भारत लगातार रक्षा क्षेत्र में मजबूत होता जा रहा है. हमारी एयरफोर्स पहले ही दुनिया की तीसरी सबसे ताकतवर वायुसेना बन गई है. भारतीय नेवी भी लगातार नए-नए इतिहास रच रही है. भारतीय नौसेना की ताकत में एक और नया अध्याय जुड़ चुका है. हम बात कर रहे हैं 'INS महेंद्रगिरी' की. यह स्वदेशी युद्धपोत प्रोजेक्ट 17A नीलगिरी क्लास के तहत बना है. 11 जुलाई 2026 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विशाखापत्तनम में स्वदेशी युद्धपोत 'INS महेंद्रगिरी' को लॉन्च (कमीशन) किया. एडवांस हथियारों और रडार को चकमा देने वाली स्टील्थ तकनीक से लैस यह फ्रिगेट हिंद महासागर में चीन और पाकिस्तान की हर चाल को नाकाम करने की क्षमता रखता है. आइए समझते हैं कि यह युद्धपोत भारतीय नौसेना के लिए गेम-चेंजर क्यों है.
स्टील्थ टेक्नोलॉजी: दुश्मन के रडारों को देगा चकमा
INS महेंद्रगिरी बेहद एडवांस 'स्टील्थ फ्रिगेट' है. यही टेक्नोलॉजी इसकी सबसे बड़ी खासियत है. स्टील्थ टेक्नोलॉजी दुश्मन के रडार सिग्नेचर को बेहद कम कर देती है. दुश्मन के रडार, थर्मल कैमरे और सोनार भी इसे ट्रैक नहीं कर पाते. यानी दुश्मन के रडार इसे पकड़ नहीं पाते. INS महेंद्रगिरी समुद्र में खुद को छुपाकर दुश्मन के बेहद करीब पहुंच सकता है और जरूरत पड़ने पर अचूक हमला भी कर सकता है.

क्या हैं INS महेंद्रगिरी की खासियत?
- इस युद्धपोत के बाहरी ढांचे को खास कोणीय (Faceted Shape) डिजाइनों में ढाला गया है और इसमें रडार तरंगों को सोखने वाले खास रडार एब्जॉर्बिंग कोटिंग का इस्तेमाल किया गया है. इस डिजाइन की वजह से दुश्मन की रडार पर यह बड़ा युद्धपोत बहुत छोटी सी नाव की तरह दिखाई देता है.
- युद्धपोत के इंजन और बिजली पैदा करने वाले सिस्टम से निकलने वाली गर्मी को कम करने के लिए 'वेंचुरी इफेक्ट' और फ्लुइड इंजेक्शन का इस्तेमाल किया जाता है. यह खास तरह के तरल पदार्थ का छिड़काव होता है. इससे दुश्मन की थर्मल-हीट सीकिंग मिसाइलें आसानी से निशाना नहीं बना पाती.
- महेंद्रगिरी में समंदर में बिना आवाज चलने की काबिलियत है. इसके प्रोपेलर्स को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वे तेज रफ्तार में भी बेहद कम शोर करते हैं.
- इस युद्धपोत पर अगली पीढ़ी का 'यूनिकॉर्न' (NORA-50) एंटीना मस्ट लगाया जाएगा. यह खास एंटीना जहाज छिपकर काम करता है और इससे युद्धपोत की स्टील्थ क्षमता और ज्यादा पुख्ता हो जाती है.
- इस वॉरशिप में एडवांस इंजन सिस्टम कंबाइंड डीजल और गैस (CODOG) प्रोपल्शन का इस्तेमाल किया गया है. यह इसे तेज स्पीड और लंबी दूरी के समुद्री मिशनों के लिए खास बनाती है.

भारत के लिए कैसे है गेम चेंजर?
INS महेंद्रगिरी एक ब्लू-वाटर वॉरशिप है. यह युद्धपोत गहरे और समुद्र के दूर-दराज इलाकों में हफ्तों तक तैनात रह सकता है. महेंद्रगिरी एक साथ तीन मोर्चों पर वार कर सकता है. यानी यह हवा, पानी की सतह और पानी के अंदर यानी पनडुब्बी, तीनों जगह एक साथ दुश्मनों से निपटने की ताकत रखता है.
इस युद्धपोत पर दुनिया की सबसे तेज और घातक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस लगाई जाएगी. यह मिसाइल सतह से सतह पर मार कर सकती है. इसके अलावा यह एडवांस रडार और डिफेंस सिस्टम से लैस होगा. इसमें लंबी दूरी की सरफेस टू एयर मिसाइलें, टॉरपीडो लॉन्चर, स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर, मल्टी-फंक्शन रडार (MF-STAR) और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट मौजूद हैं.
INS महेंद्रगिरी का वजन करीब 6670 टन है और यह 28 नॉट स्पीड से रफ्तार भर सकता है. इस युद्धपोत को ऊर्जा और बिजली सप्लाई रोल्स-रॉयस के चार एडवांस जेनरेटर सेट से मिलेगी.
भारत के लिए क्यों खास है यह युद्धपोत?
INS महेंद्रगिरी एक स्वदेशी युद्धपोत है. इसमें 75 फीसदी से ज्यादा सामान और सिस्टम स्वदेशी ही है. यानी यह वॉरशिप 'आत्मनिर्भर भारत' का जीता-जागता सबूत है. इस युद्धपोत का निर्माण मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) मुंबई द्वारा किया गया है और इसके पार्ट्स बनाने में देश के MSME का बड़ा योगदान है.

नाम के पीछे की कहानी?
इसका नाम ओडिशा के पूर्वी घाट पर स्थित 'महेंद्रगिरी पर्वत' के नाम पर रखा गया है, जो दृढ़ता और संकल्प का प्रतीक है. इसके प्रतीक चिन्ह पर एक 'गोशाक' पक्षी है जो साहस और सटीकता को दर्शाता है. इसका आदर्श वाक्य 'स्थित प्रज्ञा रेणुष' है, जिसका अर्थ है युद्ध में जोश के साथ-साथ होश बनाए रखना.
भारत के लिए क्यों जरूरी?
दुनियाभर में बदलते समुद्री युद्ध के परिदृश्य को देखते हुए स्टील्थ फ्रिगेट्स का होना भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद जरूरी है. खासतौर पर तब, जब हमारे दो पड़ोसी चीन और पाकिस्तान समुद्र में अपनी सैन्य गतिविधियां बढ़ा रहे हैं. चूंकि दुश्मन के रडार इस युद्धपोत को आसानी से ट्रैक नहीं कर पाते, ये दुश्मन की सीमा के काफी करीब जाकर चुपके से ब्रह्मोस जैसी सुपरसोनिक मिसाइलों से सटीक हमला कर सकते हैं.
चीन लगातार हिंद महासागर में अपनी दखलंदाजी बढ़ा रहा है. ऐसे में चीन को रणनीतिक रूप से चुनौती देने और समुद्री व्यापार मार्गों को सुरक्षित रखने के लिए यह काफी जरूरी है. यह युद्धपोत बराक-8 मिसाइलों द्वारा हवा में, ब्रह्मोज से समुद्र की सतह पर और टॉरपीडो और रॉकेट लॉन्चर से पानी के नीचे से हमला कर सकता है.

भारत के पास और कौन से जहाजों में यह टेक्नोलॉजी?
- भारत के पास प्रोजेक्ट 17A के अलावा कई अन्य युद्धपोतों में स्टील्थ टेक्नोलॉजी को शामिल किया गया है.
- प्रोजेक्ट 17 (शिवालिक-क्लास फ्रिगेट): INS शिवालिक, INS सतपुड़ा, INS सह्याद्री
- प्रोजेक्ट 15B (विशाखापत्तनम-क्लास स्टील्थ गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर्स): INS विशाखापत्तनम, INS मोरमुगाओ, INS इम्फाल, INS सूरत
- प्रोजेक्ट 15A (कोलकाता-क्लास डिस्ट्रॉयर्स): INS कोलकाता, आईएनएस कोच्चि, आईएनएस चेन्नई
- तलवार-क्लास फ्रिगेट: INS तमाल और INS तुशील
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