विज्ञापन

'कुत्ता कब काटने के मूड में कैसे पता चलेगा'? सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों पर हुई दिलचस्प सुनवाई

जस्टिस नाथ ने कहा कि समस्या केवल कुत्तों के काटने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनका लोगों का पीछा करना भी उतना ही खतरनाक है. इस पर कपिल सिब्बल ने कहा कि हर कुत्ता ऐसा नहीं करता और जरूरी है कि ऐसे कुत्तों की पहचान की जाए. इस पर जस्टिस नाथ ने टिप्पणी की, “आप कैसे पहचान करेंगे कि कौन सा कुत्ता किस मूड में है?”

'कुत्ता कब काटने के मूड में कैसे पता चलेगा'? सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों पर हुई दिलचस्प सुनवाई
आवारा कुत्तों को शेल्टर में रखे जाने के मामले पर बीते दिनों खूब बवाल मचा था.
  • सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के काटने और दोपहिया वाहन चालकों का पीछा करने की घटनाओं पर गंभीर चिंता जताई.
  • न्यायाधीशों ने कुत्तों को समझाने और उनकी मानसिक स्थिति पहचानने की चुनौती पर सवाल उठाए.
  • अदालत ने कुत्तों को मारने के बजाय सड़कों और गलियों से मुक्त रखने के ठोस उपायों की आवश्यकता बताई.
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।
नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आवारा कुत्तों के मुद्दे पर सुनवाई के दौरान जज और वकील के बीच दिलचस्प बहस देखने को मिली. सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि “किसी को कुत्तों को भी समझाना चाहिए कि वे लोगों को न काटें, क्योंकि कोई भी यह नहीं जान सकता कि कोई कुत्ता कब काटने के “मूड” में होगा." मामले की सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की पीठ कर रही थी. सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि कुत्तों के काटने की ही नहीं, बल्कि उनके द्वारा दोपहिया वाहन चालकों और साइकिल सवारों का पीछा करने से भी गंभीर दुर्घटनाओं का खतरा पैदा होता है.

जज ने कपिल सिब्बल से पूछा- क्या कभी बाइक पर चले हैं

आवारा कुत्तों के हमले पर चिंता जताते हुए अदालत ने कहा- “जब कुत्ते सड़कों पर दौड़ते हैं तो यह विशेष रूप से दोपहिया वाहन चालकों और साइकिल सवारों के लिए बेहद खतरनाक है." इस टिप्पणी के बाद जस्टिस नाथ ने वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल से पूछा. क्या आप कभी दोपहिया वाहन पर चले हैं?” जस्टिस के इस सवाल पर कपिल सिब्बल ने कहा कि उन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में दोपहिया वाहन चलाया है.

Latest and Breaking News on NDTV

कैसे पहचान करेंगे कि कौन सा कुत्ता कब किस मूड में है?

जस्टिस नाथ ने कहा कि समस्या केवल कुत्तों के काटने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनका लोगों का पीछा करना भी उतना ही खतरनाक है. इस पर कपिल सिब्बल ने कहा कि हर कुत्ता ऐसा नहीं करता और जरूरी है कि ऐसे कुत्तों की पहचान की जाए. इस पर जस्टिस नाथ ने टिप्पणी की, “आप कैसे पहचान करेंगे कि कौन सा कुत्ता किस मूड में है?”

'कुत्तों को शेल्टर में भेजना क्या समाधान'

सिब्बल ने सवाल उठाया कि क्या समाधान यह है कि सभी कुत्तों को शेल्टर भेज दिया जाए. इस पर पीठ ने कहा कि सड़कों और गलियों को कुत्तों से मुक्त रखने के लिए कोई ठोस अभ्यास किया जाना चाहिए. सुनवाई के दौरान सिब्बल ने कहा कि कुत्ते परिसरों में भी रहते हैं, विश्वविद्यालयों में भी रहते हैं और उन्हें कभी किसी ने नुकसान नहीं पहुंचाया.

'अदालत नहीं कह रही कि कुत्तों को हटा दिया जाए'

उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) का उदाहरण दिया. इस पर जस्टिस संदीप मेहता ने कहा, “आप गंभीर हैं? आपकी जानकारी पुरानी है,” और बताया कि नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी, बेंगलुरु में कुत्तों के हमलों की कई घटनाएं सामने आई हैं. जस्टिस नाथ ने स्पष्ट किया कि अदालत यह नहीं कह रही है कि कुत्तों को हटाकर मार दिया जाए.

Latest and Breaking News on NDTV

'शेल्टर में कुत्तों को कैदियों से भी खराब मिलता है खाना'

जस्टिस नाथ ने कहा, “कोई यह नहीं कह रहा कि कुत्तों को हटाकर गोली मार दी जाए. सड़कों को कुत्तों से मुक्त करना ज़रूरी है.” कपिल सिब्बल ने कुत्तों को शेल्टर भेजने का विरोध करते हुए कहा कि शेल्टर में उन्हें जो खाना मिलता है, वह तिहाड़ जेल के कैदियों से भी खराब होता है. इस पर पीठ ने कहा कि एनजीओ शेल्टर में भोजन उपलब्ध कराते हैं.

'अब केवल यही बचा है कि कुत्तों को भी काउंसलिंग दी जाए'

सिब्बल ने जवाब दिया कि 1.5 करोड़ कुत्तों के लिए यह संभव नहीं है. जस्टिस मेहता ने कहा कि यदि एनजीओ वास्तव में चिंतित हैं, तो वे ऐसा करेंगे. जस्टिस संदीप मेहता ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, “अब केवल यही बचा है कि कुत्तों को भी काउंसलिंग दी जाए कि उन्हें दोबारा छोड़े जाने के बाद काटना नहीं है."

हल्के-फुल्के अंदाज में अदालत में हुई दिलचस्प सुनवाई

इस पर सिब्बल ने कहा कि यह टिप्पणी हल्के-फुल्के अंदाज़ में है और उन्हें भरोसा है कि अदालत ऐसा वास्तव में नहीं कह रही है. पीठ ने यह भी कहा कि संस्थान सड़क नहीं हैं और सवाल किया कि अदालत परिसरों, विश्वविद्यालयों और अन्य संस्थानों में कुत्तों की मौजूदगी क्यों होनी चाहिए?

अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि जब नियम कहते हैं कि कुत्तों को पकड़ने के बाद उसी इलाके में छोड़ा जाए, तो संस्थानों को कुत्तामुक्त कैसे रखा जाएगा?

7 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने कुत्तों को शेल्टर में भेजने का दिया था निर्देश

गौरतलब है कि 7 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, खेल परिसरों, बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों जैसे संस्थागत क्षेत्रों में कुत्तों के काटने की बढ़ती घटनाओं को लेकर चिंता जताते हुए सार्वजनिक सुरक्षा और स्वास्थ्य के हित में ऐसे कुत्तों को चिन्हित शेल्टर में भेजने के निर्देश दिए थे.

Latest and Breaking News on NDTV

यह मामला 28 जुलाई 2025 को मीडिया रिपोर्ट के आधार पर स्वतः संज्ञान लेकर शुरू किया गया था, जिसमें दिल्ली में बच्चों सहित कई लोगों की रैबीज़ से मौत का ज़िक्र था. बाद में अदालत ने इस मामले का दायरा दिल्ली-एनसीआर से आगे बढ़ाते हुए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पक्षकार बनाया.

विरोध में सड़कों पर उतर गए थे लोग

कोर्ट के आदेश के बाद कुत्तों को लेकर कुछ दिनों तक भ्रम की स्थिति हुई थी. इस बीच राजधानी दिल्ली में बड़ी संख्या में डॉग लवर विरोध करने लगे थे. जिसके बाद कुत्तों को शेल्टर में भेजने के आदेश में बदलाव हुआ था. अब मंगलवार को सर्वोच्च अदालत में इस मामले में सुनवाई हुई.

यह भी पढ़ें - आवारा कुत्तों पर सुनवाई के दौरान ऐसा क्या हुआ कि सुप्रीम कोर्ट ने कपिल सिब्बल को सुना दिया?

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com