विज्ञापन
This Article is From Apr 23, 2026

बंगाल चुनाव में 'काबा-मदीना' गाने पर क्यों हो रहा है विवाद, राजनीति में कैसे आईं सायनी घोष

जादवपुर से तृणमूल कांग्रेस की सांसद सायनी घोष इन दिनों बंगाल चुनाव में छाई हुई हैं. वह अपनी चुनावी रैलियों में दिल में है काबा और आंखों में मदीना गाना गा रही हैं. इस गाने को लेकर बीजेपी आपत्ति जता रही है.

बंगाल चुनाव में 'काबा-मदीना' गाने पर क्यों हो रहा है विवाद, राजनीति में कैसे आईं सायनी घोष
नई दिल्ली:

हृदय मा छे काबा और नयने मदीना... यानी दिल में काबा और आंखों में मदीना. यह लोकगीत आजकल पश्चिम बंगाल चुनाव में खूब गाया जा रहा है. इसे गा रही हैं तृणमूल कांग्रेस की सांसद सायनी घोष. वो अपनी चुनावी जनसभाओं में इस गीत को गुनगुना रही हैं. उनके इस गीत पर सभा में मौजूद जनता भी उनका साथ देती है. उनका यह गाना बंगाल चुनाव में वायरल हो गया है. सायनी घोष को लोग जूनियर ममता बता रहे हैं. इस गीत को गाकर सायनी घोष बीजेपी नेताओं के निशाने पर आ गई हैं. बीजेपी नेता इसे सांप्रदायिक बताकर उनकी आलोचना कर रहे हैं.

हृदय मा छे काबा... पर राजनीति

घोष जिस लोकगीत को गा रही हैं, उसे लिखा है बांग्लादेश के मशहूर कवि अब्दुल रहमान बोयाती. अविभाजित बंगाल में 1939 में पैदा हुए बायोती का 2013 में निधन हो गया था. उनके इस लोकगीत को बहुत से गायकों को बहुत से गायकों ने आवाज दी है.अभिनेत्री से नेता बनी घोष ने इस लोकगीत को गाकर राजनीतिक सनसनी फैला दी है. उनके इस गानों को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निशाने पर लिया. बंगाल की एक चुनावी सभा में योगी आदित्यनाथ ने कहा,'' उनकी एक सांसद दिल में काबा और नयन में मदीना, की घोषणा करती हैं. मैं उनसे कहना चाहता हूं कि हमारे दिल में महाकाली और नयनों में चैतन्य महाप्रभु का वास है.'' सायनी घोष पर हमला करने वाले योगी आदित्यनाथ अकेले बीजेपी नेता नहीं हैं. केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह भी इस गाने के लिए घोष पर निशाना साध चुके हैं.

Latest and Breaking News on NDTV

बंगाल की राजनीति में इस गाने पर विवाद कोई नई बात नहीं है. इससे पहले 2025 में कोलकाता के एक दुर्गा पूजा पांडाल में तृणमूल कांग्रेस के नेता मदन मित्रा ने भी इस गाने को गाया था.इसके बाद बीजेपी ने आरोप लगाया कि यह गाना सुनकर वहां मौजूद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ताली बजाई थी. बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने ममता को सनातन विरोधी बताया था. उन्होंने कहा था कि पश्चिम बंगाल में सनातन को कुचला जा रहा है. अब विधानसभा चुनाव तृणमूल कांग्रेस इस लोकगीत का इस्तेमाल अल्पसंख्यक वोटों को रिझाने के लिए कर रही है. 

सायनी घोष की राजनीतिक पारी

सायनी घोष फिल्म की दुनिया से राजनीति में आई हैं.सायनी ने अपने फिल्मी करियर की शुरूआत बांग्ला टेलीफिल्म 'इच्चे दाना' से की थी. पश्चिम बंगाल में सरकार चला रही तृणमूल कांग्रेस ने 2021 के विधानसभा चुनाव में उन्हें आसनसोल दक्षिण सीट से उम्मीदवार बनाया था. यह उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत थी.आसनसोल दक्षिण  में उनका मुकाबला बीजेपी की वरिष्ठ नेता अग्निमित्रा पॉल से हुआ.लेकिन घोष एक कड़े मुकाबले में करीब साढ़े चार हजार वोट से यह चुनाव हार गई थीं. लेकिन उनकी प्रचार शैली ने लोगों और पार्टी को प्रभावित किया. विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद उन्हें पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक मुखर्जी की जगह सायनी घोष को तृणमूल की युवा शाखा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया.

जब 2024 में लोकसभा का चुनाव आया तो तृणमूल कांग्रेस ने उन्हें कोलकाता के जादवपुर सीट से उम्मीदवार बना दिया. वहां उन्होंने बीजेपी के डॉक्टर अनिर्बान गांगुली को ढाई लाख से अधिक वोटों के विशाल अंतर से हराया था. इससे पहले 2019 के चुनाव में इस सीट पर तृणमूल कांग्रेस की मिमी चक्रवर्ती ने बीजेपी को हराकर जीत हासिल की थी.सायनी की तरह मिमी भी फिल्मों से ही राजनीति में आई थीं. 

 संसद में सायनी घोष 

ऐसा नहीं है कि केवल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान ही सायनी घोष के वीडियो वायरल हो रहे हैं. भाषण के अनोखे और चुटीले अंदाज की वजह से संसद में दिए उनके भाषण भी काफी वायरल होते हैं. सदन में वो सरकार को घेरने का कोई भी मौका नहीं छोड़ती हैं. उनके भाषण देखते ही देखते वायरल हो जाते हैं. संसद में एक सांसद के रूप में भी उनका रिकॉर्ड काफी अच्छा है. उन्होंने अबतक 92 सवाल पूछे हैं और 10 बहसों में शामिल हुई हैं. वो संसद की दो कमेटियों की मेंबर हैं. वो संसद की कार्यवाही में भी हिस्सा लेती हैं. सांसद के तौर पर मिलने वाली सांसद निधि में सायनी घोष को अब तक 9.80 करोड़ रुपये मिले हैं, इनमें से उन्होंने अब तक 8.54 करोड़ रुपये के 215 काम की अनुशंसा कर दी है.  संसद की बेवसाइट के मुताबिक इनमें से 7.48 करोड़ रुपये के 196 काम को मंजूरी मिल चुकी है. इनमें से 63 काम अब तक मंजूर हो चुके हैं. 

इस बार के विधानसभा चुनाव के प्रचार में सायनी घोष की सभाओं में जमकर भीड़ आ रही है. वो महिलाओं से सहज रूप से मिलती नजर आ रही हैं. संसद में महिला आरक्षण पर सरकार की ओर से लाए गए विधेयकों के गिर जाने के वजह से बंगाल चुनाव में महिलाएं महत्वपूर्ण हो गईं हैं. बीजेपी और तृणमूल इस मुद्दे पर आमने-सामने हैं, इस लड़ाई में सफलता किसे मिलती है, इसके लिए हमें चार मई तक का इंतजार करना होगा, जब विधानसभा चुनाव के नतीजे आएंगे.

ये भी पढ़ें: NDTV Exclusive: लंबा संघर्ष, जीत मिलेगी.. बंगाल में कैसा होगा BJP का प्रदर्शन, पार्टी अध्यक्ष ने बताई पूरी बात

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Saayoni Ghosh, TMC, West Bengal
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com