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संकटमोचक भारत... होर्मुज संकट में केरलम का विझिंजम पोर्ट कैसे बन रहा दुनिया का 'गेटवे'?

होर्मुज संकट के बीच केरलम का विझिंजम पोर्ट एक बड़ा शिपमेंट हब बनकर उभर रहा है. अकेले मार्च में ही यहां 61 जहाज आए हैं.

IANS
  • अमेरिका-ईरान के संघर्ष के कारण होर्मुज लगभग बंद हो गया है, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन पर गंभीर प्रभाव पड़ा है
  • तिरुवनंतपुरम में स्थित विझिंजम पोर्ट होर्मुज संकट के दौरान ग्लोबल शिपिंग का महत्वपूर्ण नया केंद्र बनकर उभरा है
  • विझिंजम पोर्ट को पीएम मोदी ने मई 2025 में उद्घाटित किया था, यह भारत का पहला डीप वॉटर ट्रांसशिपमेंट हब है
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नई दिल्ली:

अमेरिका-ईरान की जंग ने दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्ते होर्मुज संकट को बंद कर दिया है. 29 फरवरी से, जब से जंग शुरू हुई है तब से ही होर्मुज लगभग बंद है. यहां से बगैर इजाजत के जहाजों को गुजरने नहीं दिया जा रहा है. होर्मुज बंद रहने के कारण ग्लोबल सप्लाई चेन पर असर पड़ा है. पश्चिम एशिया में जारी इस संकट के बीच केरलम के तिरुवनंतपुरम में बना विझिंजम पोर्ट अहम मैरिटाइम हब बनकर उभर रहा है.

तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर ने इसे लेकर X पर एक पोस्ट भी की है. उन्होंने कहा कि होर्मुज संकट ने ग्लोबल शिपिंग का रुख तिरुवनंतपुरम की ओर मोड़ दिया है. तिरुवनंतपुरम के विझिंजम पोर्ट पर इस समय 100 जहाजों की भारी आवाजाही है, जो या तो कतार में खड़े हैं या आने का इंतजार कर रहे हैं.

विझिंजम पोर्ट का उद्घाटन मई 2025 में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था. इसे समुद्री व्यापार को बढ़ाने और विदेशी बंदरगाहों पर निर्भरता कम करने के मकसद से बनाया गया है. इस पोर्ट को अदाणी ग्रुप और केरलम सरकार ने बनाया है. यह भारत का पहला ऐसा पोर्ट है, जिसे बड़े-बड़े जहाजों को हैंडल करने के लिए बनाया है.

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होर्मुज संकट में विझिंजम बना सहारा

अब होर्मुज संकट के दौर में यह बहुत बड़ा सहारा बन रहा है. कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'रिकॉर्ड समय में 10 लाख टीईयू को हैंडल करने से लेकर दूसरे फेज के काम में तेजी से आगे बढ़ाने तक, विझिंजम पोर्ट अब भारत का दुनिया के लिए ट्रांसशिपमेंट का जवाब बन गया है. जब मैंने पहली बार इस बंदरगाह को साकार करने वाले टेंडर लाने में मदद की थी, तब यह एक अनिश्चित प्रोजेक्ट था, जिसे लेकर कई तरह के संशय थे और आलोचना हो रही थी.'

उन्होंने कहा, 'आज विझिंजम में हालात बदल रहे हैं. होर्मुज में जारी रुकावटों के कारण दुनिया एक भरोसेमंद गेटवे की तलाश में है और विझिंजम ने इस जरूरत को पूरा किया है. भारत का पहला डीप वॉटर ट्रांसशिपमेंट हब अब केवल एक प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि यह दुनिया की जरूरत है.'

थरूर ने आगे बताया कि मार्च में इस पोर्ट पर 61 जहाज आए हैं, जो एक नया रिकॉर्ड है और 100 जहाजों के आने का इंतजार है. 

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उन्होंने कहा, 'मार्च 2026 में ही 61 जहाजों को हैंडल किया गया, जो एक नया रिकॉर्ड है. 100 जहाजों के आने का इंतजार है. एक साथ 5 जहाजों को संभालने के लिए काम चल रहा है. हम एक ऐसे समुद्री क्षेत्र के दिग्गज के उदय के साक्षी बन रहे हैं जो न केवल कोलंबो या सिंगापुर जैसे ग्लोबल हब से मुकाबला करता है, बल्कि एक नया स्टैंडर्ड भी स्थापित करता है.'

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क्यों खास है विझिंजम पोर्ट?

जब इस पोर्ट को बनाने का काम चल रहा था, तब इसका काफी विरोध हुआ. स्थानीय लोगों के साथ-साथ राजनीतिक दलों ने भी इस पर सवाल उठाए. लेकिन इस बंदरगाह ने दुनिया में भारत की एक नई छवि बना दी है.

इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि यह भारत का पहला डीप वॉटर ट्रांसशिपमेंट हब है. इस पोर्ट में 20 मीटर तक की गहराई है, इसलिए यह बड़े-बड़े जहाजों को भी संभाल सकता है. 

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अभी इसकी क्षमता 10 लाख टीईयू की है. अभी इसके पहले फेज का ही उद्घाटन हुआ है. जब यह बनकर पूरी तरह तैयार हो जाएगा तो इसकी क्षमता 62 लाख टीईयू तक पहुंच जाएगी. टीईयू मतलब ट्वेंटी फुट इक्विवेलेंट यानी ऐसा कंटेनर जो 20 फीट लंबा हो. 

इस पोर्ट की लागत 8,800 करोड़ रुपये है. इसका सबसे बड़ा फायदा ये है कि इसने न सिर्फ भारत को एक बड़े ट्रांसशिपमेंट हब के तौर पर खड़ा कर दिया है, बल्कि विदेशी बंदरगाहों पर भारत की निर्भरता भी कम कर दी है. विझिंजम से पहले भारत में ऐसा पोर्ट नहीं था, जहां बड़े-बड़े जहाज आ सकें. पहले अगर किसी बड़े जहाज से सामान भारत लाना हो तो उसे पहले कोलंबो या सिंगापुर के पोर्ट पर खाली किया जाता था और फिर वहां से छोटे जहाजों के जरिए भारत लाया जाता था. लेकिन अब बड़े जहाज सीधे यहां आ सकते हैं.

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