दिल्ली में सोमवार को हुए CJP के प्रदर्शन और पुलिस द्वारा लाठीचार्ज का मामला दिल्ली हाई कोर्ट तक पहुंच गया. इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अदालत को इस मामले में नहीं 'घसीटा' जाना चाहिए. कोर्ट ने विरोध मार्च में पुलिस द्वारा लाठीचार्ज से जुड़ी याचिका को तुरंत लिस्ट करने से इनकार कर दिया.
'कोर्ट का इसमें न घसीटें'
चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने याचिकाकर्ता से कहा, 'कोर्ट को इन सब चीजों में न घसीटें.' इस मामले की सुनवाई बुधवार को होगी. याचिकाकर्ता ने बेंच के सामने तुरंत सुनवाई के लिए याचिका रखी और कहा कि दिल्ली पुलिस के जवानों ने प्रदर्शनकारियों पर बहुत ज्यादा बल का इस्तेमाल किया.
सोनम वांगचुक को मेदांता किया जाएगा शिफ्ट
वहीं सोनम वांगचुक की पत्नी द्वारा दायर एक अन्य याचिका पर भी दिल्ली हाई कोर्ट ने सुनवाई की. कोर्ट ने 28 जून से अनशन कर रहे सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल शिफ्ट करने की एडवाइजरी जारी की. कोर्ट वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें सिंगल बेंच के रविवार के आदेश को चुनौती दी गई थी.
सिंगल बेंच के आदेश को डबल बेंच ने पलटा
सिंगल बेंच ने सफदरजंग अस्पताल में वांगचुक का किए जा रहे इलाज में दखल देने से इनकार कर दिया था. सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वांगचुक को मेदांता अस्पताल शिफ्ट किए जाने पर केंद्र सरकार को कोई आपत्ति नहीं है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वांगचुक को मेडिकल सलाह के बिना मेदांता अस्पताल से छुट्टी की मांग नहीं करनी चाहिए. मेहता ने कहा, ‘मेदांता एक प्रतिष्ठित अस्पताल है. अगर उन्हें (वांगचुक को) वहां शिफ्ट किया जाता है, तो सरकार को कोई आपत्ति नहीं.'
आंग्मो ने अपनी अपील में कहा है कि सिंगल बेंच का रविवार का आदेश बिना किसी गिरफ्तारी के ही वांगचुक को अवैध रूप से सफदरजंग अस्पताल में रहने के लिए बाध्य करता है और यह निर्देश देता है कि न तो वांगचुक और न ही उनकी पत्नी के पास उनके इलाज से संबंधित फैसले लेने का अंतिम अधिकार है. जस्टिस मिनी पुष्करणा ने रविवार को विशेष सुनवाई के दौरान वांगचुक के सफदरजंग अस्पताल में जारी इलाज के मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था. उन्होंने कहा था सरकार द्वारा वांगचुक को जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल ले जाने की कार्रवाई को मनमाना नहीं माना जा सकता.
बता दें कि दिल्ली पुलिस शनिवार को वांगचुक को उनके अनशन के 21वें दिन जंतर-मंतर स्थित प्रदर्शन स्थल से जबरन सफदरजंग अस्पताल ले गई थी. इसके अगले दिन आंग्मो ने अदालत का रुख कर याचिका पर तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया था. इसके बाद सोमवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर देशभर से हजारों की संख्या में छात्र इकट्ठे हुए और संसद तक मार्च करने की कोशिश की. इस दौरान कई जगहों पर पुलिस ने छात्रों पर लाठीचार्ज भी किया. दिल्ली पुलिस ने बताया कि प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा अधिकारियों के बीच झड़प में कम से कम 178 लोग घायल हुए. पुलिस ने बताया कि इनमें 118 पुलिसकर्मी शामिल थे.
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