केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के जल बंटवारे को लेकर एक ऐतिहासिक समझौता कराया है. 26 साल से चला आ रहा गतिरोध अब खत्म हो गया है.
नई दिल्ली में सोमवार को गृहमंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटील की मौजूदगी में बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस ऐतिहासिक करार पर हस्ताक्षर किए.
इस समझौते के तहत सोन नदी का 5.75 एमएएफ पानी बिहार को मिलेगा, वहीं 2 एमएएफ झारखंड को दिया जाएगा. जानकारी के लिए बता दें कि साल 2000 में बिहार के बंटवारे के बाद झारखंड राज्य का गठन हुआ था. लेकिन सोन नदी के पानी के बंटवारे को लेकर दोनों ही राज्यों के बीच तनातनी चलती रही. झारखंड चाहता था कि 1973 के पुराने समझौते के तहत उसे पानी की बड़ी हिस्सेदारी मिले.
लेकिन अब बिहार और झारखंड की मौजूदगी में एक नया फॉर्मूला तय हो चुका है. बताया जा रहा है कि समझौते के बाद बिहार के भोजपुर, बक्सर, कैमूर और औरंगाबाद क्षेत्र को फायदा मिलने वाला है. इन क्षेत्रों में सिंचाई और दूसरी जरूरतों के लिए पर्याप्त जल तो मिलेगा ही, इसके साथ दूसरी सुविधाएं भी मिल पाएंगी.
झारखंड के भी पलामू, गढ़वा सहित अन्य क्षेत्रों को पानी की समस्या नहीं होगी. दरअसल, 1973 के समझौते के तहत मध्य प्रदेश को 5.5 एमएएफ और उत्तर प्रदेश को 1.75 एमएएफ पानी दिया गया था. लेकिन जब साल 2000 में बिहार से अलग होकर झारखंड बना तो यही समझौता विवाद का विषय बन गया.
अब क्योंकि बिहार और झारखंड के बीच यह समझौता हो चुका है, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी खुशी जाहिर की है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह का तहे दिल से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी वजह से वर्षों से लंबित मामले का समाधान निकल गया है.
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