
मंगेश जाधव के परिजन विलाप करते हुए
मुंबई:
महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के वरवंड कस्बे में 65 साल की महिला ने खेत में कीटनाशक पीकर और उसके 30 साल के बेटे ने खेत के पास बने कुएं में कूदकर खुदकुशी कर ली। सुसाइड नोट में 30 साल के मंगेश जाधव ने सूखे से फसल की बर्बादी और 4 लाख के कर्ज का जिक्र किया है। सुसाइड नोट के पीछे की ओर जाधव ने अपनी पत्नी के लिए संदेश छोड़ा है, जिसमें लिखा है, 'हमारे दोनों बच्चों का ध्यान रखना। मुझे इस दुनिया को छोड़ने के लिए माफ कर देना। अपना ख्याल रखना।'
सूखे के चलते फसल हो गई भी तबाह
30 साल के मंगेश ने 3 एकड़ खेत में फसल बोई थी, लेकिन सूखे ने पूरी लागत लील ली। मंगेश अपने बच्चों के लिए फिक्रमंद थे, आज उन्हीं बच्चों को बेसहारा छोड़ गए। उनके एक रिश्तेदार प्रमोद जौघले ने बताया कि मंगेश को बच्चों की फिक्र रहती थी, मां के बारे में बात करता था, कहता था उसके जाने के बाद उनका क्या होगा। बैंक के कर्ज से परेशान था इसलिए उसने आत्महत्या कर ली।
पर्ची पर बैंक लोन का जिक्र
बुलढाणा में वरवंड से रोते बिलखते रिश्तेदारों के बीच मां प्रमिला और बेटे मंगेश की अर्थी उठी। सुसाइड नोट में बैंक के 4 लाख रुपये के कर्ज और सूखे का ज़िक्र है। मंगेश 3 एकड़ खेत जोत रहे थे, सूखे से फसल तो नहीं हो रही थी, लेकिन बैंक का ब्याज बढ़ता जा रहा था। परेशान होकर मां-बेटे ने उसी उजाड़ सूखे खेत में खुदकुशी कर ली। इस मामले की तफ्तीश में जुटे इंस्पेक्टर अविनाश भामरे ने बताया, "खेत में आम के पेड़ के पास मां ने कोई ज़हर पी लिया था, जबकि बेटे ने कुछ दूरी पर बने कुएं में कूदकर जान दे दी। हमें एक पर्ची मिली, जिसमें बैंक के कर्ज का जिक्र था।"
किसान मंगेश जाधव और उसकी मां ने सूखे से फसल की बर्बादी और कर्ज के कारण खुदकुशी कर ली।
महाराष्ट्र में हालात बेहद गंभीर
महाराष्ट्र में 2015 में औसतन हर दिन 9 किसानों ने खुदकुशी की। 2016 में हालात और खराब हैं, पीने को पानी नहीं है, सिंचाई के लिए सोचना भी मुश्किल है। मां-बेटे की एक साथ खुदकुशी का राज्य में शायद ये पहला मामला है, जो इशारा दे रहा है कि किसानों के साथ उनके परिजन भी आस की डोर छोड़ने लगे हैं।
सूखे के चलते फसल हो गई भी तबाह
30 साल के मंगेश ने 3 एकड़ खेत में फसल बोई थी, लेकिन सूखे ने पूरी लागत लील ली। मंगेश अपने बच्चों के लिए फिक्रमंद थे, आज उन्हीं बच्चों को बेसहारा छोड़ गए। उनके एक रिश्तेदार प्रमोद जौघले ने बताया कि मंगेश को बच्चों की फिक्र रहती थी, मां के बारे में बात करता था, कहता था उसके जाने के बाद उनका क्या होगा। बैंक के कर्ज से परेशान था इसलिए उसने आत्महत्या कर ली।
पर्ची पर बैंक लोन का जिक्र
बुलढाणा में वरवंड से रोते बिलखते रिश्तेदारों के बीच मां प्रमिला और बेटे मंगेश की अर्थी उठी। सुसाइड नोट में बैंक के 4 लाख रुपये के कर्ज और सूखे का ज़िक्र है। मंगेश 3 एकड़ खेत जोत रहे थे, सूखे से फसल तो नहीं हो रही थी, लेकिन बैंक का ब्याज बढ़ता जा रहा था। परेशान होकर मां-बेटे ने उसी उजाड़ सूखे खेत में खुदकुशी कर ली। इस मामले की तफ्तीश में जुटे इंस्पेक्टर अविनाश भामरे ने बताया, "खेत में आम के पेड़ के पास मां ने कोई ज़हर पी लिया था, जबकि बेटे ने कुछ दूरी पर बने कुएं में कूदकर जान दे दी। हमें एक पर्ची मिली, जिसमें बैंक के कर्ज का जिक्र था।"

महाराष्ट्र में हालात बेहद गंभीर
महाराष्ट्र में 2015 में औसतन हर दिन 9 किसानों ने खुदकुशी की। 2016 में हालात और खराब हैं, पीने को पानी नहीं है, सिंचाई के लिए सोचना भी मुश्किल है। मां-बेटे की एक साथ खुदकुशी का राज्य में शायद ये पहला मामला है, जो इशारा दे रहा है कि किसानों के साथ उनके परिजन भी आस की डोर छोड़ने लगे हैं।
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