- दिल्ली जल बोर्ड गंगा और यमुना नदी के जल को पहले अपने प्लांट्स में शुद्ध कर पीने योग्य बनाता है
- भागीरथी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में पानी छह चरणों के वैज्ञानिक प्रक्रिया से गुजरता है जिससे अशुद्धियां हटती हैं
- पानी में बड़े कचरे हटाने के लिए बाइफर्केशन चैंबर में मेकेनिकल बार स्क्रीन का उपयोग किया जाता है
राजधानी दिल्ली में घर-घर जल बोर्ड पानी की सप्लाई करता है. ज्यादातर पानी गंगा या यमुना नदी से आता है.लेकिन यह पानी सीधे तौर पर घरों तक नहीं पहुंचता. पहले इसे जल बोर्ड अपने प्लांट्स में शुद्ध करता है और पीने लायक बनाता है. इसके बाद इसे पाइपलाइन के जरिए दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में भेजा जाता है. इसके पीछे एक पूरा वैज्ञानिक सिस्टम काम करता है. दिल्लीवालों के घर तक पानी पहुंचने से पहले इसे एडवांस तकनीक और जटिल वाटर ट्रीटमेंट प्रोसेस से गुजारा जाता है. दिल्ली जल बोर्ड ने खुद यह पूरी प्रक्रिया बताई है. आइए बताते हैं कि दिल्ली जल बोर्ड गंगा-यमुना नदी से आना वाला पानी कैसे शुद्ध करते आपके घर तक पहुंचाता है.
6 स्टेप्स से गुजरता है पानी
दिल्ली जल बोर्ड ने अपने एक प्लांट 'भागीरथी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट' का वीडियो शेयर किया है. ईस्ट और नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के एक बड़े हिस्से की प्यास बुझाने वाला यह प्लांट रोजाना लगभग 110 मिलियन गैलन रॉ वॉटर को ट्रीट करने के लिए डिजाइन किया गया है. भागीरथी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में अपर गंगा कैनाल से गंगाजल आता है. गंगाजल को पीने योग्य बनाने के लिए 6 कड़े इम्तिहानों से गुजरना पड़ता है.
क्या आप जानते हैं कि आपके घरों तक पहुंचने वाला शुद्ध पेयजल कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं से होकर गुजरता है?
— Delhi Jal Board (@DelhiJalBoard) May 21, 2026
भगीरथी WTP में पानी को कई चरणों में शुद्ध किया जाता है ताकि उसमें मौजूद अशुद्धियां, गंदगी और हानिकारक कणों को हटाकर उसे पीने योग्य बनाया जा सके।
यही प्रक्रिया सुनिश्चित करती… pic.twitter.com/2u3CyvCX0z
1. बाइफर्केशन चैंबर में होती है स्क्रीनिंग
मुरादनगर से आया रॉ वाटर सबसे पहले बाइफर्केशन चैंबर में पहुंचता है. यहां पानी में तैरते बड़े कचरे, पत्तियों और अशुद्धियों को मेकेनिकल बार स्क्रीन की मदद से छानकर अलग कर दिया जाता है.

2. फ्लैश मिक्सर
इसके बाद पानी फ्लैश मिक्सर में जाता है. यहां पानी में एलम यानी फिटकरी और PAC यानी पॉली एल्युमिनियम क्लोराइड जैसे केमिकल्स मिलाए जाते हैं. यह केमिकल्स पानी में मौजूद मिट्टी और गंदगी के बेहद छोटे-छोटे कणों को आपस में चिपकाकर भारी बना देते हैं.
3. क्लैरी-फ्लोकुलेटर
केमिकल मिलने के बाद पानी क्लैरी-फ्लोकुलेटर टैंक में पहुंचता है. यहां पानी को थोड़ा स्थिर किया जाता है, जिससे गंदगी के भारी हो चुके कण यानी फ्लॉक्स भारी होकर नीचे बैठ जाते हैं और ऊपर का साफ पानी आगे की प्रक्रिया के लिए भेज दिया जाता है.

4. फिल्टर हाउस
ऊपरी सतह का साफ पानी इसके बाद फिल्टर हाउस में जाता है.यहां रैपिड सैंड फिल्टर्स के जरिए पानी की बची-खुची बेहद बारीक अशुद्धियों को भी पूरी तरह हटा दिया जाता है.
5. हाई-प्रेशर पंपिंग और सप्लाई
इस पूरी वैज्ञानिक प्रक्रिया से गुजरकर शुद्ध और कीटाणुमुक्त हुआ पानी बड़े-बड़े पंप्स की मदद से दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में सप्लाई किया जाता है.

6. क्लोरीनेशन
पूरी तरह फिल्टर होने के बाद पानी में नियंत्रित मात्रा में क्लोरीन मिलाई जाती है. क्लोरीन पानी में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया और कीटाणुओं को खत्म करके उसे बिल्कुल सुरक्षित बनाती है. ताकि हर घर तक सुरक्षित पानी पहुंच सके.

प्लांट पर निगरानी भी की जाती है
दिल्ली जल बोर्ड के अनुसार, भागीरथी प्लांट सिर्फ पानी साफ ही नहीं करता, बल्कि इसकी निगरानी और संसाधनों की बचत के लिए ग्लोबल स्टैंडर्ड्स को फॉलो करता है. यहां पानी की बचत का भी पूरा ध्यान रखा जाता है. ट्रीटमेंट प्रक्रिया के दौरान जो पानी बैकवॉश या सफाई में इस्तेमाल होता है, उसे रीसायकल प्रोसेस के जरिए दोबारा सिस्टम में लाकर उपयोग में लिया जाता है.
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