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चमत्कार! 912 दिन बाद बंद हुआ 10 साल की बच्ची का मुंह, कोलकाता के डॉक्टर्स ने किया करिश्मा

अस्पताल के एक वरिष्ठ चिकित्सक ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि लड़की एक दुर्लभ स्वप्रतिरक्षित तंत्रिका संबंधी विकार, एक्यूट डिससेमिनेटेड एन्सेफेलोमायलाइटिस (एडीईएम) से पीड़ित थी, जिसमें प्रतिरक्षा प्रणाली मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी पर हमला करती है.

चमत्कार! 912 दिन बाद बंद हुआ 10 साल की बच्ची का मुंह, कोलकाता के डॉक्टर्स ने किया करिश्मा
कोलकाता के अस्पताल में बच्ची का सफल इलाज. (संकेतात्मक फोटो)
  • कोलकाता के सरकारी दंत अस्पताल के चिकित्सकों ने एक लड़की का खुला मुंह बंद करने में सफलता हासिल की
  • लड़की को एक दुर्लभ स्वप्रतिरक्षित तंत्रिका विकार एडीईएम था, जिससे मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी प्रभावित हुई थी
  • उपचार से पहले कई अस्पतालों में इलाज के बाद भी लड़की की हालत में सुधार नहीं हुआ था

कोलकाता में सरकारी दंत अस्पताल के चिकित्सकों ने एक करिश्मा कर दिखाया है. एक लड़की जो 900 दिनों से ज्यादा समय से अपना मुंह बंद ही नहीं कर पा रही थी, उसकी परेशानी अब दूर हो गई है. उसका मुंह अब बंद हो सकता है. दंत अस्पताल के डॉक्टर्स उसका इलाज करने में सफल रहे हैं. यह लड़की एक दुर्लभ स्वप्रतिरक्षित तंत्रिका संबंधी विकार से पीड़ित थी. ये जानकारी अस्पताल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने गुरुवार को दी.

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912 दिन बाद बंद हुआ बच्ची का मुंह

अधिकारी ने बताया कि करीब 10 साल की यह लड़की एक ऐसी स्थिति से पीड़ित थी जिसमें उसके जबड़े और चेहरे की मांसपेशियों को नियंत्रित करने वाली नसों को नुकसान पहुंचा. इस वजह से वह लगभग 912 दिन से अपना मुंह बंद नहीं कर पा रही थी. उन्होंने बताया कि राज्य में और इसके बाहर कई अस्पतालों में उपचार के बावजूद उसकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ. इसके बाद लड़की को आर अहमद डेंटल कॉलेज एवं अस्पताल में लाया गया, जहां उपचार के बाद आखिरकार वह अपना मुंह बंद कर पाने में सक्षम हो गई है.

दुर्लभ बीमारी से जूझ रही थी बच्ची

अस्पताल के एक वरिष्ठ चिकित्सक ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया, '' वह एक दुर्लभ स्वप्रतिरक्षित तंत्रिका संबंधी विकार, एक्यूट डिससेमिनेटेड एन्सेफेलोमायलाइटिस (एडीईएम) से पीड़ित थी, जिसमें प्रतिरक्षा प्रणाली मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी पर हमला करती है.' उन्होंने कहा कि लंबे समय तक मुंह बंद न कर पाने की स्थिति से कई जटिलताएं उत्पन्न हुईं, जिनमें जबड़े का संतुलन बिगड़ना और दांतों का असामान्य रूप से ऊपर की ओर खिसकना (जिसे सुप्रा-एरप्शन कहा जाता है) शामिल हैं.

बच्ची का सफल इलाज, बीमारी हुई दूर

अस्पताल में उपचार की योजना बनाने के लिए एक विशेष चिकित्सीय समिति का गठन किया गया. विस्तृत मूल्यांकन के बाद चिकित्सकों ने निष्कर्ष निकाला कि मुंह बंद करना चिकित्सकीय रूप से अत्यावश्यक है. उपचार में शामिल एक चिकित्सक ने कहा, ''इस मामले में जबड़े को बंद करने और आगे की जटिलताओं को रोकने के लिए पिछले दांतों को निकालना ही एकमात्र व्यावहारिक विकल्प था.'' उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया के बाद अब लड़की अपना मुंह बंद करने में सक्षम है.
 

इनपुट- भाषा
 

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