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'200 साल से यहां रह रहे', दिल्ली यमुना बाजार में 310 परिवारों को बेदखली नोटिस मिलने पर क्या बोले लोग?

Delhi Yamuna Bazar Notice: दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने कश्मीरी गेट इलाके में यमुना बाजार के निवासियों को बेदखली नोटिस जारी किए. नोटिस के मुताबिक लोगों को क्षेत्र खाली करने के लिए 15 दिन समय दिया गया है. साथ ही चेतावनी दी गई है कि ऐसा न करने पर, ‘अतिक्रमण’ हटाने के लिए ध्वस्तीकरण अभियान चलाया जाएगा.

'200 साल से यहां रह रहे', दिल्ली यमुना बाजार में 310 परिवारों को बेदखली नोटिस मिलने पर क्या बोले लोग?
Delhi Yamuna Bazar Notice: बेदखली नोटिस मिलने के बाद यमुना बाजार के लोग परेशान हैं.
  • दिल्ली के यमुना बाजार इलाके में रहने वाले 310 परिवारों को 15 दिनों में घर खाली करने का नोटिस दिया है.
  • सरकार का कहना है कि यह इलाका डीडीए की जमीन पर अवैध कब्जा है और बाढ़ के दौरान यह सबसे पहले डूब जाता है
  • दूसरी ओर यमुना बाजार के स्थानीय निवासियों ने यहां 200 साल से रहने का दावा किया है.
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नई दिल्ली:

Delhi Yamuna Bazar Eviction Notice: दिल्ली के कश्मीरी गेट इलाके में यमुना बाजार में रह रहे 310 परिवार के लोगों की नींद उड़ गई है. यमुना किनारे निगम बोध घाट के पास इस बस्ती में 310 परिवार के सैकड़ों लोग रहते हैं. इन लोगों को दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से घर खाली करने का नोटिस करने मिला है. लोगों को 15 दिनों का समय दिया गया है. अब लोगों की चिंता यह है कि मात्र 15 दिन में वो अपना घर छोड़कर कहां जाएंगे. इस इलाके के ज्यादातर लोग श्मशान घाट पर कर्मकांड कराने वाले पुरोहित हैं. कुछ अन्य लोग भी है. इन लोगों का कहना है कि वो पीढ़ियों से यहां रहते आए हैं. 

DDMA ने 15 दिनों में घर खाली करने का दिया नोटिस

दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) ने गुरुवार को कश्मीरी गेट इलाके में यमुना बाजार के निवासियों को बेदखली नोटिस जारी किए. बेदखली नोटिस के मुताबिक निवासियों को अपना सामान हटाने और स्वेच्छा से क्षेत्र खाली करने के लिए 15 दिन समय दिया गया है. साथ ही चेतावनी दी गई है कि ऐसा न करने पर, ‘अतिक्रमण' हटाने के लिए ध्वस्तीकरण अभियान चलाया जाएगा.

नोटिस जारी होने के बीच निवासियों का कहना है कि उन्हें न केवल अपने घर खोने का डर है, बल्कि बेदखली के साथ सदियों से चली आ रही नदी तट की पूरी संस्कृति के लुप्त हो जाने का भी डर है. दूसरी ओर सरकार का कहना है कि यह दिल्ली का सबसे निचला इलाका है. यहां डीडीए की जमीन पर अवैध कब्जा किया गया था. बाढ़ आने पर सबसे पहले यह इलाका डूब जाता है.

DDMA द्वारा जारी किया गया नोटिस.

DDMA द्वारा जारी किया गया नोटिस.

पुरोहित सुनील शर्मा बोले- 200 साल से यहां रह रहा हमारा परिवार

यमुना बाजार के पास निगमबोध घाट पर पुरोहित सुनील शर्मा ने कहा, ‘‘मेरा परिवार लगभग 200 वर्षों से यहां रह रहा है, और हमारे पास ऐसे नक्शे और अभिलेख भी हैं जो एक सदी से अधिक समय से यहां हमारी उपस्थिति को प्रमाणित करते हैं. हमने अपने पूर्वजों से सुना है कि ये घाट कभी जाति के आधार पर विभाजित थे और परिवारों की यमुना से जुड़ी अपनी पारंपरिक भूमिकाएं थीं.''

शर्मा ने बताया कि उनका परिवार घाटों के पास ही पुरोहित के रूप में यमुना की आरती करता है, निगमबोध घाट पर अंतिम संस्कार कराता है और नदी से जुड़े अन्य अनुष्ठान करता है.

महिला बोलीं- दशकों से यहां रहता आया है परिवार

निगम बोध घाट की सातवीं पीढ़ी की निवासी पुष्पा रानी ने बताया कि उनका परिवार दशकों से यहीं रह रहा है. पिछले दो सालों में ही यमुना का जलस्तर खतरनाक रूप से बढ़ा है, जिसके कारण उन्हें अपना सामान घरों की छतों या अन्य सुरक्षित जगहों पर ले जाना पड़ा है. उन्होंने आगे कहा कि 15 दिनों के भीतर इस जगह को खाली करना बेहद मुश्किल काम है. यहां के बच्चे पास के ही स्कूलों में पढ़ने जाते हैं, और घर के पुरुष सदस्य घाट पर पंडित का काम करते हैं; इस तरह, उनका जीवन कई मायनों में यमुना से ही जुड़ा हुआ है. उनका कहना है कि लोगों को बेदखल करने से पहले, सरकार को सबसे पहले यमुना के पुनरुद्धार (साफ़-सफ़ाई और सुधार) पर ध्यान देना चाहिए.

स्थानीय विधायक के साथ उपराज्यपाल से मिलेंगे लोग

घाट की देख-रेख करने वाले 10 सदस्यों के एक परिवार से ताल्लुक रखने वाले भारत लाल शर्मा (78) ने सरकार से बेहतर पुनर्वास की मांग की है. उन्होंने बताया कि कल, स्थानीय निवासी MLA परमजीत सैनी के साथ मिलकर उपराज्यपाल (Lieutenant Governor) से मुलाक़ात करेंगे, ताकि दिल्ली सरकार के इस आदेश के संबंध में अपनी चिंताओं और मुद्दों को उनके सामने रख सकें.
 

नोटिस दिखाते यमुना बाजार के स्थानीय निवासी.

नोटिस दिखाते यमुना बाजार के स्थानीय निवासी.

'60 परिवार ऐसे, जिनका इतिहास 100 साल से अधिक पुराना'

उन्होंने कहा, ‘‘यह सिर्फ हमारे लिए एक जगह नहीं है, यह हमारी और शहर की विरासत है.'' सुनील शर्मा, जो यमुना घाट पंडा एसोसिएशन से भी जुड़े हुए हैं. उन्होंने कहा कि लगभग 60 परिवार ऐसे हैं जिनका इतिहास 100 साल से भी अधिक पुराना है और वे अब भी इस क्षेत्र से जुड़े हुए हैं.

एक स्थानीय ने अकबर के समय से जोड़ा इतिहास

नदी किनारे जीवनरक्षक के तौर पर काम करने वाले स्थानीय निवासी सुरेंद्र (47) ने बताया कि यमुना से उनके परिवार का रिश्ता पीढ़ियों पुराना है. उन्होंने कहा, ‘‘हमारे पूर्वज हमें बताते थे कि हमारा परिवार राजा अकबर के समय से यहां रह रहा है और हमारे पास कम से कम 150 वर्षों से यहां हमारी उपस्थिति के प्रमाण हैं. मेरे पिता पूरे देश में प्रसिद्ध हो गए थे, क्योंकि उन्होंने दिल्ली से मथुरा तक तैरकर यात्रा की थी, जो उस समय कोई और नहीं कर सकता था.''

नीली छतरी मंदिर का ऐतिहासिक महत्व

इस क्षेत्र के इतिहास के संबंध में, इतिहासकार स्वप्ना लिडल ने कहा कि निगमबोध घाट के पास स्थित नीली छतरी मंदिर का ऐतिहासिक महत्व बहुत अधिक है और इस स्थल के आसपास लंबे समय से मानवीय गतिविधियों का प्रमाण है. उन्होंने कहा, ‘‘निगमबोध घाट के पास स्थित नीली छतरी मंदिर एक बहुत प्राचीन स्थल है. इस क्षेत्र से जुड़े सबसे पुराने ठोस ऐतिहासिक प्रमाण मुगल काल के हैं.''

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