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ब्रेकफास्ट टेबल पर डीके और सिद्धारमैया में क्या बात हुई, दो टूक बात और एक ऑफ़र…

कांग्रेस आलाकमान ने दोनों नेताओं को सामंजस्य और संयम की नसीहत दी है. देखना यही है कि राहुल गांधी एक बड़ा फ़ैसला लेने की सियासी इच्छाशक्ति कब तक दिखा पाते हैं?

ब्रेकफास्ट टेबल पर डीके और सिद्धारमैया में क्या बात हुई, दो टूक बात और एक ऑफ़र…
  • कांग्रेस आलाकमान ने सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार को एक साथ बैठने का निर्देश दिया
  • सिद्धारमैया ने डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री पद छोड़ने से साफ इंकार किया
  • डीके शिवकुमार ने मई 2023 के ढाई-ढाई साल के फार्मूले की याद दिलाई लेकिन सिद्धारमैया ने उसे स्वीकार नहीं किया
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कर्नाटक में सीएम की कुर्सी को लेकर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार में जारी खींचतान को कम करने के लिए कांग्रेस आलाकमान ने दोनों नेताओं को एक साथ बैठने का निर्देश दिया. शनिवार सुबह सीएम के आवास पर उपमुख्यमंत्री नाश्ता करने पहुंचे और इसके बाद मीडिया के सामने एकजुटता दिखाने की कोशिश की.

क्या बात बन गई

लेकिन बड़ा सवाल बना हुआ है कि क्या दोनों में बात बन गई? इसके लिए यह जानना जरूरी है कि सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच ब्रेकफास्ट टेबल पर क्या बात हुई? हालांकि, वहां कोई और मौजूद नहीं था, लेकिन बातचीत की जानकारी रखने वाले डीके के एक करीबी सूत्र ने बताया कि सिद्धारमैया ने कुर्सी छोड़ने से इनकार कर दिया है.

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Photo Credit: PTI

जानकारी के मुताबिक, शुरुआती औपचारिकता के बाद सीधे मुद्दे पर आते हुए डीके शिवकुमार ने मई 2023 में तय किए गए ढाई–ढाई साल के फार्मूले की चर्चा छेड़ी. इस पर सिद्धारमैया ने कहा कि उन्हें ऐसे किसी फार्मूले या वादे की याद नहीं!

सिद्धारमैया ने क्या कहा

सूत्र के अनुसार, सिद्धारमैया ने साफ़ कहा कि वो पूरी तरह फिट हैं और अभी सरकार का नेतृत्व जारी रखना चाहते हैं. उन्होंने डीके शिवकुमार को ऑफ़र दिया कि अगर वो राजी हों तो उन्हें 2028 विधानसभा चुनाव का चेहरा बनाने का एलान किया जा सकता है.

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हालांकि, डीके शिवकुमार ने अपनी तरफ़ से सिद्धारमैया को “वादे” की याद दिलाने की कोशिश की, लेकिन अंत में दोनों इस बात पर सहमत हुए कि राहुल गांधी का निर्णय दोनों को मंज़ूर होगा.

अब आगे क्या होगा

जानकार सूत्र का मानना है कि फ़िलहाल ये विवाद टल गया है. कांग्रेस आलाकमान सिद्धारमैया को विश्वास में लिए बिना और जल्दबाजी में कोई फ़ैसला नहीं करने वाला. एक दिसंबर से संसद और आठ दिसंबर से कर्नाटक विधानसभा का सत्र शुरू हो रहा है. ऐसे में इस मुद्दे पर कोई हलचल अब बीस दिसंबर के बाद ही हो सकती है. कांग्रेस आलाकमान ने दोनों नेताओं को सामंजस्य और संयम की नसीहत दी है. देखना यही है कि राहुल गांधी एक बड़ा फ़ैसला लेने की सियासी इच्छाशक्ति कब तक दिखा पाते हैं?

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