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आगरा के आराध्य की अनोखी भक्ति, 13 साल में हाथों से नाप रहा बरसाना, देखकर रह जाएंगे हैरान

Mathura News: आगर का एक 13 साल का लड़का अपनी दादी की स्मृति को लेकर अनोखी आध्यात्मिक यात्रा कर रहा है. यह लड़का बरसाने में गहवर वन की परिक्रमा हाथों से कर रहा है. वह गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी अपना नाम दर्ज कराना चाहता है.

आगरा के आराध्य की अनोखी भक्ति, 13 साल में हाथों से नाप रहा बरसाना, देखकर रह जाएंगे हैरान
हाथों से बरसाने की परिक्रमा कर रहा आराध्य
मथुरा:

ब्रजभूमि में आस्था और भक्ति के अनोखे रंग देखने को मिलते हैं. जहां भक्त भगवान की भक्ति में कठिन से कठिन प्रण पूरा करनें में जुट जाते हैं. कुछ ऐसा ही कर रहे हैं आगरा के रहने वाले  13 साल के आराध्य गुप्ता. जो बरसाने में गहवर वन की परिक्रमा हाथों से कर रह हैं. उनका यह कठिन संकल्प देखकर हर कोई हैरान रह जाता है. क्योंकि करीब सात किलोमीटर की यह लंबी परिक्रमा हाथों से करना आसान नहीं है. लेकिन आगरा के आराध्य गुप्ता इस मुश्किल परिक्रमा में जुट गए हैं. जो भक्ति का अनोखा रंग है. खास बात यह है कि आराध्य यह कठिन परिक्रमा अपनी स्वर्गीय दादी की स्मृति में कर रहे हैं. 

25 फरवरी से शुरू की थी परिक्रमा

आगरा की रहने वाली सीमा को दो जुड़वा बच्चे हुए थे. जिनमें 13 साल का आराध्य गुप्ता अब राधा रानी की कृपा पाने के लिए बरसाना की हाथों से परिक्रमा कर रहा है. उसने यह परिक्रमा 25 फरवरी 2026 से शुरू की थी जो भीषण गर्मी में भी जारी है. इस गर्मी के मौसम में जहां लोगों का पैदल चलना भी दूभर है, उस गर्मी में यह किशोर हाथों से परिक्रमा कर रहा है. जिसे देखकर सभी हैरान रह जाते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि उसकी इस भक्ति और आस्था को देखकर बहुत आनंद की अनुभूति हो रही है उनका कहना है कि राधा रानी किशोरी की भक्ति में बहुत शक्ति है. वहीं आराध्य को शक्ति प्रदान कर रही हैं.  

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दादी के लिए परिक्रमा कर रहा आराध्य

वहीं परिक्रमा दे रहे किशोर आराध्य गुप्ता की मां सीमा गुप्ता का कहना है कि राधा रानी की कृपा से मेरा पुत्र हाथों से परिक्रमा लगा रहा है, यह परिक्रमा उसकी दादी के लिए समर्पित है उनका कहना है कि उन्हें काफी गर्व महसूस हो रहा है कि भक्ति के लिए हाथों से परिक्रमा दे रहा है. परिक्रमा दे किशोर आराध्य गुप्ता का कहना है कि वह हाथों से अपनी दादी के लिए परिक्रमा दे रहा हैं. उनका कहना है यह प्रेरणा उन्हें अपनी मम्मी से मिली है और यह परिक्रमा अपनी दादी के लिये समर्पित है. 

8 साल की उम्र से शुरू की थी प्रैक्टिस 

खास बात यह है कि आराध्य का यह लक्ष्य कोई एक दो दिन में नहीं बना था. बल्कि इसके लिए उसने बचपन से ही प्रयास करना शुरू कर दिया था. आराध्य ने 8 साल की उम्र से ही हाथों के बल चलने की प्रैक्टिस शुरू कर दी थी. वह लगातार पांच साल तक हाथों के बल चलने का अभ्यास करता रहा था. अब 13 साल की उम्र में उसने बरसाने की परिक्रमा शुरू कर दी है. इस यात्रा के दौरान उसकी मां सीमा गुप्ता लगातार उसके साथ बनी हुई हैं. वह लगातार अपने बेटे का हौसला भी बढ़ा रही हैं. 

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आराध्य अपनी इस मुश्किल लेकिन खास उपलब्धि को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड, एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में भी दर्ज कराना चाहता है. जिसके लिए उसने आधिकारिक रूप से आवेदन भी कर दिया है. आराध्य लगातार हाथों के बल चलते हुए राधारानी की परिक्रमा पूरी करने में जुटा है. जिसे देखने के लिए भी दूर-दूर से लोग आ रहे हैं.

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