भारतीय नौसेना को जून के तीसरे हफ्ते में एक बड़ा रणनीतिक तोहफा मिलने वाला है. कोलकाता में होने वाले एक विशेष समारोह में तीन नए स्वदेशी जहाज नौसेना में शामिल किए जाएंगे. इनमें आईएनएस दूनागिरी, आईएनएस अग्रय और आईएनएस संशोधक शामिल हैं. नौसेना में यह केवल यह सिर्फ नए जहाजों की तैनाती नहीं है, यह भारत की बढ़ती समुद्री ताकत और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का भी बड़ा संकेत माना जा रहा है. यह त्रिशक्ति भारत को समुद्र में और मजबूत करेगी. जिसका फोकस भारतीय नौसेना की ताकत को बढ़ाना है.
तीनों जहाज क्यों हैं खास ?
भारतीय नौसेना के इतिहास में ऐसे मौके बहुत कम आए हैं, जब एक साथ तीन-तीन बड़े युद्धपोत भारतीय नौसेना में शामिल किए गए हो. जनवरी 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुंबई में आईएनएस सूरत, आईएनएस नीलगिरी और आईएनएस वाघशीर को राष्ट्र को समर्पित किया था. अब कोलकाता में होने वाला आयोजन भी उतना ही महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इस बार शामिल होने वाले तीनों जहाज अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाएंगे. एक समुद्री युद्ध के लिए है, दूसरा दुश्मन पनडुब्बियों की तलाश करेगा तो तीसरा समुद्र की गहराइयों का अध्ययन और सर्वेक्षण करके नई जानकारी देगा.
कोलकाता के GRSI में हुआ है निर्माण
इन जहाजों का निर्माण कोलकाता के गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSI) ने किया है. मार्च 2026 में जीआरएसई ने तीनों जहाज एक साथ नौसेना को सौंपे थे. इसे भारतीय जहाज निर्माण उद्योग की बड़ी उपलब्धि माना गया. जीआरएसई अब तक 118 से ज्यादा युद्धपोत और सहायक जहाज बना चुका है. इनमें से 80 से ज्यादा जहाज भारतीय नौसेना को दिए गए हैं. इन तीनों जहाजों में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है. इससे देश के छोटे और मध्यम उद्योगों को भी फायदा मिला है. इन तीनों जहाजों की अपनी अलग-अलग खासियत है.
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INS दूनागिरी: दुश्मन के लिए बड़ी चुनौती
तीनों जहाजों में सबसे ज्यादा चर्चा INS दूनागिरी की हो रही है. यह प्रोजेक्ट-17 ए के तहत बना आधुनिक स्टेल्थ फ्रिगेट है. इसका नाम उत्तराखंड की दूनागिरी चोटी के नाम पर रखा गया है. करीब 149 मीटर लंबा और 6,670 टन वजनी यह युद्धपोत आधुनिक स्टेल्थ तकनीक से लैस है. इसकी खासियत यह है कि इसे दुश्मन के रडार पर पहचानना मुश्किल होता है. दूनागिरी 30 नॉट्स से अधिक की रफ्तार से चल सकता है. यह लंबी दूरी तक समुद्र में लगातार अभियान चला सकता है. यह युद्धपोत एक साथ कई भूमिकाएं निभा सकता है. यह दुश्मन के जहाजों पर हमला कर सकता है. हवाई खतरों से मुकाबला कर सकता है. साथ ही पनडुब्बियों की तलाश कर उन पर कार्रवाई भी कर सकता है.
ब्रह्मोस और बराक-8 से लैस
आईएनएस दूनागिरी की ताकत इसकी आधुनिक हथियार प्रणाली है. यह ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें तैनात होंगी. ये लंबी दूरी से दुश्मन के जहाजों को निशाना बना सकती हैं. इसके अलावा बराक-8 एयर डिफेंस सिस्टम इसे हवाई हमलों से सुरक्षा देगा. जहाज में आधुनिक रडार, सोनार और कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम भी लगाए गए हैं. नौसेना का मानना है कि यह जहाज हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री ताकत को और मजबूत करेगा.
INS अग्रय करेगा पनडुब्बियों का शिकार
दूसरा जहाज INS अग्रय है. यह अर्नाला श्रेणी के एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट कार्यक्रम का हिस्सा है. इसका काम दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाना और उन्हें निष्क्रिय करना होगा. करीब 77 मीटर लंबा और लगभग 900 टन वजनी यह जहाज छोटे आकार का है. लेकिन इसकी तकनीक काफी उन्नत है. इसमें आधुनिक सोनार सिस्टम लगाए गए हैं, जो समुद्र के भीतर छिपे खतरों की पहचान कर सकते हैं. जहाज में टॉरपीडो, एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर और कई अत्याधुनिक सेंसर भी मौजूद हैं. कम ड्राफ्ट होने की वजह से यह उथले समुद्री इलाकों और तटीय क्षेत्रों में भी आसानी से काम कर सकता है.
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INS संशोधक जुटाएगा समुद्र के बारे में जानकारी
तीसरा जहाज आईएनएस संशोधक है. यह एक आधुनिक सर्वेक्षण और अनुसंधान पोत है. इसका काम समुद्र की गहराई मापना, समुद्री मार्गों की जानकारी जुटाना और नौवहन के लिए जरूरी मानचित्र तैयार करना होगा. करीब 110 मीटर लंबा यह जहाज तटीय और गहरे समुद्र दोनों क्षेत्रों में सर्वेक्षण कर सकता है. इसमें डिजिटल साइड स्कैन सोनार, ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल्स, रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल्स और आधुनिक डेटा प्रोसेसिंग सिस्टम लगाए गए हैं. इनकी मदद से समुद्र के भीतर मौजूद संरचनाओं और गतिविधियों का विस्तृत अध्ययन किया जा सकता है. जरूरत पड़ने पर इसका इस्तेमाल मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों में भी किया जा सकेगा.
मेक इन इंडिया की झलक
इन तीनों जहाजों की सबसे बड़ी खासियत इनमें इस्तेमाल की गई स्वदेशी तकनीक है. यानि इनमें मेक इन इंडिया की झलक दिखने वाली है. भारत के केवल अब युद्धपोत बना ही नहीं रहा है. बल्कि बल्कि सेंसर, हथियार प्रणालियां और जटिल तकनीकी एकीकरण भी देश में ही कर रहा है. भारतीय नौसेना पहले से ही स्वदेशीकरण के मामले में सबसे आगे मानी जाती है.
हिंदा महासागर में बढ़ रही भारत की ताकत
भारतीय नौसेना लगातार हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति मजबूत कर रही है. समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा, तटीय निगरानी, समुद्री संसाधनों की रक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना उसकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है. आईएनएस दूनागिरी, आईएनएस अग्रय और आईएनएस संशोधक के शामिल होने से नौसेना की युद्धक क्षमता, समुद्री निगरानी और सर्वेक्षण क्षमता में बड़ा इजाफा होगा. साथ ही यह भारत के आत्मनिर्भर रक्षा निर्माण अभियान को भी नई मजबूती देगा. समुद्र में भारत की ताकत लगातार बढ़ रही है. इन तीनों स्वदेशी युद्धपोत के शामिल होने के बाद भारतीय नौसेना को और मजबूती मिलेगी.
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