
- भारत और अफ्रीका 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने के लिए एक नया रोडमैप तैयार कर रहे हैं.
- भारत अफ्रीका के मोटर वाहन आयात बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की योजना बना रहा है.
- भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग अफ्रीका में यात्री, वाणिज्यिक और इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग पूरी कर सकता है.
भारत और अमेरिका के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के 50% रेसिप्रोकल टैरिफ को लेकर बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अफ़्रीकी देशों के साथ व्यापार को बढ़ाने के लिए एक नया रोडमैप तैयार किया है. भारत और अफ्रीका 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने के लिए काम करेंगे, केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने दिल्ली में आयोजित सीआईआई भारत-अफ्रीका व्यापार सम्मेलन के समापन सत्र में ये अहम ऐलान किया.
ये भारत सरकार द्वारा दुनियाभर में नए वैकल्पिक बाज़ार तलाशने की नयी रणनीति का एक अहम हिस्सा है. पीयूष गोयल ने उद्योगजगत को सीआईआई भारत-अफ्रीका व्यापार सम्मेलन में सम्बोधित करते हुए कहा, "हम मिलकर कच्चे माल के निर्यात से आगे बढ़कर वैश्विक बाज़ारों के लिए मूल्यवर्धित उत्पादन की ओर बढ़ सकते हैं."
वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक, भारत और अफ्रीका के बीच द्विपक्षीय व्यापार काफी संतुलित है. भारत का निर्यात 42.7 अरब अमेरिकी डॉलर और आयात 40 अरब अमेरिकी डॉलर है.
पीयूष गोयल ने ऑटोमोबाइल क्षेत्र में विशेष सहयोग की नई संभावनाओं का ज़िक्र करते हुए कहा, "अफ्रीका प्रति वर्ष लगभग 20 अरब अमेरिकी डॉलर (USD 20 billion) मूल्य के मोटर वाहनों का आयात करता है, जबकि भारत वर्तमान में इस मांग का केवल लगभग 2 अरब अमेरिकी डॉलर (USD 2 billion) ही पूरा करता है. भारतीय ऑटोमोबाइल लागत और गुणवत्ता, दोनों ही दृष्टिकोण से विश्व स्तर पर competitive हैं और इनके manufacturing standards दुनिया के सर्वश्रेष्ठ मानकों के बराबर हैं. भारतीय निर्माता अफ्रीका में यात्री वाहनों, वाणिज्यिक वाहनों (commercial vehicles), दोपहिया और तिपहिया वाहनों तथा किफायती इलेक्ट्रिक मोबिलिटी समाधानों (electric mobility solutions) की बढ़ती माँग को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं. इससे अफ्रीकी देशों के लिए competitive price पर विश्वसनीय, fuel-efficient और पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ वाहनों (environmentally sustainable vehicles ) तक पहुंच के व्यापक अवसर खुलते हैं."
वाणिज्य मंत्रालय का आकलन है कि बदले में भारत महत्वपूर्ण खनिजों, पेट्रोलियम उत्पादों और कृषि सामानों जैसे अफ्रीकी संसाधनों के अधिक आयात से फायदा उठा सकता है. यह संतुलित व्यापारिक आदान-प्रदान दोनों क्षेत्रों को व्यापार बढ़ाने, रोज़गार सृजन करने और दीर्घकालिक औद्योगिक भागीदारी निर्माण में सहायता करेगा. साथ ही, भारत का एकीकृत भुगतान इंटरफ़ेस (Unified Payments Interface (UPI)) लेनदेन लागत को कम करने और अफ्रीका की वित्तीय प्रणालियों को मजबूत करने में सहायता कर सकता है.
भारत अफ्रीका में महत्वपूर्ण खनिजों और पेट्रोलियम उत्पादों जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा सकता है, जबकि भारत खाद्य सुरक्षा, तकनीकी उन्नयन, विनिर्माण और सेवाओं के क्षेत्र में अफ्रीका का सहयोग कर सकता है.
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