- भारत Rare Earth Minerals के रिजर्व में पांचवें स्थान पर है लेकिन उत्पादन में इसका हिस्सा एक प्रतिशत से कम है.
- झारखंड के कोडरमा और बिहार के नवादा जिलों में Rare Earth Minerals की संभावना तलाशने के लिए सर्वे कार्य जारी है.
- परमाणु खनिज निदेशालय जी4 स्तर का भूगर्भीय, रेडियोमैट्रिक सर्वेक्षण कर इन खनिजों की मौजूदगी की जांच कर रहा है.
Rare Earth Minerals के रिजर्व के मामले में भारत का स्थान तो पांचवां है. लेकिन वैश्विक उत्पादन में उसका हिस्सा एक फीसदी से भी कम है. दुनिया भर में इस मामले में चीन का दबदबा है और भारत को भी ऐसे मिनरल्स के लिए चीन और बाकी देशों पर निर्भर रहना पड़ता है. भारत अपनी जरूरत का 80 से 90 फीसदी आयात करता है.
लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में सरकार ने बड़ी जानकारी दी है. बीजेपी सांसद विवेक ठाकुर के एक सवाल के जवाब में परमाणु ऊर्जा मंत्रालय में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि झारखंड के कोडरमा जिले और उससे सटे बिहार के नवादा ज़िले में महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज की संभावना तलाशने के लिए सर्वे का काम चल रहा है. इसमें वैसे खनिज भी शामिल हैं जिन्हें Rare Earth Minerals माना जा रहा है. अगर सर्वे में इन खनिजों के मौजूद रहने का संकेत मिलता है तो खनन का काम जल्द शुरू किया जाएगा.
लिखित जवाब के मुताबिक परमाणु ऊर्जा विभाग के तहत आने वाले परमाणु खनिज निदेशालय इन इलाकों में जी4 स्तर का भूगर्भीय और रेडियोमैट्रिक सर्वे करा रहा है. अगर इन इलाकों में Rare Earth Minerals की मौजूदगी पता चलता है तो ये भारत के लिए बड़ी खबर होगी क्योंकि दुनिया भर में Rare Earth Minerals को लेकर जद्दोजेहद लागतार चल रही है.
फिलहाल Rare Earth Minerals के मामले में चीन का दबदबा है जिसके पास प्रसंस्कृत खनिज का दुनिया का क़रीब 90 फ़ीसदी खज़ाना मौजूद है. Rare Earth Minerals के रिजर्व के मामले में भारत का स्थान तो पांचवां है. लेकिन वैश्विक उत्पादन में उसका हिस्सा एक फीसदी से भी कम है. ऐस में भारत को भी ऐसे मिनरल्स के लिए चीन और बाक़ी देशों पर निर्भर रहना पड़ता है. इसका एक उदाहरण पिछले साल देखने को मिला था जब व्यापार के एक विवाद का मामला सामने आने पर चीन ने इन दुर्लभ खनिजों का निर्यात बंद कर दिया था, जिसका असर भारत के कार निर्माताओं पर पड़ा था. ख़ासकर इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग पर इसका भारी असर देखने को मिला था. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार इन दुर्लभ खनिजों के बारे में बोलते रहे हैं और अमेरिका को इसकी सख़्त ज़रूरत है.
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