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मीटिंग तो कर लेगा, लेकिन इन चुनौतियों से कैसे पार पाएगा ‘INDIA’ ब्लॉक? समझिए

दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में इंडी गठबंधन की बैठक जारी है. इस बैठक में 23 विपक्षी दल जुटे हैं. लेकिन अभी भी ऐसी कई चुनौतियां हैं, जिनका हल पाना विपक्ष के लिए मुश्किल दिख रहा है.

मीटिंग तो कर लेगा, लेकिन इन चुनौतियों से कैसे पार पाएगा ‘INDIA’ ब्लॉक? समझिए
INDI Alliance Meeting: इंडी गठबंधन दिल्ली में बैठक
Congress X Handle
  • दिल्ली में जारी इंडिया गठबंधन की बैठक में 23 राजनीतिक दल शामिल हुए
  • इंडिया गठबंधन की सबसे बड़ी चुनौती नेतृत्व को चुनना है
  • गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर विवाद है, आगामी विधानसभा चुनावों में इसका असर देखा जाएगा

दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में इंडिया गठबंधन की बैठक में 23 राजनीतिक दल जुट रहे हैं. करीब दो साल बाद हो रही इंडिया गठबंधन की इस बैठक को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि दलों के साथ मिल बैठने से क्या उनके दिल भी मिलेंगे? इस सवाल का जवाब खोजने पर इस गठबंधन की चुनौतियों की सूची सामने आ जाती है. 

गठबंधन तो बन जाएगा लेकिन नेतृत्व कौन करेगा?

इंडिया गठबंधन की सबसे बड़ी चुनौती यही रही है कि नेता कौन होगा? अभी तक इसको लेकर अंदरखाने एक दूसरे को काटने की कोशिश होती रही है. अब यह बात सार्वजनिक हो चुकी है कि नीतीश कुमार को संयोजक बनाने का अरविंद केजरीवाल और ममता बनर्जी ने विरोध किया था. नतीजा ये हुआ कि नीतीश और उनकी पार्टी गठबंधन से दूर हो गई. अब जब ये इंडिया गठबंधन की मीटिंग हो रही है तो आम आदमी पार्टी खुद ही उससे दूरी बनाए हुए है. दूसरी ओर ममता बनर्जी की पश्चिम बंगाल में सरकार जा चुकी है और पार्टी बचाने के लिए वो कोलकाता और राजधानी दिल्ली में संघर्ष कर रही हैं.

कांग्रेस नेतृत्व करेगी तो राज्यों में क्या होगा?

अगर लेफ्ट की बात करें तो केरल में कांग्रेस के हाथों ताजा हार को वाममोर्चा भी भुला नहीं पाया है. मगर उसके पास भी कोई चारा नहीं बचा है. कांग्रेस लोकसभा में 99 सांसदों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है. मजबूरन सबको कांग्रेस का नेतृत्व स्वीकार करना ही पड़ेगा. बीजेपी से लड़ने के लिए क्षेत्रीय दलों को कांग्रेस का साथ चाहिए मगर कांग्रेस के साथ दिक्कत ये है कि जब तक पार्टी क्षेत्रीय दलों के आगे नहीं निकलेगी तब तक उसकी सीटें नहीं बढ़ेगी. ये विरोधाभास भी इंडिया गठबंधन के लिए एक चुनौती है, खासकर उत्तर भारत में. दक्षिण भारत में तो कांग्रेस ने अपनी किलेबंदी कर ली है.

दूसरी चुनौती है सीटों के बंटवारे की तो तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद यह सबसे बड़ा सवाल है कि क्या आने वाले विधानसभा चुनावों में इंडिया गठबंधन के बीच सीटों का बंटवारा संभव है? उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव साथ लड़ने पर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी को अच्छी सफलता मिली थी तो क्या इसे विधानसभा चुनाव में भी दोहराया जा सकता है? क्योंकि अब ये सवाल भी पूछा जा रहा है कि क्या बंगाल में भी तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस को एक साथ लड़ना चाहिए था? अब तो सवाल ये भी उठ रहा है कि बंगाल में बीजेपी से लड़ने के लिए वाममोर्चा,तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस को एक होने की जरूरत है वरना सब खत्म हो जाऐंगे.

‘बीजेपी का विरोध ही एकजुटता का आधार'

वैचारिक मतभेद पर कांग्रेस के राज्यसभा सांसद नासिर हुसैन ने एनडीटीवी से कहा कि इंडिया गठबंधन का जन्म ही बीजेपी से लड़ने के लिए हुआ है हम सब बीजेपी के खिलाफ हैं. इंडिया गठबंधन संसद से लेकर सड़क पर बीजेपी के खिलाफ लड़ेगा और हम लड़ भी रहे हैं. हम सब कैसे संप्रदायिक ताकतों का मुकाबला करें इसी पर रणनीति बनाने के लिए यह बैठक हो रही है. नासिर हुसैन ने यह भी कहा कि इंडिया गठबंधन की अभी और भी बैठकें होंगी जिसमें आगे की रणनीति बनाई जाएगी. जाहिर है कि इंडिया गठबंधन में विरोधाभास तो है और यही उनकी चुनौती है कि उससे कैसे निपटा जाए.

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