केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा पर पिछले साल उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे चार किसानों और एक पत्रकार की हत्या के आरोप में मुकदमा चलेगा. लखीमपुर की एक अदालत ने आज उनके और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए और घोषणा की कि मुकदमा 16 दिसंबर से शुरू होगा. यह अदालत द्वारा मिश्रा की डिस्चार्ज याचिका खारिज करने के एक दिन बाद आया है.
इस घटना में मारे गए पत्रकार रमन कश्यप के भाई पवन कश्यप ने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है. उन्होंने कहा, "मैं न्यायपालिका का शुक्रगुज़ार हूं. मैं सुप्रीम कोर्ट का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं, देरी हुई, लेकिन आरोप तय किए गए हैं. मुझे न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है."
-
जिस शशि थरूर को सुनती है पूरी दुनिया, संसद में वह किसे सुनना पसंद करते हैं? खुद खोला राज -
रुपये की गिरती कीमत पर RBI गवर्नर का बड़ा बयान, कोई फिक्स लेवल नहीं, जानिए क्या है रिजर्व बैंक का एक्शन प्लान -
टाटा संस की शेयर बाजार में लिस्टिंग अनिवार्य? RBI गवर्नर ने NDTV समिट में बताया ये क्यों है जरूरी -
मैं कर्म में विश्वास करता हूं... NDTV वर्ल्ड समिट में तुषार ने बताया किन वजहों से जीता यूके में मेयर का चुनाव -
AI से बुलेट ट्रेन तक... अश्विनी वैष्णव ने बताया भारत का फ्यूचर प्लान -
बिकिनी सीन करने में कृति सेनन को क्यों लगे 12 साल? बोलीं- 6-7 साल पहले ऐसा नहीं कर पातीं -
NDTV World Summit 2026: वेजिटेरियन खिलाड़ियों को कौन सी दिक्कतें होती हैं? Savita, Neeru ने बताया -
NDTV World Summit 2026 के मंच पर भारत की 'गोल्डन गर्ल्स' ने बताया जीत का मंत्रा! | Asian Games 2026 -
NDTV World Summit 2026: Lovlina Borgohain ने बताया जीवन का सबसे बड़ा चैलेंज! क्यों लगने लगे ठहाके? -
NDTV World Summit 2026: हॉकी चैंपियन नेहा गोयल का बड़ा खुलासा! दर्द में भी जीत का जश्न
इस घटना में मारे गए लोगों का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील मोहम्मद अमान ने कहा, "मुकदमे में देरी हुई है, आरोप तय करने में 9 महीने लग गए और वह भी सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस बारे में टिप्पणी किए जाने के बाद. किसानों को न्याय की उम्मीद है. मुझे लगता है कि ट्रायल तेजी से होना चाहिए."
पुलिस की चार्जशीट में मिश्रा पर हत्या का आरोप लगाया गया है. ऐसा आरोप है कि वह एक एसयूवी में थे, जो 3 अक्टूबर को लखीमपुर खीरी में एक विरोध मार्च के दौरान चार किसानों और एक पत्रकार के ऊपर चढ़ा दी गई थी. घटना के चौंकाने वाले दृश्यों में दिखाया गया था कि कार तेज गति से प्रदर्शन कर रहे किसानों को टक्कर मार रही थी. गुस्साए किसानों ने एसयूवी का पीछा किया और कथित तौर पर चालक और दो भाजपा कार्यकर्ताओं की पीट-पीटकर हत्या कर दी.
इस घटना ने सत्तारूढ़ भाजपा के खिलाफ आक्रोश की लहर फैला दी और सरकार पर गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा को बचाने का आरोप लगाया गया. घटना से पहले केंद्रीय मंत्री का एक भाषण, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर "किसानों को दो मिनट में ठीक करने" की धमकी दी थी, अगर उन्होंने आंदोलन बंद नहीं किया. तो हत्याओं के बाद कई लोगों ने उनके इस्तीफे की मांग की.
सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद आशीष मिश्रा को किसानों की मौत के कुछ दिनों बाद गिरफ्तार कर लिया गया था. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस जांच पर सवाल उठाते हुए उन्हें फरवरी में जमानत दे दी थी.
सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल 18 अप्रैल को आशीष मिश्रा को मिली जमानत रद्द करते हुए उन्हें एक हफ्ते के अंदर सरेंडर करने को कहा था. अदालत ने देखा कि पीड़ितों को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में "निष्पक्ष और प्रभावी सुनवाई" से वंचित कर दिया गया था, और कहा कि उच्च न्यायालय ने "सबूतों का अदूरदर्शी दृष्टिकोण" लिया.
लखीमपुर अदालत के समक्ष दायर डिस्चार्ज याचिका में, आशीष मिश्रा और अन्य अभियुक्तों ने तर्क दिया था कि उन पर गलत आरोप लगाए गए हैं. कोर्ट ने सभी आरोपियों की याचिका खारिज कर दी.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं