साल का सबसे बड़ा दिन 21 जून और कभी-कभी 22 जून को होता है. इस साल 2026 में सबसे बड़ा दिन 21 जून रविवार को है. खगोलीय गणना के अनुसार, इस दिन भारत में दिन की अवधि लगभग 13 घंटे 58 मिनट की होगी. इस दिन के बाद सूर्य उत्तरायण से दक्षिणायन की ओर अपनी यात्रा शुरू करेंगे. इसे विज्ञान की भाषा में ग्रीष्म संक्रांति कहा जाता है. इस घटना के पीछे अहम खगोलीय (Astronomical) और वैज्ञानिक वजहें हैं. साथ ही ज्योतिष शास्त्र (Astrology) में भी इसे बेहद खास माना गया है.
धरती पर सबसे बड़ा दिन: वैज्ञानिक और खगोलीय कारण
खगोल वैज्ञानिकों का कहना है कि पृथ्वी सूर्य के चक्कर लगाती है, लेकिन वह अपनी धुरी (Axis) पर बिल्कुल सीधी खड़ी नहीं है. वह साढ़े 23 डिग्री झुकी हुई है. इस झुकाव और सूर्य की परिक्रमा के वजह से ही पृथ्वी पर मौसम बदलता है और दिन-रात छोटे-बड़े होते जाते हैं.
सबसे लंबा दिन: कर्क रेखा पर सूर्य की सीधी किरणें
NASA वैज्ञानिकों के अनुसार, 21 जून के दिन पृथ्वी का उत्तरी गोलार्ध (Northern Hemisphere) सूर्य की तरफ अपने अधिकतम झुकाव पर होता है. इस दिन सूर्य की सीधी किरणें भूमध्य रेखा के उत्तर में कर्क रेखा (Tropic of Cancer) पर सीधे 90 डिग्री के एंगल से पड़ती हैं. इस कारण उत्तरी गोलार्द्ध को इस दिन सूर्य की रोशनी सबसे ज्यादा समय के लिए मिलती है. उत्तरी गोलार्द्ध में भारत, अमेरिका, यूरोप और एशिया के कई देश आते हैं.
21 जून को दिन लंबा और सबसे छोटी रात क्यों होती है?
सूर्य आकाश में बहुत ऊंचे स्थान पर होता है, इसलिए उसे पूर्व से पश्चिम तक का सफर तय करने में सबसे लंबा समय लगता है. 21 जून को दिन की अवधि भारत में दिन लगभग 13 से 14 घंटे लंबा होती है. अलग-अलग जगहों पर समय में थोड़ा बदलाव होता है. इस दिन रात की अवधि लगभग 10 से 11 घंटे होती है, यानी साल की सबसे छोटी रात.
21 जून को गायब हो जाती है परछाई
दोपहर के समय जब सूर्य ठीक आपके सिर के ऊपर (Zenith) होता है तो कुछ पलों के लिए आपकी परछाई भी लगभग गायब या न्यूनतम हो जाती है, इसे जीरो शैडो डे (Zero Shadow Day) भी कहते हैं. यानी परछाई गायब हो जाती है. उत्तरी गोलार्ध में 21 जून को सबसे बड़ा दिन होता है. ठीक इसके उलट दक्षिणी गोलार्ध (Southern Hemisphere) में इस दिन साल की सबसे लंबी रात और सबसे छोटा दिन होता है. वहां इस समय सर्दियों की शुरुआत (Winter Solstice) होती है.
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ज्योतिष में कर्क संक्रांति
वैदिक ज्योतिष और पाश्चात्य ज्योतिष दोनों में ही इस खगोलीय घटना को बड़े बदलाव के तौर पर देखा जाता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन सूर्य मिथुन से कर्क राशि में प्रवेश करता है, जिसे कर्क संक्रांति कहते हैं. कर्क राशि का स्वामी चंद्रमा है, जो मन, जल और भावनाओं का वाहक होता है. अग्नि तत्व के सूर्य का चंद्रमा की राशि जल तत्व में जाना ऊर्जा का अनोखा संतुलन होता है.
उत्तरायण से दक्षिणायन की शुरुआत
हिंदू पंचांग और ज्योतिष के अनुसार, वर्ष को दो भागों में उत्तरायण और दक्षिणायण में बांटा गया है. 21 जून के बाद से सूर्य की गति दक्षिण की ओर होने लगती है, जिसे दक्षिणायन की शुरुआत माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि उत्तरायण को देवताओं का दिन और दक्षिणायन को देवताओं की रात माना जाता है. दक्षिणायन का समय आध्यात्मिकता, एकाग्रता, व्रत, संयम और आध्यात्मिक यात्रा के लिए उत्तम होता है.
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आध्यात्मिक ऊर्जा में बदलाव
ज्योतिष और योग शास्त्र में इस दिन को ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Energy) का चरम बिंदु माना जाता है. आत्मा और जीवन शक्ति का प्रतीक सूर्य इस दिन अपनी पूर्ण प्रचंडता में होता है. इस दिन पूरी दुनिया में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस' (International Yoga Day) भी मनाया जाता है. उस दिन शरीर और प्रकृति में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह सबसे अधिक माना जाता है.
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