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This Article is From May 02, 2023

सेहत, शिक्षा और संख्या में बढ़ोतरी के साथ 16 साल की "लाडली लक्ष्मी हुई लखपति"

अप्रैल 2007 में मध्यप्रदेश में लाडली लक्ष्मी योजना की शुरुआत हुई थी. सरकार का दावा है कि इसके परिणाम से मध्यप्रदेश में 1000 बेटियों पर जन्मदर 911 से बढ़कर 956 हो गई है.

सेहत, शिक्षा और संख्या में बढ़ोतरी के साथ 16 साल की "लाडली लक्ष्मी हुई लखपति"
योजना के तहत 21 साल की होने पर लड़कियों को 1,43,000 की राशि मिलती है
भोपाल:

मध्यप्रदेश में 2007 में लाडली लक्ष्मी योजना शुरू हुई, अब लाडली 16 साल की हो गई है. 16 सालों के सफर में कई बेटियां लखपति पैदा हुईं. दरअसल, राज्य में बेटियों के प्रति जनता में सकारात्मक सोच, लिंगानुपात में सुधार, बालिकाओं के शैक्षणिक स्तर तथा स्वास्थ्य की स्थिति में सुधार और उनके अच्छे भविष्य की आधारशिला रखने के उद्देश्य से अप्रैल 2007 में मध्यप्रदेश में लाडली लक्ष्मी योजना की शुरुआत हुई थी. इन 16 सालों में इस योजना में कई पड़ाव जुड़ते गये, आज लाड़ली ई-संवाद एप के जरिये वो मुख्यमंत्री से बात कर सकती हैं उनतक अपने विचार,सुझाव, समस्या पहुंचा सकती हैं. किसी भी बेटी को लाड़ली लक्ष्मी योजना से वंचित न रख सके, इसके लिये लाडली लक्ष्मी कानून बनाया गया है.

अब तक 44 लाख 85 हजार से ज्यादा बेटियों को मिला लाभ
आज की तारीख में 44,85,000 से ज्यादा बेटियां इसमें हितग्राही हैं, जिन्हें 21 साल की होने पर 1,43,000 की राशि मिलती है. अभी तक 366.21 करोड़ की रकम दी जा चुकी है. जैसे ही बेटी के जन्म का ऑन लाइन पंजीयन होता है, उसे 1,43,000/- का प्रमाण पत्र मिलता है, 6वी में प्रवेश पर 2000/- कक्षा 9वीं में प्रवेश पर 4000/- कक्षा 11वीं में प्रवेश पर 6000/- कक्षा 12वीं में प्रवेश पर 6000/- की छात्रवृति दी जाती है.

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लाडली बेटियों को 12वीं के बाद स्नातक या दूसरे व्यावसायिक पाठ्यक्रम में (पाठयक्रम अवधि न्यूनतम दो वर्ष) प्रवेश लेने पर राशि रू- 25000/- की प्रोत्साहन राशि दो समान किश्तों में पाठ्यक्रम अवधि के पहले और अंतिम वर्ष में दिए जाते हैं. 100,000/- का भुगतान 21 वर्ष की आयु पूरी होने पर दी जाती है, बशर्ते हितग्राही बालिका कक्षा 12वीं की परीक्षा में सम्मिलित हो चुकी हो और यदि वह विवाहित है, तो उसका विवाह, बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 में उल्लेखित न्यूनतम विहित आयु पूर्ण करने के बाद हुआ हो.

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लाडली ने मध्‍यप्रदेश में बढ़ाई बेटियों की जन्‍मदर
सरकार का दावा है कि इसके परिणाम से मध्यप्रदेश में 1000 बेटियों पर जन्मदर 911 से बढ़कर 956 हो गई है. लिंगानुपात 948 से बढ़कर 970 हो गया है, प्राथमिक स्तर पर ड्रॉप आउट रेट 19.26 से कम होकर 6.63, माध्यमिक स्तर पर ड्रॉप आउट रेट 18.41 से घटकर 1.26, बाल विवाह 57 प्रतिशत से 23 प्रतिशत पहुंच गया 
साक्षरता 44 से बढ़कर 65 प्रतिशत हो गया है.

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