भारत में आर्टिफिशल इंटेलीजेंस (AI) का इस्तेमाल अब स्वास्थ्य क्षेत्र में भी तेजी से हो रहा है. सरकार अब इसका उपयोग बीमारी का पता लगाने के लिए भी कर रही है. दरअसल, केंद्र सरकार ने ऐसी एक व्यवस्था बना रही है जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बड़े डाटा का उपयोग करके बीमारी के बारे में पहले ही संकेत दे देगा. इससे डेंगू, चिकनगुनिया, फ्लू जैसी बीमारियों के बढ़ने की चेतावनी समय रहते मिल सकेगी.
बीमारी बढ़ने से पहले रोकने में मिलेगी मदद
राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) के डायरेक्टर डॉ. रंजन दास ने कहा कि पुरानी व्यवस्था में बीमारी फैलने के बाद कार्रवाई होती थी, लेकिन अब बीमारी शुरू होने से पहले ही संकेत मिल जाएगा. इससे निर्णय लेने में तेजी आएगी और बीमारी बढ़ने से पहले रोकने में मदद मिलेगी. नए मॉडल कि विशेषता यह है कि संकेत मिलते ही ज़मीन पर काम करने वाली टीमें भी सक्रिय तुरंत हो जाती हैं.
भविष्य की महामारी की पहले से रहेगी तैयारी
अधिकारी ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि देश में पब्लिक हेल्थ को लेकर एक ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जो भविष्य की महामारी, जलवायु से जुड़ी बीमारियों और नए संक्रमणों के लिए पहले से तैयार रहे. डॉ. रंजन दास ने कहा कि हम पहले बीमारी फैलने का इंतजार करते थे, लेकिन अब पहले से अंदाजा लगाकर तैयारी करेंगे. भारत की रोग निगरानी अब डाटा-ड्रिवन, स्मार्ट और प्रीडिक्टिव हो रही है.
एनसीडीसी के एडिशनल डायरेक्टर डॉ हिमांशु चौहान ने बताया कि आर्टिफिशल इंटेलीजेंस से अभी एक ऐसा सिस्टम बना है जो इंटरनेट पर प्रतिदिन 13 भाषाओं में लाखों खबरें और पोस्ट पढ़ता है. यह सिस्टम अपने आप पहचान लेता है कि कौन-सी बीमारी कहां बढ़ रही है, किस इलाके में किस तरह का खतरा हो सकता है और किस जानकारी को अधिकारियों तक तुरंत पहुंचाना है. अभी तक यह सिस्टम 30 करोड़ से ज्यादा ऑनलाइन खबरें स्कैन कर चुका है और 95,000 से ज्यादा स्वास्थ्य घटनाओं का पता लगा चुका है. इससे पहले इतनी बड़ी मात्रा में जानकारी को इंसानी टीम के लिए जांचना मुश्किल था. अब एआई ने यह काम लगभग 98% आसान कर दिया है.
क्या होता है प्रीडिक्टिव सर्विलांस?
डॉ. हिमांशु ने कहा कि यह एक ऐसी प्रणाली है जो पुराने और नए डेटा को जोड़कर यह अनुमान लगाती है कि आने वाले वक्त में कब और कहां बीमारी बढ़ सकती है. इसमें लैब रिपोर्ट, अस्पतालों के केस, मौसम, जनसंख्या, माइग्रेशन, पशु-पक्षी संक्रमण सहित सभी का डाटा शामिल होता है. इससे अचानक बढ़ने वाली आउटब्रेक को पहले ही पहचानकर काबू किया जा सकता है.
भारत में बीमारी की निगरानी अभी कैसे होती है?
डॉ. रंजन दास ने कहा कि अभी भारत में बीमारियों की निगरानी के लिए हर हफ्ते जिलों से रिपोर्ट ली जाती है. इसके अलावा अस्पतालों, लैब और निजी डॉक्टरों से भी जानकारी जुटाई जाती है ताकि पता चल सके कि किस इलाके में कौन-सी बीमारी बढ़ रही है. देश में डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, फ्लू, टायफाइड, मंकीपॉक्स, डायरिया और कोरोना जैसी नई वेरिएंट वाली बीमारियों पर लगातार नज़र रखी जाती है. उन्होंने बताया कि दुनिया के कई देशों में पहले से ही आधुनिक सिस्टम चल रहे हैं.
अमेरिका फ्लू की भविष्यवाणी के लिए “फ्लूसाइट मॉडल” का इस्तेमाल करता है,यूके मौसम देखकर फ्लू की रिपोर्टिंग करता है, सिंगापुर रीयल-टाइम में डेंगू हॉटस्पॉट की भविष्यवाणी करता है, और दक्षिण कोरिया एआई की मदद से कोरोना की निगरानी करता है. अब इन्हीं देशों की तरह भारत भी अपना राष्ट्रीय स्तर का आधुनिक हेल्थ सर्विलांस मॉडल बना रहा है.
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