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शिमला में धू-धूकर कर जला जुन्गा महल, सदियों पुरानी नक्काशी और विरासत हुई राख

आग लगने के सटीक कारण और इस घटना में हुए कुल नुकसान का अभी पता लगाया जा रहा है. जानकारी के मुताबिक, इस महल का निर्माण 1800 के दशक में तत्कालीन क्योंथल रियासत के शासकों ने करवाया था.

शिमला में धू-धूकर कर जला जुन्गा महल, सदियों पुरानी नक्काशी और विरासत हुई राख
  • शिमला के पास जुन्गा में स्थित 200 साल पुराना ऐतिहासिक महल भीषण आग से पूरी तरह नष्ट हो गया.
  • आग दोपहर करीब एक बजे लगी और कुछ ही समय में महल पूरी तरह आग की चपेट में आ गया.
  • इस महल का निर्माण 1800 के दशक में तत्कालीन क्योंथल रियासत के शासकों ने करवाया था.
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शिमला से लगभग 26 किलोमीटर दूर जुन्गा में स्थित 200 साल पुराना एक ऐतिहासिक महल बुधवार को भीषण आग की चपेट में आने से नष्ट हो गया. हालांकि, इस घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है. दोपहर करीब 1:00 बजे जे भड़की इस भीषण आग ने कुछ ही समय में पूरे महल को अपनी चपेट में ले लिया.

आग लगने के सटीक कारण और इस घटना में हुए कुल नुकसान का अभी पता लगाया जा रहा है. जानकारी के मुताबिक, इस महल का निर्माण 1800 के दशक में तत्कालीन क्योंथल रियासत के शासकों ने करवाया था.

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हरी-भरी पहाड़ियों और शांत वादियों के बीच बसा जुन्गा अपनी ऐतिहासिक और स्थापत्य विरासत के लिए प्रसिद्ध है. यहां का प्राचीन महल पहाड़ी वास्तुकला का एक अद्भुत नमूना है, जिसकी पहचान लकड़ी की बारीक नक्काशी और पारंपरिक निर्माण शैली रही है. हालांकि, लंबे समय तक उचित संरक्षण और देखरेख के अभाव में यह ऐतिहासिक धरोहर धीरे-धीरे जर्जर होती चली गई और अब उपयोग से बाहर हो चुकी है.

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इसी पुराने महल के समीप 'चौरनी पैलेस' नामक नया महल स्थित है, जो वर्तमान में शाही परिवार के निवास और उनकी गतिविधियों का केंद्र माना जाता है.जुन्गा, हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला से मात्र 26 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक शांत और ऐतिहासिक कस्बा है. यह स्थान पूर्व में प्रसिद्ध क्यौंथल रियासत की राजधानी हुआ करता था. इसका नाम यहां के स्थानीय देवता 'जून का' के नाम पर पड़ा है, जो आज भी यहां की संस्कृति और आस्था का केंद्र हैं.

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यह महल पत्थर, लकड़ी और मिट्टी के मेल से बना है. इसकी छतों पर स्लेट (पत्थर की टाइलें) का प्रयोग किया गया है, जो पहाड़ी वास्तुकला की पहचान है. महल की लकड़ी के दरवाजों और खंभों पर की गई बारीक नक्काशी उस दौर के कलाकारों के हुनर का प्रमाण है, जब मशीनें नहीं हुआ करती थीं.

यहां एक ही पेड़ के तने को काटकर बनाई गई सीढ़ियां देखने को मिलती हैं, जिसे पहाड़ी भाषा में 'लिस्का' जैसा कुछ कहा जा सकता है. यह प्राचीन इंजीनियरिंग का एक शानदार उदाहरण है. वर्तमान में यह महल एक जीवित संग्रहालय जैसा प्रतीत होता है, जहां पुराने कैलेंडर, मूर्तियां और पुरानी वस्तुएं आज भी उस दौर की याद दिलाती हैं.

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