- झारखंड के चतरा जिले में रांची से दिल्ली जा रही एयर एंबुलेंस का विमान खराब मौसम में क्रैश हो गया
- हादसे में विमान के दो पायलट, एक मरीज, डॉक्टर, पैरामेडिक और दो परिजन सहित सात लोगों की मौत हुई थी
- प्रारंभिक जांच में पाया गया कि थंडरस्टॉर्म के कारण विमान ने नियंत्रण खो दिया और रडार से संपर्क टूट गया था
झारखंड के चतरा जिले के सिमरिया क्षेत्र में रांची से दिल्ली जा रही एक एयर एंबुलेंस के क्रैश ने पूरे देश को झकझोर दिया है. यह हादसा 23 फरवरी 2026 की शाम हुआ, जब Redbird Airways की Beechcraft C90 एयर एंबुलेंस मौसम खराब होने के कारण रूट बदलने की कोशिश कर रही थी. लेकिन थोड़ी देर बाद विमान रडार से गायब हो गया और कुछ ही समय बाद उसका मलबा घने जंगलों में मिला. हादसे में सातों लोग जिनमें दो पायलट, मरीज, डॉक्टर, पैरामेडिक और दो परिजन शामिल थे उनकी मौत हो गयी.
जांच के शुरुआती निष्कर्ष बताते हैं कि क्षेत्र में आए थंडरस्टॉर्म के कारण विमान ने नियंत्रण खो दिया. DGCA के अनुसार, विमान ने मौसम खराब होने पर ATC से रूट बदलने की अनुमति मांगी थी, लेकिन फिर संपर्क टूट गया. बचाव दल मौके पर पहुंचा लेकिन हादसे में किसी को बचाया नहीं जा सका.

एयर एंबुलेंस होती क्या है?
एयर एंबुलेंस एक विशेष विमान होता है जिसे मरीजों को एक शहर से दूसरे शहर तेजी से ले जाने के लिए तैयार किया जाता है. इन विमानों में मेडिकल उपकरण, डॉक्टर, पैरामेडिक और आवश्यक लाइफ सपोर्ट सिस्टम मौजूद रहते हैं. यह सेवा सामान्य एंबुलेंस की तुलना में बहुत तेज होती है और गंभीर मरीजों के लिए जीवन बचाने का सबसे तेज विकल्प मानी जाती है.
भारत में कब‑कब हुए एयर एंबुलेंस हादसे?
भारत में एयर एंबुलेंस हादसे कम होते हैं, लेकिन जब भी होते हैं, बेहद गंभीर होते हैं. पिछले 20 वर्षों में दर्ज प्रमुख हादसे.
23 फरवरी 2026 - चतरा, झारखंड
Beechcraft C90 एयर एंबुलेंस
7 लोगों की मौत हुई
10 जनवरी 2026- राउरकेला, ओडिशा
Cessna 208 (IndiaOne Air) - मेडिकल उपयोग वाले विमान की फोर्स्ड लैंडिंग, 1 व्यक्ति की मौत
25 मई 2011 -फरीदाबाद, हरियाणा
पटना से दिल्ली आ रही मेडिकल इमरजेंसी फ्लाइट विमान आवासीय कॉलोनी पर गिरा था. जिसमें 10 लोगों की मौत हुई थी.
क्यों हो रहे हैं एयर एंबुलेंस हादसे?
भारतीय विमानन विशेषज्ञों के अनुसार, एयर एंबुलेंस हादसों के पीछे कुछ सामान्य कारण सामने आते हैं.
खराब मौसम: चतरा हादसा इसका ताज़ा उदाहरण है, जहां थंडरस्टॉर्म ने भूमिका निभाई. छोटे विमान और एयर एंबुलेंस खराब मौसम में ज्यादा संवेदनशील होते हैं.
सीमित रडार कवरेज: दूरदराज़ क्षेत्रों में रडार कवरेज कमजोर रहती है. चतरा जैसी पहाड़ी/जंगल क्षेत्रों में यह दिक्कत और बढ़ जाती है.
कम ऊंचाई पर उड़ान और मेडिकल इमरजेंसी की जल्दबाज़ी: एयर एंबुलेंस कई बार जल्दी से जल्दी पहुंचने की कोशिश में कम ऊंचाई वाले रूट का इस्तेमाल करती हैं, जोखिम बढ़ता है.
हेलीकॉप्टर मेडिकल मिशन का अधिक उपयोग: भारत में पहाड़ी राज्यों उत्तराखंड , हिमाचल में हेलीकॉप्टर मेडिकल मिशन आम हैं. AAIB के रिकॉर्ड बताते हैं कि 2024–2025 में कई मेडिकल/राहत उड़ानें दुर्घटनाग्रस्त हुईं.
कैसे बदलाव की जरूरत है?
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को एयर एंबुलेंस के लिए:
- बेहतर मौसम मॉनिटरिंग
- उन्नत रडार नेटवर्क
- छोटे विमानों के लिए विशेष सुरक्षा प्रोटोकॉल
- और मेडिकल एविएशन के लिए अलग DGCA गाइडलाइन की जरूरत है.
एयर एंबुलेंस सेवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है, लेकिन इसके साथ सुरक्षा मानकों को और कठोर करना समय की मांग है.
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