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भारत की सेना को नया 'कमांडर', नौसेना को नया कप्तान; कौन हैं जनरल सुब्रामणि और एडमिरल स्वामीनाथन?

भारत की सेना को जनरल एन.एस. राजा सुब्रामणि के रूप में नया 'कमांडर' और नौसेना के कप्‍तान की कमान अब एडमिरल स्वामीनाथन के हाथों में है. दोनों ही अधिकारियों को सेना में काम करने का लंबा अनुभव है.

भारत की सेना को नया 'कमांडर', नौसेना को नया कप्तान; कौन हैं जनरल सुब्रामणि और एडमिरल स्वामीनाथन?
नई दिल्‍ली:

भारत की सैन्य व्यवस्था में 31 मई 2026 को बड़ा बदलाव हुआ. देश को नया चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ यानी कि सीडीएस और नया नौसेना प्रमुख मिला. जनरल एन.एस. राजा सुब्रामणि ने देश के तीसरे सीडीएस के रूप में कार्यभार संभाल लिया है. वहीं, एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन भारतीय नौसेना के 27वें प्रमुख बन गए हैं. दोनों अधिकारियों ने ऐसे समय में जिम्मेदारी संभाली है, जब भारत अपनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर जोर दे रहा है.

मॉडर्न जमाने की जंग में तीनों सेनाओं का महत्‍व 

जनरल एन.एस. राजा सुब्रामणि ने सीडीएस और सैन्य मामलों के विभाग के सचिव का पद संभालने के बाद राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पहुंचकर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी. उन्हें साउथ ब्लॉक में तीनों सेनाओं की ओर से गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया. कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने अपने से पहले सेवा देने वाले अधिकारियों के योगदान को याद किया. उन्होंने कहा कि वह उनके काम को आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगे. जनरल सुब्रामणि ने कहा कि देश की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए तीनों सेनाएं और बाकी सारे संस्थान मिलकर काम करेंगे. उन्होंने रक्षा बलों में संयुक्तता, बेहतर तालमेल और एकीकरण बढ़ाने पर जोर दिया. ये भारत की उस रक्षा नीति का हिस्सा है, जिसे जनरल बिपिन रावत ने अपने कार्यकाल में शुरू किया था. क्योंकि मॉडर्न जमाने की जंग लड़ने के लिए किसी एक सेना नहीं, बल्कि तीनों सेनाओं का इस्तेमाल करना होगा. ठीक वैसे ही जैसे ऑपरेशन सिंदूर में तीनों सेनाओं ने संयुक्त रूप से पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन को अंजाम दिया था. 

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40 साल का लंबा करियर 

जनरल सुब्रामणि ने स्वदेशी हथियारों के विकास और उनकी तेज़ी से तैनाती को भी अपनी प्राथमिकताओं में शामिल बताया. उनका कहना है कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करना समय की जरूरत है. जनरल सुब्रामन चार दशक से अधिक समय तक सेना में सेवा दे चुके हैं. उन्हें दिसंबर 1985 में गढ़वाल राइफल्स में कमीशन मिला था. अपने लंबे सैन्य करियर में उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं. वह इंडियन आर्मी की 2 कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग रहे. इसके अलावा उन्होंने सेन्ट्रल कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में भी काम किया. वह सेना के सह सेना प्रमुख यानि वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ भी रह चुके हैं. सीडीएस बनने से पहले भी वह राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में सैन्य सलाहकार के पद पर कार्यरत थे.

एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन के हाथों में नौसेना

भारतीय नौसेना की कमान अब एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन के हाथों में होगी. उन्होंने भारतीय नौसेना के 27वें चीफ ऑफ द नेवल स्टाफ के रूप में कार्यभार संभाला है. उन्होंने एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी का स्थान लिया है, जो 41 साल की सर्विस के बाद सेवानिवृत्त हुए हैं. एडमिरल स्वामीनाथन को 1 जुलाई 1987 को भारतीय नौसेना में कमीशन मिला था. वह संचार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली के विशेषज्ञ माने जाते हैं. मॉडर्न जमाने में होने वाले इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर में उनकी दक्षता, इंडियन नेवी को मजबूती प्रदान करेगी.  करीब चार दशक के अपने करियर में उन्होंने कई युद्धपोतों की कमान संभाली. इनमें आईएनएस विद्युत, आईएनएस विनाश, आईएनएस कुलिश और आईएनएस मैसूर शामिल हैं. उन्होंने भारत के विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य का भी नेतृत्व किया है. वरिष्ठ अधिकारी के रूप में उन्होंने दक्षिणी नौसैनिक कमान में प्रशिक्षण से जुड़ी जिम्मेदारियां भी संभाल चुके हैं. बाद में उन्होंने इंडियन नेवी के वेस्टर्न फ्लीट की कमान भी संभाली, जिसे भारतीय नौसेना की प्रमुख युद्धक शक्ति माना जाता है.

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अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में पीएचडी की डिग्री 

एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन नौसेना मुख्यालय में चीफ ऑफ स्टाफ, चीफ ऑफ पर्सनल और वाइस चीफ ऑफ द नेवल स्टाफ जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी रह चुके हैं. नौसेना प्रमुख बनने से पहले वह पश्चिमी नौसैनिक कमान के प्रमुख थे. एडमिरल स्वामीनाथन की शैक्षणिक उपलब्धियां भी उल्लेखनीय हैं. उन्होंने भारत, ब्रिटेन और अमेरिका के प्रतिष्ठित सैन्य संस्थानों में प्रशिक्षण प्राप्त किया है. उनके पास अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में पीएचडी की डिग्री भी है.

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जनरल एन.एस. राजा सुब्रामणि और एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन दोनों अधिकारियों को परम विशिष्ट सेवा पदक सहित कई सैन्य सम्मान मिल चुके हैं. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नए सीडीएस और नए नौसेना प्रमुख की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब भारत सैन्य आधुनिकीकरण, संयुक्त युद्धक क्षमता और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को नई गति देने की कोशिश कर रहा है. ऐसे में दोनों अधिकारियों की भूमिका आने वाले सालों में बेहद महत्वपूर्ण मानी जाएगी.

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