- सुप्रीम कोर्ट ने मधुमिता शुक्ला हत्या मामले में दोषी रोहित चतुर्वेदी की सजायाफ्ता सजा माफ कर दी है
- अदालत ने उत्तराखंड सरकार की चतुर्वेदी की रिहाई की सिफारिश खारिज करने वाली चिट्ठी रद्द कर दी है
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 9 जुलाई 2025 का आदेश मनमाना और गैर-तर्कसंगत था इसलिए उसे रद्द किया गया
सुप्रीम कोर्ट ने 2003 के कवयित्री मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में बड़ा फैसला किया है. अदालत ने इस मामले में दोषी रोहित चतुर्वेदी को राहत देते हुए सजायाफ्ता की सजा माफ कर दी है. सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार की उस चिट्ठी को रद्द कर दिया, जिसमें चतुर्वेदी की रिहाई की सिफारिश खारिज की गई थी. अदालत ने कहा कि यह आदेश मनमाना, बिना कारण और कानून के नजरिए से टिकाऊ नहीं था.
'दोषी को सुधरने का एक मौका तो मिलना चाहिए'
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम बिना किसी हिचक के मानते हैं कि 9 जुलाई 2025 का आदेश मनमाना और गैर-तर्कसंगत था, इसलिए इसे रद्द किया जाता है. सुनवाई के दौरान अदालत ने दंड व्यवस्था के सुधारात्मक सिद्धांत पर जोर देते हुए यूनानी दार्शनिक प्लेटो का जिक्र किया. बेंच ने कहा प्लेटो को कोट करते हुए कहा कि न्याय का उद्देश्य प्रतिशोध नहीं बल्कि सुधार होना चाहिए. अदालत ने कहा दोषी व्यक्ति 23 साल जेल में रह चुका है. यदि वह खुद को सुधारना चाहता है या सुधार चुका है, तो उसे अवसर मिलना चाहिए.

'अपराध एक बात है और सुधार दूसरी'
जस्टिस BV नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने गृह मंत्रालय के 9 जुलाई 2025 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें उत्तराखंड सरकार की समयपूर्व रिहाई की सिफारिश ठुकरा दी गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि चतुर्वेदी पहले से जेल से बाहर हैं, इसलिए उन्हें दोबारा सरेंडर करने की जरूरत नहीं है. अदालत ने कहा कि अपराध एक बात है और सुधार दूसरी.
यह मामला 9 मई 2003 को कवयित्री मधुमिता शुक्ला की हत्या से जुड़ा है. उस समय वह सात महीने की गर्भवती थीं. लखनऊ स्थित उनके घर में गोली मारकर हत्या की गई थी. बाद में जांच सीबाआई ने संभाली थी. CBI के अनुसार हत्या की साजिश में पूर्व मंत्री अमरमणि उनकी पत्नी मधुमणि त्रिपाठी, रोहित चतुर्वेदी और अन्य लोग शामिल थे. 2007 में देहरादून की ट्रायल कोर्ट ने सभी आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जिसे बाद में उत्तराखंड हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा.
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