- बंगाल की CM ममता बनर्जी का मालदा घटना पर बयान सामने आया है
- ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर राज्य की मशीनरी पर नियंत्रण छीनने और सुपर राष्ट्रपति शासन लागू करने का आरोप लगाया
- सुप्रीम कोर्ट ने मालदा कांड पर संज्ञान लेते हुए इस मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी से कराने के निर्देश दिए हैं
मालदा कांड पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का बयान सामने आया है. उन्होंने कहा है कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि मालदा जिले में सात न्यायिक अधिकारियों को पूरी रात बंधक बनाकर रखा गया था. सीएम ममता ने शिकायत की कि इस महीने होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले चुनाव आयोग द्वारा प्रशासन में शीर्ष-स्तरीय बदलाव लागू किए जाने के बाद अब उन्हें राज्य की मशीनरी पर अपना कंट्रोल महसूस नहीं होता. मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें इस घटना की जानकारी आधी रात को एक पत्रकार से मिली.
बंगाल में सुपर राष्ट्रपति शासन: ममता बनर्जी
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुर्शिदाबाद की एक रैली में अपना पक्ष रखते हुए प्रशासन पर नियंत्रण न होने की बात कही. मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें इस घटना की जानकारी आधी रात को एक पत्रकार से मिली. उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने राज्य की मशीनरी पर पूरी तरह कब्जा कर लिया है और वे गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशों पर काम कर रहे हैं. ममता ने इसे 'सुपर राष्ट्रपति शासन' करार दिया. बनर्जी के अनुसार, उनकी शक्तियां छीन ली गई हैं और आयोग कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पूरी तरह विफल रहा है.
VIDEO | West Bengal poll: CM Mamata Banerjee (@MamataOfficial) holds election campaign at Dhumurpahar, Murshidabad. She says, "You all know that the law and order have been completely snatched away from me, and EC is controlling everything, and the EC is controlled by BJP and… pic.twitter.com/LNOzm1qA31
— Press Trust of India (@PTI_News) April 2, 2026
सुप्रीम कोर्ट ने लिया संज्ञान
मालदा में हुई घटना पर सुप्रीम कोर्ट ने भी संज्ञान लिया है. चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि यह घटना न्यायिक संस्था के अधिकार को सोच-समझकर और जान-बूझकर दी गई चुनौती है. कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए निर्देश दिया कि इस मामले की जांच CBI या NIA जैसी केंद्रीय एजेंसी से कराई जाए. कोर्ट का मानना है कि यह अधिकारियों का मनोबल गिराने की एक सोची-समझी कोशिश है. कोर्ट ने नाराज़गी जताते हुए कहा, 'यह घटना न सिर्फ न्यायिक अधिकारियों को डराने-धमकाने की एक बेशर्मी भरी कोशिश है, बल्कि इस कोर्ट के अधिकार को भी चुनौती देती है.'
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मालदा में क्या हुआ था?
बता दें कि मालदा में बुधवार को उस समय जबरदस्त विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया, जब कई लोगों के नाम वोटर लिस्ट से काट दिए गए. लोगों की एक बड़ी भीड़ इकट्ठा हो गई और हालात तब और बिगड़ गए जब अधिकारियों को बंधक बना लिया गया. जिन सात लोगों को बंधक बनाया उनमें तीन महिलाएं भी शामिल थीं. राज्य की वोटर लिस्ट को चुनाव आयोग के आदेश पर SIR अभियान के तहत पूरी तरह से बदल दिया गया है. विपक्षी पार्टियों का कहना है कि इस अभियान का मकसद उन मतदाताओं को सूची से हटाना है जो उनके वोटर्स हैं. न्यायिक अधिकारी 23 अप्रैल को मतदान शुरू होने से पहले SIR का काम पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं.
बंधक बनाने की यह स्थिति नौ घंटे तक बनी रही, जब तक कि पुलिस और अर्धसैनिक बलों की एक टुकड़ी ने दखल नहीं दिया. गुरुवार रात करीब 1 बजे उन्हें एक सुरक्षित जगह पर पहुंचाया गया. रिपोर्टों के अनुसार, अधिकारियों को वहां से निकालने वाले वाहनों पर हमला करने की कोशिशें भी की गई. तस्वीरों में एक कार की खिड़की का शीशा टूटा हुआ दिखाई दिया और नाराज प्रदर्शनकारी दूसरे वाहनों पर पत्थर फेंकते नजर आए.
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