- दिल्ली के यमुना नदी पर बना 150 साल पुराना पुराना लोहा पुल बंद होने जा रहा है और नया पुल उसकी जगह लेगा
- नया लोहा पुल 865 मीटर लंबा है और आधुनिक तकनीक से बना है जो भारी और तेज रफ्तार ट्रेनों को सहन कर सकता है
- पुराने पुल का निर्माण 1866 में हुआ था और यह डबल-डेकर पुल था जिसमें ऊपर रेलवे और नीचे सड़क थी
Delhi Old Loha Bridge: दिल्ली का ऐतिहासिक पुराना लोहा पुल अब जल्द ही इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाएगा. यमुना नदी पर बने 150 साल पुराने इस पुल को बंद करने की तैयारी शुरू हो गई है. देश की राजधानी का पहचान रहा ये पुल किसी जमाने में दिल्ली हावड़ा रूट का मुख्य पुल हुआ करता था लेकिन अब इसकी जगह नया 249 नंबर का लोहा पुल लेने जा रहा है. दिल्ली के यमुना नदी पर बने नए लोहा पुल को मुख्य नेटवर्क से जोड़ दिया गया है. मंगलवार (17 मार्च) से पुल पर ट्रायल रन के लिए एक ईएमयू गाड़ी को दौड़ाया गया, जो सफल रहा. अब आने वाले समय में ऐसे और भी गाड़ियों की टेस्टिंग होगी,ताकि सभी सिस्टम की ठीक से जांच-पड़ताल की जा सके.
नए पुल पर शुरू हुआ ट्रायल
उत्तर रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पिछले वर्ष दिसंबर माह में रेलवे सुरक्षा आयुक्त ने पुल का निरीक्षण किया था. इसके बाद अब ट्रायल शुरू किया गया है ताकि उद्घाटन से पहले सभी सिस्टम की जांच की सके. अधिकारी के अनुसार अभी भी पुराना पुल चालू है और उसी से गाड़ियों का आवागमन पुरानी दिल्ली स्टेशन पर हो रहा है. पुराने पुल की एक लाइन अभी भी ट्रेनों की आवाजाही के लिए चालू है.
पुराना लोहा पुल क्यों है खास?
आने वाले वक्त यह लोह पुल सिर्फ किताबों किस्से और कहानियों में सुना जाएगा. 150 साल पुराना यह पुल 1866 में बनकर तैयार हुआ था. पुरानी दिल्ली को पूर्वी दिल्ली से जोड़ने वाला 850 मीटर लंबे इस पुल को बनने में 3 वर्ष लगे थे. यह एक डबल-डेकर पुल है, जिसमें ऊपरी हिस्से पर रेलवे लाइन और निचले हिस्से पर सड़क है. इस पुल को हेरिटेज पुल का दर्जा प्राप्त है. यह शुरुआत में सिर्फ सिंगल लाइन लेकिन वर्ष 1933 में इसे डबल लाइन किया गया था. इस पुल की विशेष बात है कि यह दिल्ली के एक दूसरे लैंडमार्क लाल किला से सटा हुआ है.

old loha pul
सवा सोलह लाख रुपए हुए खर्च
अहम बात यह है कि इस पुल के निर्माण से पहले कोलकाता और लाहौर से यहां आने वाले नदी मार्ग से पहुंचते थे. इसका निर्माण कोलकाता की ब्रेलवाइथ एंड कंपनी इंडिया लिमिटेड ने किया था. पुल में लगी लोहे के गार्डरों को प्री-कास्ट कर इंग्लैंड से लाकर यहां जोड़कर पुल बनाया गया था. जानकारी के अनुसार, पुल निर्माण में लगभग सवा सोलह लाख रुपए की कुल लागत आई थी.
बाढ़ में पुल के ऊपर आया पानी
साल 1978 में जब दिल्ली में भीषण बाढ़ आई थी तो उस वक्त यमुना नदी का पानी इसके ऊपर से बहने लगा था. इसके आसपास की तमाम बस्तियां डूब गई थीं. उसके बाद से ही दिल्ली में बाढ़ की तबाही का यह एक तरीके से मानक बन गया. यह पुल यमुना खतरे के निशान से कितनी ऊपर और नीचे है, इस बात का गवाह है. कई बार यमुना ने लोहे वाले पुल का स्पर्श किया. इसी से अंदाजा लगता था कि दिल्ली में बाढ़ का पानी कहां तक जाएगा. देश के अलग-अलग हिस्सों से जब पुल ढहने के बात सामने आई, उस वक्त 12 विशाल स्तंभों पर खड़ा यह पुल चट्टानों की तरह दिखा.
नया पुल उद्घाटन के लिए तैयार
ऐतिहासिक पुराने लोहे के पुल के समानांतर नया पुल उद्घाटन के लिए तैयार है. सिस्टम की टेस्टिंग और ट्रेनों के ट्रायल के बाद जल्द ही इसका उद्घाटन किया जाएगा. रेल मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस आधुनिक व बहु प्रतीक्षित पुल का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कराने की योजना है. यह पुल आधुनिक तकनीक और इंजीनियरिंग कौशल का शानदार नमूना है, जिसे भव्य तरीके से राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत किया जाएगा. उन्होंने कहा कि फिलहाल अभी ट्रायल का काम चल रहा है, जिसके बाद इसका उद्घाटन होगा. उम्मीद है अप्रैल माह पीएम मोदी नए लोहा पुल का उद्घाटन करेंगे. रेलवे अधिकारी ने कहा कि उद्घाटन के बाद से इस पर ट्रेनों के नियमित संचालन शुरू होगा जिससे ना सिर्फ दिल्ली, बल्कि पूरे उत्तर भारत के रेलवे नेटवर्क को नई मजबूती मिलेगी.

नए पुल में क्या खास?
नए पुल कि खासियत यह है कि इसका निर्माण आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके किया गया है. यह 25 टन एक्सल लोड सहन कर सकता है. यानी भारी व तेज रफ्तार ट्रेनें पल पर सरपट दौड़ेंगी. पुल के बनाने में करीब 227 करोड़ रुपये की लागत लगी है. यह डबल लाइन फुल 865 मीटर लंबा है. पुल पर नियमित ट्रेनों का संचालन शुरू होने के विशेष रूप से पूर्वांचल, बिहार व उत्तर प्रदेश की ओर जाने वाली गाड़ियों को राहत मिलेगी. साथ ही यात्रा समय भी कम होगा. नया पुल चालू होने के बाद पुरानी दिल्ली स्टेशन से ट्रेनों को सीधा मार्ग मिलेगा.
ढाई दशक में हुआ पुल का निर्माण
नए पुल को बनाने की स्वीकृति साल 1997-98 में दी गई थी. लेकिन इसका निर्माण कार्य वर्ष 2003 में शुरू हुआ. हालांकि, बीच-बीच में निर्माण कार्यों को रोकना पड़ता गया लेकिन 2016 में सही तरीके से काम शुरू हुआ, जो पिछले साल जाकर पूरा हुआ है. इस तरह करीब 22 वर्षों में पुल का निर्माण हुआ है.
क्यों बनाया गया नए पुल?
जानकारी के अनुसार, पुराना लोहा पुल जर्जर स्थिति में पहुंच चुका है, जो आवागमन और सुरक्षा के हिसाब से खतरनाक है. दूसरा, इसका इस्तेमाल सड़क और रेल दोनों के लिए होता था. लेकिन पुल की बनावट नीचे की तरफ होने के कारण इसकी कम ऊंचाई थी. बाढ़ के वक्त जब यमुना में पानी बढ़ता था, तो कई दिनों तक पुल को बंद करना पड़ता था, जिससे सड़क और रेल यातायात प्रभावित हो जाता था. यही वजह है की नए लोहा पुल का निर्माण किया गया, जो इससे ज्यादा ऊंचा और लंबा भी है साथ ही सुरक्षा के लिहाज से भी मजबूत है.
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