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This Article is From Sep 29, 2025

जम्मू के सुरनकोट में एक्सीडेंटल ग्रेनेड ब्लास्ट, एक जवान शहीद

पुलिस ने कहा कि सभी पहलुओं पर विचार किया जा रहा है और गोला-बारूद के आकस्मिक संचालन या तकनीकी खराबी की भी जांच की जा रही है.

जम्मू के सुरनकोट में एक्सीडेंटल ग्रेनेड ब्लास्ट, एक जवान शहीद
  • जम्मू के सुरनकोट में एक हथगोले के फटने से एक जवान शहीद
  • विस्फोट शाम लगभग साढ़े सात बजे हुआ और इस मामले की जांच जारी
  • विस्फोट कैसे हुआ, यह स्पष्ट नहीं है, पुलिस और फोरेंसिक टीम जांच कर रही है
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जम्मू:

जम्मू के सुरनकोट में एक्सीडेंटल ग्रेनेड ब्लास्ट होने की खबर आ रही है, जिसमें एक जवान शहीद हो गया. जानकारी के मुताबिक पुंछ जिले में सोमवार शाम दुर्घटनावश एक हथगोले के फटने से एक जवान की मौत हो गई. अधिकारियों ने यह जानकारी दी. अधिकारियों ने बताया कि सुरनकोट क्षेत्र में एक शिविर में एक चौकी पर संतरी ड्यूटी पर तैनात जवान की कथित गलती के कारण शाम लगभग 7.45 बजे हथगोला फटा था.

विस्फोट का पता लगाने की कोशिश जारी

एक अधिकारी ने कहा, "विस्फोट आज शाम करीब 7.45 बजे हुआ और इसमें एक जवान शहीद हो गया. अभी यह स्पष्ट नहीं है कि विस्फोट आतंकवादियों द्वारा फेंके गए ग्रेनेड के कारण हुआ या यह दुर्घटनावश हुआ." उन्होंने कहा कि विस्फोट के सही कारणों का पता लगाने के लिए जांच जारी है. उन्होंने कहा, "विस्फोट के तुरंत बाद, इलाके की घेराबंदी कर दी गई और पुलिस तथा फोरेंसिक टीमें सबूतों की जांच के लिए मौके पर पहुंच गईं."

पुलिस ने क्या कुछ बताया

पुलिस ने कहा कि सभी पहलुओं पर विचार किया जा रहा है और गोला-बारूद के आकस्मिक संचालन या तकनीकी खराबी की भी जांच की जा रही है. राष्ट्रीय राइफल्स जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद-रोधी तंत्र का एक महत्वपूर्ण घटक है जो स्थानीय पुलिस और सीआरपीएफ के साथ मिलकर आंतरिक इलाकों में आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए काम करता है. सेना 740 किलोमीटर लंबी नियंत्रण रेखा (एलओसी) की रक्षा करती है, जबकि सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) जम्मू संभाग के जम्मू जिले, सांबा जिले और कठुआ जिले में स्थित 240 किलोमीटर लंबी अंतर्राष्ट्रीय सीमा (आईबी) की रक्षा करता है.

एलओसी घाटी के बारामूला, कुपवाड़ा और बांदीपोरा जिलों, पुंछ और राजौरी जिलों और आंशिक रूप से जम्मू जिले में स्थित है. एलओसी पर सेना और अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर बीएसएफ का काम आतंकवादियों की घुसपैठ, भारतीय सीमा में हथियारों और गोला-बारूद की आवाजाही को रोकना और पाकिस्तान के समर्थन से आतंकवादी संगठनों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले ड्रोन के खतरे को रोकना है. इनका इस्तेमाल हथियार/गोला-बारूद, नकदी और ड्रग्स गिराने के लिए आतंकवादियों द्वारा जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को जारी रखने के लिए किया जाता है.

(भाषा इनपुट्स के साथ)

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