नए कदमों के खिलाफ समुद्र के भीतर भी विरोध दर्ज करा रहे हैं लक्षद्वीप वासी
तिरुवनन्तपुरम:
- अपने कदमों को सही बताते हुए प्रफुल्ल पटेल का मानना है कि उनके इन फैसलों से लक्षद्वीप भी मालदीव की तरह एक प्रमुख पर्यटक स्थल बनेगा. इस द्वीप को पर्यटकों को आकर्षक करने के अनुरुप ही विकसित किया जा रहा है. लेकिन इसके विरोध में स्थानीय लोग अपने घरों और दुकानों के बाहर विरोध दर्ज करा रहे हैं.
- आलोचकों का कहना है कि प्रशासन के गलत कदमों के कारण अपने जंगलों और सफेद समुद्री बीचों के लिए मशहूर लक्षद्वीप के 70 हजार लोगों के मन में गुस्सा और डर पैदा हो गया है. जिन कदमों का सबसे ज्यादा विरोध हो रहा है, उनमें प्रमुख है मसौदा निरोध कानून, जिसके पीछे असामाजिक गतिविधियों की रोकथाम का हवाला दिया गया है. यह कानून किसी को भी हिरासत में लेकर एक साल तक हिरासत में रखने की शक्ति देता है.
- इसके अलावा लक्षद्वीप के लोगों को प्रस्तावित "लक्षद्वीप विकास प्राधिकरण विनियमन (2021)" पर भी आपत्ति है. उनका कहना है कि ऐसा करने से उनके खूबसूरत द्वीपों की अनूठी संस्कृति और परंपरा को खत्म हो जाएगा. क्योंकि भूमि अधिग्रहण, प्रशासन को अपनी मनमानी की ताकत देगा.
- लक्षद्वीप वासियों को गोजातीय जानवरों की हत्या और पशुओं के उपभोग, भंडारण, परिवहन और बिक्री पर प्रस्तावित प्रतिबंध पर भी नाराजगी है. उनका कहना है कि ऐसा करके लोगों की खाने की आदतों को टारगेट किया जा रहा है, क्योंकि वहां की ज्यादा आबादी मुस्लिम धर्म से ताल्लुक रखती है. पं
- पंचायत विनियमन मसौदा को लेकर भी लक्षद्वीप के लोगों को नाराजगी है. जिसके तहत दो से ज्यादा बच्चों वाले उम्मीदवार, ग्राम पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकते हैं.
- इसका विरोध कर रहे लोगों के अनुसार प्रस्ताव में कहा गया है कि प्राधिकारी मछली पकड़ने जैसे आजीविका के पारंपरिक जरिए को नष्ट करना चाहते हैं.
- बदलाव की आहट से स्थानीय लोगों का गुस्सा खुलकर सामने आ रहा है, जिसे कई राजनीतिक दलों का समर्थन भी मिल रहा है. कई सांसदों और नौकरशाहों ने इन परिवर्तनों के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की है. पिछले दिनों के केरल विधानसभा में तो सर्वसम्मति से प्रस्ताव को पारित तक प्रशासक प्रफुल्ल पटेल को वापस बुलाने की मांग की है.
- मसौदा कानून मंजूरी के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास है. लक्षद्वीप के सांसद मोहम्मद फैजल ने पिछले दिनों मीडिया को बताया था कि उन्हें गृह मंत्री अमित शाह ने आश्वासन दिया है कि लक्षद्वीप में लोगों की इच्छा के खिलाफ कोई कानून लागू नहीं किया जाएगा.
- रविवार को देश भर से 93 पूर्व सिविल अधिकारियों ने लक्षद्वीप को लेकर पीएम मोदी को एक ओपन लेटर लिखा है और चिंता जताते हुए इसे परेशान करने वाला घटनाक्रम करार दिया है. उन्होंने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश के लिए ऐसा उचित विकास मॉडल सुनिश्चित किया जाए जिसमें स्थानीय लोगों के विचार भी शामिल हों.
- अपने लेटर में पूर्व नौकरशाहों ने इन बदलावों की कोशिश को लक्षद्वीप के सामाजिक और धार्मिक ताने बाने के विपरित बताया है.
पूरी स्टोरी पढ़ें
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं
Lakshadweep, Protest Lakshadweep, Lakshadweep Protests At Homes