इस साल जनवरी में राजधानी दिल्ली में तीन नाबालिगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था. तीनों पर एक 6 साल की बच्ची का रेप करने का आरोप था. कानूनन तीनों नाबालिग थे लेकिन तीनों ने मिलकर इतनी हैवानियत की थी कि वह बच्ची ठीक से चल भी नहीं पा रही थी.
इसी तरह अप्रैल में नागपुर में पुलिस ने 13 नाबालिगों को पकड़ा था. इन सभी ने मिलकर एक 22 साल के व्यक्ति की बेरहमी से हत्या कर दी थी. हत्या 100 रुपये के विवाद को लेकर हुई थी.
ये दो घटनाएं इतना बताने के लिए काफी हैं कि हमारे देश में अब नाबालिग तेजी से अपराध की ओर बढ़ रहे हैं.
हाल ही में नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट आई है. इसमें सामने आया है कि दो साल में नाबालिगों के खिलाफ अपराध के मामलों में 14% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है. NCRB के मुताबिक, 2022 में नाबालिगों के खिलाफ 30,555 मामले दर्ज किए गए थे. 2024 में यह बढ़कर 34,878 हो गए.
चिंता बढ़ाते हैं आंकड़े
NCRB की रिपोर्ट बताती है कि 2024 में दर्ज मामलों 58.9 लाख मामले दर्ज किए गए थे. 2023 की तुलना में यह 6 फीसदी की गिरावट थी.
लेकिन इसके उलट, नाबालिगों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों में बढ़ोतरी हुई है. चिंता वाली बात यह है कि नाबालिग रेप, मर्डर, लूटपाट और किडनैपिंग जैसे गंभीर अपराधों भी शामिल हो रहे हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराध के 2,557 मामलों में नाबालिगों को आरोपी बनाया गया था. इसके अलावा मर्डर और किडनैपिंग जैसे 8,943 मामलों में आरोपी नाबालिग थे.
2024 में नाबालिगों के खिलाफ रेप के 1,067 और मर्डर के 1,120 मामले दर्ज किए गए थे. अगर इसका औसत निकाला जाए तो हर दिन रेप और मर्डर के 3-3 मामलों में आरोपी नाबालिग होते हैं.

कौन हैं ये नाबालिग?
2023 में 40,036 नाबालिगों को गिरफ्तार किया गया था. 2024 में 42,633 नाबालिगों को गिरफ्तार किया गया. यानी, एक साल में गिरफ्तार होने वाले नाबालिगों की संख्या लगभग 6.5 फीसदी बढ़ गई.
आमतौर पर ऐसा माना जाता है कि कम पढ़े-लिखे या बेघर बच्चे अपराध की तरफ ज्यादा बढ़ते हैं. लेकिन आंकड़े इस बात को नकारते हैं. गिरफ्तार होने वाले ज्यादातर नाबालिग आरोपी ठीक-ठाक पढ़े लिखे हैं और ज्यादातर अपने माता-पिता के साथ ही रहते हैं.
NCRB की रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में जितने नाबालिगों को गिरफ्तार किया गया, उनमें से 2,857 ही ऐसे थे जो अनपढ़ थे. 21,068 आरोपी ऐसे थे जिन्होंने 5वीं से 10वीं तक की पढ़ाई की थी. जबकि, 10वीं से 12वीं तक पढ़ाई करने वाले 8,301 और 12वीं पास 1,418 नाबालिगों को गिरफ्तार किया गया था.
इसी तरह, इनमें से सिर्फ 2,216 नाबालिग ही ऐसे थे जो बेघर थे और जिनके माता-पिता नहीं थे. जबकि 36,905 आरोपी ऐसे थे जो अपने माता-पिता के साथ रहते थे. इनके अलावा 3,512 आरोप किसी न किसी गार्जियन के साथ रहते थे.
हैरान करने वाली बात यह है कि ज्यादातर नाबालिग दोषी भी साबित हो जाते हैं. 2024 में नाबालिगों के खिलाफ अपराध के 87.3% मामलों में दोष साबित हुए थे. हालांकि, 2024 में 37,256 मामलों का निपटारा हुआ था, जिसमें से 17,977 यानी 48% से ज्यादा नाबालिगों को समझा-बुझाकर या चेतावनी देकर घर भेज दिया गया था. 10,286 मामलों में नाबालिग को सुधार गृह भेजा गया था. 3,320 मामलों में नाबालिगों पर जुर्माना लगाया गया था. सिर्फ 927 मामलों में ही आरोपी को जेल भेजा गया था. 4,746 मामलों में आरोपी को बरी कर दिया गया था.

नाबालिग क्यों करते हैं अपराध?
दुनिया के ज्यादातर मुल्कों में जिनकी उम्र 18 साल से कम है, उन्हें नाबालिग माना जाता है. भारत में भी यही परिभाषा है. नाबालिगों के अपराध के मामले में जुवेनाइल जस्टिस एक्ट से निपटा जाता है. 2012 के निर्भया कांड के बाद गंभीर और जघन्य अपराधों में 16 साल के अपराधी से भी वयस्क की तरह बर्ताव किया जाता है और मुकदमा चलाया जाता है.
नाबालिग हो या फिर कोई भी व्यक्ति अपराध की तरफ क्यों बढ़ता है? इसे लेकर कई सारी स्टडीज हैं. विश्व स्वास्थ्य सगंठन (WHO) के मुताबिक, अगर परिवार में हिंसा हो रही है, शराब या कोई दूसरे नशे की लत है या स्कूल नहीं जा रहा है, परिवार में बेरोजगारी है, माता-पिता या तो बहुत सख्त हैं या फिर ध्यान ही नहीं दे रहे, माता-पिता और बच्चों के बीच जुड़ाव कम है या फिर आपराधिक प्रवृत्ति वालों के साथ रहना या उठना-बैठना है... तो किसी बच्चे का हिंसा या अपराध की तरफ बढ़ने का खतरा ज्यादा है.
नशा सबसे बड़ा कारण है, जो किसी को भी हिंसा या अपराध की तरफ धकेल देता है. WHO का कहना है कि अगर शराब या नशीली चीजें आसानी से मिल रही हैं तो कोई भी बच्चा हिंसा की तरफ आसानी से बढ़ सकता है.
WHO का मानना है कि गरीबी कम करके और शहरी वातावरण को बेहतर करके नाबालिगों को हिंसा में आने से रोका जा सकता है. अमीरी और गरीबी का अंतर अपराध को बढ़ाता है, क्योंकि ऐसी स्थिति में अपनी भड़ास निकालने के लिए हिंसा सबसे आसान जरिया बन जाती है. इसलिए गैर-बराबरी कम करने के साथ-साथ स्कूली शिक्षा को बेहतर करके बच्चों को हिंसा और अपराध से बचाया जा सकता है.
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