- मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन के ट्रैक में जापानी तकनीक पर आधारित J-Slab बैलास्टलेस सिस्टम हा हो रहा इस्तेमाल
- बुलेट ट्रेन का ट्रैक कंक्रीट पर आधारित होता है, जिसमें गिट्टी और पत्थर का इस्तेमाल नहीं होता है
- ट्रैक बिछाने के लिए एडवांस मशीनों जैसे फ्लैश बट वेल्डिंग मशीन और ट्रैक स्लैब लेइंग कार का इस्तेमाल
भारत में बुलेट ट्रेन का सपना अब पटरियों पर उतरने लगा है. मुंबई से अहमदाबाद के बीच बुलेट ट्रेन के रूट को तैयार किया जा रहा है. गुजरात में बुलेट ट्रेन के वायाडक्ट पर विश्व-स्तरीय J-Slab बैलास्टलेस ट्रैक सिस्टम लगाने का काम अपनी पूरी रफ्तार में है. ये रेलवे ट्रैक आम नहीं बल्कि बेहद खास है. जहां नॉर्मल रेलवे ट्रैक गिट्टी और पत्थर पर बनाया जाता है नहीं बुलेट ट्रेन का पूरा ट्रैक कंक्रीट पर ही बनाया जा रहा है. आखिर बुलेट ट्रेन कै ट्रैक कैसे तैयार हो रहा है? आइए बताते हैं.
कैसा है बुलेट ट्रेन का ट्रैक?
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन का ट्रैक नॉर्मल रेलवे ट्रैक से बिल्कुल अलग है. इसमें पत्थरों यानी गिट्टी का इस्तेमाल नहीं हो रहा है, बल्कि जापानी शिनकानसेन तकनीक पर आधारित J-Slab बैलास्टलेस ट्रैक सिस्टम का उपयोग किया जा रहा है. यह ट्रैक मुख्य रूप से चार परतों में तैयार होता है.
- RC ट्रैक बेड: वायाडक्ट यानी पुल के ऊपर सबसे पहले 300 mm मोटा और 2420 mm चौड़ा कंक्रीट का आधार बनाया जाता है. इसमें RC एंकर भी लगाए जाते हैं ताकि ट्रैक हिले नहीं.
- प्रीकास्ट ट्रैक स्लैब: इसके ऊपर फैक्ट्री में बने कंक्रीट के बड़े स्लैब बिछाए जाते हैं. गुजरात के किम और आणंद में स्थित मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स में ये स्लैब तैयार हो रहे हैं.
- सीमेंट एस्फाल्ट मोर्टार (CAM): स्लैब और ट्रैक बेड के बीच करीब 50 mm की खाली जगह में यह खास मिश्रण भरा जाता है. यह झटकों और कंपन को सोख लेता है, जिससे 320 किमी/घंटा की रफ़्तार में भी बिल्कुल हलचल नहीं होती.
- रेल और फास्टनर्स: लास्ट में पटरियों को स्लैब के ऊपर खास फास्टनर्स की मदद से सटीक तरीके से लगाया जाता है.
VIDEO | Track installation is advancing rapidly on the Mumbai–Ahmedabad Bullet Train viaduct, with the National High Speed Rail Corporation Limited deploying Japan's Shinkansen-based J-Slab ballastless track system in India for the first time. Supported by advanced manufacturing… pic.twitter.com/gbErwl7sjU
— Press Trust of India (@PTI_News) April 23, 2026
ट्रैक बिछाने वाली मशीनें भी बेहद खास
बुलेट ट्रेन का ट्रैक बिछाने का काम एडवांस मशीनों द्वारा किया जा रहा है. इसमें फ्लैश बट वेल्डिंग मशीन यानी FBWM का इस्तेमाल होता है. यह मशीन 25 मीटर लंबी पटरियों को जोड़कर 200 मीटर लंबे पैनल बनाती है. वहीं ट्रैक स्लैब लेइंग कार के जरिए एक साथ 5 स्लैब उठाकर उन्हें सही जगह पर रख सकते हैं. यह एक तरह की क्रेन ही होती है. इसके बाद रेल फीडर कार के जरिए 200 मीटर लंबी पटरियों को ट्रैक बेड पर बिछाने का काम किया जाता है. NHSRCL के अनुसार, गुजरात में अब तक 185 किमी से ज्यादा का ट्रैक बेड तैयार किया जा चुका है.
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