चार राज्यों और पुदुचेरी में हुए विधानसभा चुनाव के परिणाम आ गए हैं. पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरलम में मतदाताओं ने सरकारें बदलने का फैसला सुनाया है. जबकि असम और पुदुचेरी में एनडीए की सत्ता बरकरार रखने का जनादेश मिला है. लेकिन इन सभी चुनावों में बहुत से ऐसे वोटर भी हैं जिन्होंने ना किसी पार्टी और ना किसी उम्मीदवार को पसंद किया. ऐसे वोटरों ने वहां नोटा (NOTA - The None of the Above) के बटन पर वोट डाले. चुनाव आयोग ने जो परिणाम जारी किए हैं उनमें नोटा के वोटों की संख्या और प्रतिशत भी बताई गई है.
सबसे अधिक नोटा के वोट
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार इस बार नोटा का सबसे अधिक प्रभाव असम में दिखाई दिया. वहां 1.23% मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया. असम इन पांचों जगहों में अकेला प्रदेश रहा जहां नोटा के वोटों का प्रतिशत 1 से ऊपर रहा. असम में कुल 2 लाख 67 हजार 191 मतदाताओं ने नोटा को वोट दिए.
पश्चिम बंगाल दूसरे नंबर पर रहा. वहां 0.78% नोटा के वोट पड़े. पश्चिम बंगाल में 4 लाख 94 हजार 932 वोटरों ने नोटा को वोट दिए.
तीसरे नंबर पर पुदुचेरी रहा जहां 0.77% मतदाताओं ने नोटा को वोट दिए. केरलम में 0.57% नोटा वोटिंग हुई. तमिलनाडु में सबसे कम 0.41% मतदाताओं ने नोटा को वोट दिए.
2014 में आया था नोटा
नोटा को सबसे पहले 2014 के लोकसभा चुनावों में लागू किया गया था. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद EVM वोटिंग मशीनों में नोटा का विकल्प शामिल किया गया. चुनावों में नोटा के मतों का महत्व इस बात से समझा जा सकता है कि इस बार तमिलनाडु में तिरुपत्तूर सीट पर मात्र 1 वोट से फैसला हुआ. विजय की पार्टी टीवीके ने डीएमके को मात्र 1 वोट से हरा दिया. इस सीट पर नोटा के 747 वोट डाले गए.
ये भी पढ़ें-:ममता की पार्टी को बंगाल में लगा झटका लेकिन TMC के लिए असम से आई अच्छी खबर
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं