पहलगाम में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी संगठनों की हिमाकत के बाद ऑपरेशन सिंदूर के जरिये भारत ने पड़ोसी मुल्क को कभी न भूलने वाला सबक सिखाया था. अगर आतंकी संगठन दोबारा ऐसी हरकत करता है तो भारत उसे चौंकाते हुए क्या करेगा, इस पर विशेषज्ञों ने अपनी बात रखी है. रक्षा विशेषज्ञ एयर कोमोडोर सी उदय भास्कर ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के जरिये भारत ने पाकिस्तान प्रायोजित छद्म युद्ध के खिलाफ एक प्रतिरोधी क्षमता (डेटेरेंट) साबित की है, लेकिन युद्ध में हम हमेशा एक ही रणनीति पर नहीं चल सकते. टेक्नोलॉजी के दौर में हर कुछ सालों के भीतर जंग की रणनीति और तौरतरीके बदल रहे हैं.
ड्रोन युद्ध के लिए तैयारी जरूरी
रूस-यूक्रेन और ईरान-अमेरिका युद्ध ने ड्रोन को बेहद सस्ता मगर कारगर हथियार के तौर पर साबित किया है. भारत को ऐसे ही ड्रोन वारफेयर की महाशक्ति बनने के साथ ऐसे हमलों से निपटने की ताकत पैदा करने पर तेजी से काम करना होगा. ईरान और यूक्रेन ने दिखा दिया है कि शक्तिशाली फौज का सामना करने के लिए फाइटर जेट, मिसाइलों के जखीरे और एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम ही सब कुछ नहीं हैं, छोटे मुल्क ड्रोन के जरिये भी ताकतवर देश का तगड़ा नुकसान पहुंचा सकते हैं.
क्या भारत की इजरायल की तरह प्रोएक्टिव पॉलिसी हो
भारत को हर बार पाकिस्तान की ओर से आतंकी हमलों के बाद सैन्य कार्रवाई के बजाय क्या इजरायल की तरह प्रोएक्टिव पॉलिसी अपनानी चाहिए. इजरायल हमले की आशंका होने पर खतरे को भांपते हुए पहले ही हमला बोल देता है. इस पर भास्कर ने कहा कि एक कदम आगे जाकर कार्रवाई करने का फैसला हम ले सकते हैं, लेकिन भारत जैसे जिम्मेदार देश को घरेलू, अंतरराष्ट्रीय और मानवीय कानूनों के अधीन एक्शन का ध्यान रखना होता है.
इंटेलीजेंस को और मजबूत बनाया जाए
रक्षा विशेषज्ञ भास्कर ने कहा कि भारत के लिए यह भी जरूरी होगा कि वो अपने इंटेलीजेंस नेटवर्क को मजबूत बनाए ताकि किसी भी आतंकी हमले को समय रहते नाकाम किया जाए. कारगिल, मुंबई अटैक, पुलवामा-उरी स्ट्राइक जैसे हमलों को रोकने के लिए इजरायल, अमेरिका जैसे मजबूत खुफिया नेटवर्क बनाने की जरूरत है. मजबूत खुफिया तंत्र के जरिये हम आने वाले खतरों से निपट सकते हैं. पड़ोसी मुल्क को कठघरे में खड़ा कर सकते हैं.
सफल ज्वाइंट ऑपरेशन
भास्कर ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के जरिये सफल ज्वाइंट ऑपरेशन को सटीक तरीके से अंजाम दिया गया. लेकिन केवल फाइटर जेट नहीं, मिसाइलें, ड्रोन, एयर डिफेंस ही काफी नहीं हैं.
नेटवर्क सेंट्रिक वारफेयर को और बेहतर बनाना होगा.
टू फ्रंट वार नहीं टू नेशन वार
भारत-पाक युद्ध के दौरान चीन द्वारा पाकिस्तान को सैटेलाइट के जरिये मदद दिए जाने के सवाल पर भास्कर ने कहा कि चीन और पाकिस्तान में गहरी दोस्ती जगजाहिर है. इस प्रकार की जंग में काफी सूचनाएं साझा की गईं. अब इसे टू फ्रंट वार नहीं टू नेशन वॉर की तरह लेना चाहिए. उन्होंने कहा कि भारत को हथियारों के मामले में गंभीरता से स्ट्रैटजिक ऑटोनॉमी की ओर बढ़ना चाहिए.
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