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इंडो-यूएस ट्रेड डील: कृषि और डेयरी पर कोई समझौता नहीं, भारत के किसानों को नए अवसर मिलेंगे– कृषि मंत्री

अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी के ट्वीट से पैदा हुए संशय पर, जिसमें अमेरिकी फार्म प्रोडक्ट्स के ज़्यादा भारत आने की बात कही गई थी, कृषि मंत्री ने स्पष्टीकरण देते हुये कहा, छोटे और बड़े, सभी भारतीय किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित हैं और मुख्य कृषि उत्पादों के लिए बाजार इस प्रकार नहीं खोला गया है कि किसानों पर दबाव बने.

इंडो-यूएस ट्रेड डील: कृषि और डेयरी पर कोई समझौता नहीं, भारत के किसानों को नए अवसर मिलेंगे– कृषि मंत्री
नई दिल्ली:

भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर संसद में विपक्ष के हंगामे और आरोपों के बीच कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया है कि स समझौते में भारतीय कृषि, विशेषकर कृषि और डेयरी सेक्टर के हितों से कोई समझौता नहीं किया गया है. दिल्ली में मीडिया से चर्चा के दौरान कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हमारे मुख्य अनाज, फल, प्रमुख फसलें, मिलेट्स और डेयरी उत्पाद पूरी तरह सुरक्षित हैं और भारतीय कृषि या डेयरी पर किसी तरह का खतरा नहीं है. किसानों के हित पूरी तरह संरक्षित हैं और इस समझौते से उल्टा भारत के किसानों को नए अवसर मिलेंगे".

अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी के ट्वीट से पैदा हुए संशय पर, जिसमें अमेरिकी फार्म प्रोडक्ट्स के ज़्यादा भारत आने की बात कही गई थी, कृषि मंत्री ने स्पष्टीकरण देते हुये कहा, छोटे और बड़े, सभी भारतीय किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित हैं और मुख्य कृषि उत्पादों के लिए बाजार इस प्रकार नहीं खोला गया है कि किसानों पर दबाव बने. इससे पहले वाणिज्य मंत्री पियूष गोयल ने बुधवार को संसद में भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर दिए एक अहम बयान में कहा था,

मैं इस बात पर जोर देना चाहता हूं कि यह अमेरिका द्वारा कई प्रतिस्पर्धी देशों पर लगाए गए टैरिफ से कम है, जिससे अमेरिकी बाजार में भारत की निर्यात
प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि होगी . यह समझौता भारतीय निर्यातकों को, विशेष रूप से श्रम-प्रधान क्षेत्रों और विनिर्माण में, महत्वपूर्ण तुलनात्मक लाभ भी प्रदान करता है. मैं इस सम्मानि त सदन के समक्ष यह दोहराना चाहता हूँ कि खाद्य और कृषि क्षेत्र में भारत की प्रमुख संवेदनशीलता का पूर्णतः ध्यान रखा गया है.

कृषि मंत्रालय के मुताबिक, भारत पहले से ही अमेरिका समेत कई देशों को चावल का बड़ा निर्यातक है, और ताज़ा सरकारी आकड़ों के अनुसार लगभग 63,000 करोड़ रुपये के चावल का निर्यात किया गया था. कृषि मंत्री का मानना है कि टैरिफ कम होने से भारत से चावल, मसालों और टेक्सटाइल के निर्यात को बल मिलेगा और जब टेक्सटाइल एक्सपोर्ट बढ़ेगा तो इसका सीधा लाभ कपास उगाने वाले किसानों को होगा. विपक्षी पर भ्रम फ़ैलाने का आरोप लगते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि ये समझौता भारत के किसानों के हित में है, किसानों के हित को सुरक्षित रखा गया है और इससे निर्यात के नए अवसर खुलेंगे.

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