Andhra Pradesh News: भारत का स्पेस सेक्टर एक नई करवट ले रहा है. सरकारी स्पेस एजेंसियों के बाद अब देश के प्राइवेट स्टार्टअप्स भी अंतरिक्ष में अपनी धाक जमाने के लिए तैयार हैं. स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace) का विक्रम-1 (Vikram-1) रॉकेट अब अपनी ऐतिहासिक उड़ान के बिल्कुल करीब पहुंच गया है. श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर (SDSC) के ग्राउंड जीरो से कंपनी ने जो लेटेस्ट अपडेट्स शेयर किए हैं, वो हर भारतीय को रोमांचित करने वाले हैं.
सरकारी लॉन्च पैड पर पहली बार प्राइवेट रॉकेट
29 जून 2026 का दिन भारतीय स्पेस इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा माइलस्टोन रहा. सतीश धवन स्पेस सेंटर के फर्स्ट लॉन्च पैड पर विक्रम-1 के पहले स्टेज-1 को सफलतापूर्वक खड़ा कर दिया गया. भारत के इतिहास में यह पहली बार हुआ जब किसी प्राइवेट कंपनी द्वारा पूरी तरह से देश में ही डिजाइन, डेवलेप और मैन्युफैक्चर किए गए किसी ऑर्बिटल रॉकेट को इस पैड पर जगह मिली हो. यह सिर्फ एक लॉन्चिंग नहीं है, बल्कि 'मेक इन इंडिया' की एक बहुत बड़ी कामयाबी है.
Piece by piece, Vikram-1 is coming alive—each stage carefully lifted, aligned, and integrated into a single flight-ready rocket.
— Skyroot Aerospace (@SkyrootA) June 29, 2026
Getting closer to launch. pic.twitter.com/a9ta9Yui4V
पुर्जे-पुर्जे जोड़कर तैयार हुई मशीन
एक रॉकेट को लॉन्चिंग के लिए तैयार करना किसी तपस्या से कम नहीं होता. स्काईरूट की टीम इस वक्त लॉन्च ऑपरेशंस के आखिरी और सबसे अहम चरण से गुजर रही है. 25 जून को स्टेज-1 की असेंबली पूरी होने के बाद से काम ने और रफ्तार पकड़ ली है. अब एक-एक करके विक्रम-1 के अलग-अलग हिस्सों को बेहद बारीकी से उठाया जा रहा है, सही दिशा में अलाइन किया जा रहा है और आपस में जोड़ा जा रहा है. अलग-अलग टुकड़ों से जुड़कर यह रॉकेट अब पूरी तरह से एक 'फ्लाइट-रेडी' मशीन का रूप ले चुका है.
Reporting from on ground at Sriharikota. Stage 1 assembly has been completed!
— Skyroot Aerospace (@SkyrootA) June 25, 2026
Team Skyroot is entering the final stretch of the launch operations. 🙌#Vikram1 pic.twitter.com/RRD4A0htCS
रॉकेट का अपना 'दिमाग', खुद सुधारेगा अपनी गलती
बताया गया है कि इस रॉकेट का हार्डवेयर जितना शानदार है, इसका सॉफ्टवेयर और दिमाग उससे भी ज्यादा एडवांस है. विक्रम-1 को अंतरिक्ष की ऑर्बिट तक सही-सलामत पहुंचाने की पूरी जिम्मेदारी इसके 'ऑनबोर्ड इंटेलिजेंस' सिस्टम पर है. इसमें खास तौर पर विकसित किए गए GNC (गाइडेंस, नेविगेशन और कंट्रोल) एल्गोरिदम का इस्तेमाल हुआ है. यह सिस्टम रॉकेट को उसके तय रास्ते पर उड़ने में मदद करता है. अगर उड़ान के दौरान हवा के दबाव या किसी अन्य कारण से रॉकेट अपने रास्ते से थोड़ा भी भटकता है, तो यह एल्गोरिदम रियल-टाइम में उसे खुद ठीक कर लेता है.
This episode is about the onboard intelligence that flies Vikram-1 to orbit: the GNC algorithms that follow a planned path and correct for deviation in real time, the avionics network of sensors and modules that act as the rocket's nervous system, and Ramanujan, the mission… pic.twitter.com/ypwkcw1tu0
— Skyroot Aerospace (@SkyrootA) June 25, 2026
'रामानुजन' के हाथ में कमान
रॉकेट के अंदर सेंसर्स और मॉड्यूल्स का एक कॉम्पलेक्स 'एवियोनिक्स नेटवर्क' बिछाया गया है. यह नेटवर्क रॉकेट के लिए बिल्कुल वैसे ही काम करता है, जैसे इंसानी शरीर में हमारा नर्वस सिस्टम. इस पूरे स्मार्ट सिस्टम और रॉकेट के दिमाग के केंद्र में है इसका मिशन कंप्यूटर, जिसे भारत के महान गणितज्ञ के नाम पर 'रामानुजन' (Ramanujan) नाम दिया गया है. यही वो मास्टरमाइंड है जो विक्रम-1 को अंतरिक्ष के सफर पर ले जाएगा.
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