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भ्रामक विज्ञापन पर सीसीपीए का सख्त एक्शन, दो कोचिंग संस्थानों पर लगा जुर्माना

सीसीपीए ने भ्रामक विज्ञापनों और अनुचित व्यापार के मामले में सख्त कार्रवाई करते हुए मोशन एजुकेशन प्राइवेट लिमिटेड पर 10 लाख रुपये और करियर लाइन कोचिंग (सीएलसी), सीकर पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है.

भ्रामक विज्ञापन पर सीसीपीए का सख्त एक्शन, दो कोचिंग संस्थानों पर लगा जुर्माना
  • सीसीपीए मोशन एजुकेशन और करियर लाइन कोचिंग पर भ्रामक विज्ञापन के लिए जुर्माना लगाया है.
  • दोनों संस्थानों ने IIT-JEE और NEET में सफल छात्रों के नाम और तस्वीरों का गलत तरीके से प्रचार किया था.
  • जांच में पता चला कि छात्र केवल टेस्ट सीरीज या खास बैच से जुड़े थे, लेकिन यह जानकारी छिपाई गई थी.
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केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने भ्रामक विज्ञापन और गलत व्यापार तरीके अपनाने के मामले में सख्त कदम उठाया है. इसके तहत मोशन एजुकेशन प्राइवेट लिमिटेड पर 10 लाख रुपये और करियर लाइन कोचिंग (सीएलसी), सीकर पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है. यह कार्रवाई उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत की गई, ताकि कोचिंग संस्थानों द्वारा गलत या अधूरी जानकारी देकर छात्रों और अभिभावकों को गुमराह करने पर रोक लगाई जा सके.

जांच में सामने आया कि दोनों संस्थानों ने IIT-JEE और NEET जैसी परीक्षाओं में सफल छात्रों के नाम और तस्वीरों का इस्तेमाल कर बड़े दावे किए, लेकिन यह नहीं बताया कि इन छात्रों ने वास्तव में कौन-सा कोर्स किया था. कई मामलों में यह जानकारी छिपाई गई कि छात्र सिर्फ टेस्ट सीरीज या खास बैच से जुड़े थे. इस तरह के प्रचार से यह गलत संदेश गया कि सभी सफल छात्र इन संस्थानों के नियमित कोर्स से ही पढ़े थे. इसके बाद सीसीपीए ने सख्त रुख अपनाते हुए साफ कहा कि विज्ञापनों में पूरी और सही जानकारी देना जरूरी है, ताकि उपभोक्ताओं को गुमराह न किया जाए.

मोशन एजुकेशन प्राइवेट लिमिटेड के मामले में संस्थान ने अपने विज्ञापनों में कई बड़े दावे किए थे, जैसे कि JEE और NEET परीक्षाओं में बड़ी संख्या में छात्रों के चयन का प्रतिशत और टॉप रैंक हासिल करने की बात. इन दावों को वेबसाइट, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और अखबारों के जरिए व्यापक रूप से प्रचारित किया गया. साथ ही, संस्थान ने अपने पेड कोर्स जैसे फुल-टाइम क्लास, रेजिडेंशियल प्रोग्राम और अलग-अलग बैचों का भी जोरदार प्रचार किया.

हालांकि, जांच में सामने आया कि जिन छात्रों की सफलता का जिक्र विज्ञापनों में किया गया, उनके द्वारा किए गए असली कोर्स की जानकारी नहीं दी गई. कई मामलों में यह साफ नहीं किया गया कि छात्र नियमित पेड कोर्स का हिस्सा थे या किसी खास बैच या टेस्ट प्रोग्राम से जुड़े थे. इस वजह से पूरे विज्ञापन भ्रामक साबित हुए, क्योंकि इससे यह गलत संदेश गया कि सभी सफल छात्र संस्थान के पेड कोर्स से ही पढ़कर आगे बढ़े. इसी आधार पर सीसीपीए ने कार्रवाई करते हुए पारदर्शिता की कमी और गलत जानकारी देने को गंभीर उल्लंघन माना.

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