संसद भवन के अंदर टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद के कथित तौर पर ई-सिगरेट (वेपिंग) पीने के मामले ने तूल पकड़ लिया है. इस मामले में बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर की स्पीकर की शिकायत मिलने के बाद अब लोकसभा के भीतर फुटेज की फोरेंसिक जांच की जा रही है. इसकी रिपोर्ट आने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई के बारे में निर्णय होगा.
लोकसभा सचिवालय के सूत्रों के अनुसार शीतकालीन सत्र के दौरान 11 दिसंबर 2025 की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है. इसकी रिपोर्ट आने में अभी कुछ दिन लगेंगे. फुटेज की जांच की जा रही है. बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर एक अलग फुटेज जारी किया था जिसमें कीर्ति आजाद अपने दोनों हाथों को मुंह के पास लेकर जाते हैं. मालवीय का दावा है कि वे वेपिंग कर रहे थे. हालांकि वीडियो में ई-सिगरेट स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रही. इसीलिए फुटेज की फोरेंसिक जांच की जा रही है ताकि यह स्थापित हो सके कि वे वाकई सदन के भीतर ई-सिगरेट पी रहे थे या नहीं.
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अमित मालवीय ने कीर्ति आजाद को घेरा
सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर अमित मालवीय ने कहा, 'भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर द्वारा संसद के अंदर ई-सिगरेट पीने का आरोप टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद पर लगाए गए हैं. उनके जैसे लोगों के लिए नियम और कानून का कोई महत्व नहीं है. सोचिए, सदन में हाथ में ई-सिगरेट छिपाकर रखना कितनी गुस्ताखी है! धूम्रपान भले ही गैरकानूनी न हो, लेकिन संसद में इसका इस्तेमाल करना सरासर अस्वीकार्य है. ममता बनर्जी को अपने सांसद के इस दुर्व्यवहार पर स्पष्टीकरण देना चाहिए.'
भारत में पूरी तरह बैन है ई-सिगरेट
सूत्रों के अनुसार अगर यह स्थापित होता है तो यह बेहद गंभीर मामला होगा. भारत में इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट निषेध अधिनियम 2019 के तहत ई‑सिगरेट का उत्पादन, बिक्री, भंडारण और विज्ञापन पूरी तरह प्रतिबंधित है. पहली बार उल्लंघन पर एक वर्ष की सजा और जुर्माने का प्रावधान है, जबकि दोहराव पर सजा और जुर्माना बढ़ सकता है. यह संसदीय आचरण के भी प्रतिकूल है. लोकसभा अध्यक्ष इस मामले को या तो आचार समिति को भेज सकते हैं या फिर स्वयं ही इस पर निर्णय कर सकते हैं. आरोप साबित होने पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है जिसमें निलंबन से लेकर सदस्यता जाना तक शामिल है.
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तृणमूल ने बनाई दूरी
कीर्ति आजाद के ई-सिगरेट मामले पर तृणमूल कांग्रेस ने दूरी बनाई है. अमूमन टीएमसी ऐसे मामलों में अपने सांसदों का बचाव करती है जैसा कि महुआ मोइत्रा के मामले में हुआ था. लेकिन कीर्ति आजाद के मामले में पार्टी का रुख ठंडा है. वहीं कीर्ति आजाद ने कहा था कि वह सांसदों के नाम बता सकते हैं, जो परिसर में ध्रूमपान करते हैं लेकिन वे इस स्तर तक गिरना नहीं चाहते.
सिगरेट के मुद्दे पर सियासी बवाल
विवाद के बाद मीडिया से बातचीत में कीर्ति आजाद और बीजेपी नेताओं के बीच तीखी बयानबाज़ी भी हुई, जिससे मामला केवल संसदीय मर्यादा से आगे बढ़कर राजनीतिक हमले‑जवाब तक पहुंच गया. संसद परिसर में पहले भी धूम्रपान और स्मोकिंग रूम को लेकर विवाद हो चुके हैं, जिससे यह मुद्दा प्रतीकात्मक रूप से सदन की गरिमा और सार्वजनिक संदेश से जुड़ जाता है.
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