- पूर्व आर्मी चीफ नरवणे की नई किताब का विमोचन पुणे में हुआ जिसमें उन्होंने भारत की चुनौतियों पर चर्चा की.
- नरवणे ने कहा कि पाकिस्तान से तत्काल खतरा आतंकवाद के कारण है जबकि दीर्घकाल में चीन भारत का प्रतिस्पर्धी बनेगा.
- उन्होंने चीन के साथ मतभेदों को बातचीत से सुलझाने और मजबूत सैन्य तैयारी बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया.
भारत के पूर्व आर्मी चीफ मनोज मुकुंद नरवणे फिर अपनी एक किताब के कारण सुर्खियों में हैं. इससे पहले उन्हीं की एक किताब 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' के कारण संसद के बजट सत्र में भारी गतिरोध मचा था. लेकिन इस बार एमएम नरवणे की चर्चा की वजह उनके एक किताब का विमोचन है. अपनी किताब के विमोचन के मौके पर पूर्व आर्मी चीफ एमएम नरवणे ने भारत की चुनौतियों पर डिटेल से बातचीत की. इस मौके पर नरवणे ने कहा कि भारत के लिए असल चुनौती पाकिस्तान नहीं चीन है. उन्होंने अपने बयान में यह भी कहा कि यदि आप शांति चाहते हैं तो युद्ध के लिए तैयार रहिए.
पूर्व आर्मी चीफ नरवणे की नई किताब का विमोचन
दरअसल गुरुवार को भारत के पूर्व आर्मी चीफ एमएम नरवणे की कई किताब ‘द क्यूरियस एंड द क्लासिफाइड: अनअर्थिंग मिलिट्री मिथ्स एंड मिस्ट्रीज' का पुणे में विमोचन हुआ. इस मौके पर उन्होंने आतंकवाद के लगातार खतरे के कारण भारत का ध्यान काफी हद तक पाकिस्तान पर केंद्रित रहा है, लेकिन दीर्घकाल में चीन कई क्षेत्रों में भारत का मुख्य प्रतिस्पर्धी बनने जा रहा है.
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चीन के लिए ‘दुश्मन' शब्द का इस्तेमाल करने से बचते हुए नरवणे ने कहा कि भारत को बीजिंग के साथ लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाने के साथ-साथ मजबूत सैन्य प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने की जरूरत है.
VIDEO | Maharashtra: General Manoj Mukund Naravane (Retired) launched the 'The Curious and the Classified: Unearthing Military Myths and Mysteries' event in Pune, hosted by entrepreneur and activist Praful Sarda.
— Press Trust of India (@PTI_News) August 20, 2026
(Full video available on PTI Videos - https://t.co/d8jp61yd2p) pic.twitter.com/uknX76lNsA
चीन-पाकिस्तान दोनों अलग तरह की चुनौती पेश करते हैंः नरवणे
नवरणे ने इस मौके पर कहा कि भारत ने पाकिस्तान और चीन दोनों के साथ युद्ध लड़े हैं. दोनों के साथ सीमाओं का विवाद अभी भी अनसुलझा है. दोनों देश अलग-अलग तरह की चुनौती पेश करते हैं. नरवणे ने कहा, ‘‘पाकिस्तान और चीन पूरी तरह से अलग हैं. हमने दोनों के साथ युद्ध लड़े हैं. हमारी सीमाएं को लेकर विवाद अनसुलझे हैं. इसलिए वे हमेशा खतरे और चुनौती के रूप में हमारे रडार पर रहेंगे.''
नरवणे ने कहा कि पाकिस्तान से तत्काल खतरा मुख्य रूप से आतंकवाद के लगातार बने रहने के कारण है, जबकि आने वाले वर्षों में चीन के भारत का मुख्य प्रतिस्पर्धी बनने की संभावना है.
लंबे समय चीन भारत का मुख्य प्रतिस्पर्धी होगाः नरवणे
पूर्व आर्मी चीफ ने कहा, ‘‘हमने पाकिस्तान के साथ बड़े युद्ध लड़े हैं और आतंकवाद को उसके लगातार समर्थन के कारण हमारा ध्यान पश्चिमी सीमा पर रहता है. लेकिन मुझे लगता है कि हम बहुत स्पष्ट हैं कि आने वाले वर्षों में और दीर्घकाल में चीन हमारा मुख्य प्रतिस्पर्धी बनने जा रहा है. और मैं जानबूझकर ‘प्रतिस्पर्धी' शब्द का इस्तेमाल कर रहा हूं, ‘शत्रु' का नहीं.''
नरवणे ने कहा कि चीन राजनीति, अर्थव्यवस्था, व्यापार और सैन्य मामलों सहित कई क्षेत्रों में भारत के साथ प्रतिस्पर्धा करेगा. मालूम हो कि नरवणे 31 दिसंबर 2019 से 30 अप्रैल, 2022 तक सेना अध्यक्ष रहे थे.
'बल प्रयोग आखिरी विकल्प, लेकिन शांति के लिए युद्ध की तैयारी जरूरी'
उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारत को ताकत का इस्तेमाल करने के बजाय बातचीत और कूटनीतिक माध्यमों से चीन के साथ मतभेद सुलझाने का प्रयास करना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘‘बल प्रयोग का सहारा लेना हमेशा आखिरी प्राथमिकता होनी चाहिए. साथ ही उन्होंने कहा कि भारत को किसी भी संभावित दुस्साहस को रोकने के लिए विश्वसनीय सैन्य तैयारी बनाए रखनी चाहिए. उन्होंने कहा कि यदि आप शांति चाहते हैं तो युद्ध के लिए तैयार रहिए.
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