विज्ञापन

स्काईरूट का कमाल: विक्रम-1 की कामयाबी से खुले नए व्यापार के नए द्वार

इस साल जुलाई में रॉकेट विक्रम-1 ने उपग्रह 'SCOPE' को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में स्थापित किया था. इस कारनामे को कर दिखाने वाली निजी क्षेत्र की कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस के साथ केरल की एक कंपनी ने तीन उपग्रह अंतरिक्ष में भेजने का करार किया है.

स्काईरूट का कमाल: विक्रम-1 की कामयाबी से खुले नए व्यापार के नए द्वार
नई दिल्ली:

भारत की अंतरिक्ष क्षेत्र की निजी कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस के ऑर्बिटल रॉकेट 'विक्रम-1' ने 18 जुलाई को उड़ान भरी थी. इसके कुछ ही हफ्तों बाद हैदराबाद स्थित इस कंपनी ने एक और व्यावसायिक सफलता हासिल की है. कंपनी ने स्पेस टेक्नोलॉजी फर्म HEX20 के साथ तीन प्रक्षेपण के लिए समझौता किया है. ये लॉन्च 2027 के अंत में शुरू होंगे. यह समझौता विक्रम-1 पर ग्राहकों के बढ़ते भरोसे का प्रतीक है. इससे संकेत मिलता है कि स्काईरूट की पहली सफल उड़ान नए कारोबारी अवसरों में बदलने लगी है.

स्काईरूट का उपग्रह 'SCOPE' क्या नहीं कर पाया

स्काईरूट ने अपने उपग्रह 'SCOPE' के प्रदर्शन की जानकारी भी दी है. इसे विक्रम-1 के जरिए अंतरिक्ष में भेजा गया था. यह क्यूबसैट सफलतापूर्वक कक्षा में पहुंच गया है. इसकी संचार प्रणाली के कुछ हिस्से भी काम करने लगे हैं. लेकिन यह उपयोगी हाउसकीपिंग टेलीमेट्री नहीं भेज पाया. इस वजह से इंजीनियर अंतरिक्ष यान की कई महत्वपूर्ण प्रणालियों की जांच नहीं कर पाए, इसमें उसका इमेजिंग पेलोड भी शामिल था. इस वजह से इस मिशन में जिन प्रमुख क्षमताओं का परीक्षण किया जाना था, उनकी पुष्टि नहीं हो पाई. 

इन दोनों नतीजों से अंतरिक्ष उड़ान की वास्तविक तस्वीर सामने आती है. रॉकेट ने शानदार प्रदर्शन किया और पेलोड को कक्षा में पहुंचाने का अपना सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य हासिल किया. इसमें से कुछ पेलोड अपना लक्ष्य हासिल करने में सफल रहे, जबकि SCOPE और अंतरिक्ष मलबे से जुड़ा एक तकनीकी पेलोड पूरी तरह सफल नहीं हुआ. किसी रॉकेट की पहली ऑर्बिटल उड़ान में लॉन्च व्हीकल का प्रदर्शन ही सफलता का सबसे महत्वपूर्ण पैमाना होता है.

18 जुलाई 2026 को विक्रम-1 का मिशन भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग के लिए एक ऐतिहासिक क्षण था. यह देश का पहला निजी क्षेत्र की ओर से विकसित ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल बना, जो अपनी पहली ही उड़ान में कक्षा तक पहुंचा. पहली कोशिश में कक्षा में पहुंचने को दुनिया भर के रॉकेट विज्ञान के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि माना जाता है, क्योंकि पहली उड़ानों में अक्सर तकनीकी समस्याएं और असफलताएं सामने आती हैं. इस सफलता ने स्काईरूट की लॉन्च प्रणालियों, प्रोपल्शन तकनीक और रॉकेट के अलग-अलग हिस्सों को एक साथ जोड़ने की क्षमता की मजबूती को साबित किया. इस प्रदर्शन ने सालों से किए जा रहे विकास कार्य को सही साबित किया.

विक्रम-1 की सफलता से खुला नया रास्ता

इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि विक्रम-1 के प्रदर्शन ने भारत से निजी अंतरिक्ष लॉन्च के एक नए दौर का रास्ता खोलने में मदद की है. एक निजी कंपनी के बनाए रॉकेट के उपग्रहों को कक्षा में पहुंचाने में सफल होने से सैटेलाइट ऑपरेटरों, निवेशकों और उन ग्राहकों का भरोसा बढ़ा है, जो अंतरिक्ष तक डेडिकेटेड पहुंच चाहते हैं. HEX20 के साथ हुआ समझौता इसी भरोसे का शुरुआती संकेत है. स्काईरूट का लक्ष्य अब एक साल में 12 तक मिशन लॉन्च करना है, जिससे छोटे उपग्रहों के लॉन्च की बढ़ती वैश्विक मांग को पूरा किया जा सके.

स्काईरूट एयरोस्पेश को केरल की HEX20 Space से तीन लॉच का ठेका मिला है. यह लॉच अगले साल के अंत में होंगे.

स्काईरूट एयरोस्पेश को केरल की HEX20 Space से तीन लॉच का ठेका मिला है. यह लॉच अगले साल के अंत में होंगे.

SCOPE उपग्रह विक्रम-1 के परीक्षण मिशन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था. इसका वजन 3.415 किलोग्राम था. इसे 3U क्यूबसैट के रूप में बनाया गया था. इसे पूरी तरह से स्काईरूट ने विकसित किया था. इसका उद्देश्य अंतरिक्ष यान की कई तकनीकों का प्रदर्शन करना था. इनमें बिजली प्रणाली, संचार, उपग्रह की दिशा और स्थिति तय करने और नियंत्रित करने वाली प्रणाली, ऑनबोर्ड डेटा हैंडलिंग, तापमान प्रबंधन और इमेजिंग शामिल थे.

स्काईरूट के मुताबिक कक्षा में पहुंचने के बाद कंपनी के कैनिस्टर वाले सैटेलाइट डिप्लॉयर ने SCOPE को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में छोड़ दिया. कंपनी के मुताबिक उपग्रह ने पहले से तय ऑनबोर्ड कार्यक्रम के अनुसार काम किया और संचार के लिए तय समय लगभग उम्मीद के मुताबिक रहे. इससे ऑनबोर्ड टाइमिंग और मिशन सीक्वेंसिंग के कुछ हिस्सों की पुष्टि हुई. दुनिया भर के ग्राउंड स्टेशनों के नेटवर्क की मदद से इंजीनियरों ने उपग्रह का रेडियो फ्रीक्वेंसी सिग्नल पकड़ा और कई बार उसके कक्षा में गुजरने के दौरान PCM फ्रेम सिंक्रोनाइजेशन भी हासिल किया.

क्या होती है हाउसकीपिंग टेलीमेट्री

इन शुरुआती संकेतों से पता चला कि संचार प्रणाली का कम से कम कुछ हिस्सा उम्मीद के मुताबिक काम कर रहा था. लेकिन जल्द ही एक गंभीर समस्या सामने आई. सिग्नल मिलने के बावजूद वैध हाउसकीपिंग टेलीमेट्री को डिकोड नहीं किया जा सका. हाउसकीपिंग टेलीमेट्री तकनीकी डेटा की वह जानकारी होती है, जो किसी अंतरिक्ष यान की प्रणालियों की स्थिति और स्वास्थ्य के बारे में बताती है. इसके बिना इंजीनियर उपग्रह के कई उपकरणों के प्रदर्शन की पुष्टि नहीं कर सकते.

Latest and Breaking News on NDTV

इसके परिणामस्वरूप मिशन के कई महत्वपूर्ण लक्ष्य अधूरे रह गए. इमेजिंग पेलोड की पुष्टि नहीं हो सकी. उपग्रह की दिशा और स्थिति तय करने और नियंत्रित करने वाली प्रणाली को भी जांचा नहीं जा सका. कुछ सेंसर और एक्ट्यूएटर के काम करने की भी पुष्टि नहीं हो सकी. सरल शब्दों में कहें तो SCOPE कक्षा तक पहुंच तो गया, लेकिन जिन तकनीकों का परीक्षण करने के लिए उसे भेजा गया था,उनमें से कुछ का पूरी तरह मूल्यांकन नहीं हो पाया. 

स्काईरूट का कहना है कि इन कमियों के बावजूद मिशन ने कई महत्वपूर्ण चीजों का सफलतापूर्वक प्रदर्शन या सत्यापन किया. इनमें सैटेलाइट डिप्लॉयमेंट मैकेनिज्म, रेडियो फ्रीक्वेंसी कम्युनिकेशन लिंक, मिशन सीक्वेंसिंग, इलेक्ट्रिकल पावर सिस्टम, मिशन प्लानिंग, सौर ऊर्जा से बैटरी चार्ज करना, स्ट्रक्चरल डिजाइन, रियल टाइम क्लॉक का प्रदर्शन और मिशन कंट्रोल सेंटर का संचालन शामिल है. अंतरिक्ष यान लॉन्च, रॉकेट से अलग होने और कई कक्षाओं में संचालन के दौरान सफलतापूर्वक सुरक्षित रहा. इससे इंजीनियरों को महत्वपूर्ण जानकारी मिली और भविष्य के मिशनों के लिए उपयोगी अनुभव हासिल हुआ.

नए रॉकेटों की पहली उड़ान का महत्व क्या है

यह नतीजा पहली बार लॉन्च किए जाने वाले रॉकेटों की वास्तविकता को दर्शाता है. नए रॉकेटों की पहली उड़ानों में आमतौर पर बहुत मूल्यवान और पूरी तरह काम करने वाले पेलोड नहीं भेजे जाते है. इसकी जगह इनमें तकनीकी प्रदर्शन करने वाले उपग्रह, प्रयोगात्मक अंतरिक्ष यान, कई बार केवल वजन बढ़ाने के लिए इंजीनियरिंग पेलोड या पूरी तरह निष्क्रिय पेलोड तक भेजे जाते हैं. इसका मुख्य उद्देश्य खुद लॉन्च व्हीकल की क्षमता साबित करना होता है. लेकिन अगर साथ भेजे गए पेलोड भी सफल हो जाएं तो यह अच्छी बात मानी जाती है. लेकिन पहली उड़ान में मुख्य लक्ष्य रॉकेट की क्षमता साबित करना होता है. 

18 जुलाई 2026 को विक्रम-1 का मिशन भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग के लिए एक ऐतिहासिक क्षण था.

18 जुलाई 2026 को विक्रम-1 का मिशन भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग के लिए एक ऐतिहासिक क्षण था.

विक्रम-1 का आकलन करते समय यह बात महत्वपूर्ण है. यह मिशन सबसे पहले एक बिल्कुल नए ऑर्बिटल रॉकेट का परीक्षण था. यह परीक्षण सफल रहा. रॉकेट कक्षा तक पहुंचा और उसने अपने पेलोड को वहां पहुंचाया. कई पेलोड ने अपने मिशन के महत्वपूर्ण हिस्से पूरे किए. वहीं SCOPE सहित कुछ अन्य पेलोड पूरी तरह सफल नहीं हो पाए. शुरुआती अंतरिक्ष कार्यक्रमों में ऐसे नतीजे असामान्य नहीं हैं, जहां एक साथ रॉकेट और अंतरिक्ष यान दोनों की नई तकनीकों का परीक्षण किया जा रहा हो.

उद्योग के नजरिए से सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विक्रम-1 ने ग्राहकों का भरोसा हासिल किया है. हाल ही में हुआ HEX20 समझौता, जिसमें पृथ्वी की निगरानी और अंतरिक्ष में तकनीक के प्रदर्शन से जुड़े मिशनों के लिए तीन डेडिकेटेड लॉन्च शामिल हैं, यह बताता है कि बाजार ने रॉकेट की पहली उड़ान को सकारात्मक रूप से लिया है. स्काईरूट को व्यावसायिक ऑर्डर मिलना, उसकी लॉन्च क्षमता की सबसे मजबूत पुष्टि हैं.

विक्रम-1 की सफलता और सीख

केरल के तिरुवनंतपुरम में स्थित HEX20 Space के सीईओ अमल चंद्रन ने कहा,''भारत का निजी अंतरिक्ष क्षेत्र अब ऐसे दौर में पहुंच रहा है, जहां मिशन के पूरे चक्र में सहयोग अगले चरण की वृद्धि तय करेगा. स्काईरूट के साथ हमारी साझेदारी, दोनों की अलग-अलग क्षमताओं को एक साथ लाती है. इससे हम भारत और दुनिया भर के ग्राहकों के लिए अंतरिक्ष तक पहुंच के मजबूत रास्ते बना सकेंगे और अधिक महत्वाकांक्षी मिशनों को संभव बना सकेंगे.''

इसलिए विक्रम-1 की कहानी सफलता और सीख, दोनों की कहानी है. रॉकेट अपने लक्ष्य तक पहुंचा और उसने साबित कर दिया कि वह कक्षा तक पहुंच सकता है. इस सफलता से नया कारोबार भी मिला है. वहीं, SCOPE की उपयोगी टेलीमेट्री वापस भेजने में असफलता, यह याद दिलाती है कि अंतरिक्ष यान का विकास अब भी बेहद कठिन चुनौती है. अंत में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विक्रम-1 ने वह नतीजा दिया जो सबसे ज्यादा मायने रखता था. यह रॉकेट वास्तविक परिस्थितियों में कठिन परीक्षण से गुजरा और पूरी तरह सफल रहा. SCOPE की असफलता सहित इस मिशन से मिली सीख भविष्य के मिशनों को बेहतर बनाने में मदद करेगी.

ये भी पढ़ें: JPC के पास भेजा सकता है FCRA बिल, विपक्ष के विरोध के बीच सरकार ले सकती है फैसला

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Skyroot Aerospace, Skyroot Aerospace's Vikram-1, Vikram-1 News
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com