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फैज ए इलाही मस्जिद को नहीं छेड़ा, निगम ने बताया-रामलीला मैदान की 2000 करोड़ की जमीन पर कैसे किया कब्जा

दिल्ली के फैज ए इलाही मस्जिद के करीब अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई हुई है. बताया जा रहा है कि रामलीला मैदान की करीब हजारों करोड़ रुपये की जमीन पर अवैध कब्जा हो रखा था.

फैज ए इलाही मस्जिद को नहीं छेड़ा, निगम ने बताया-रामलीला मैदान की 2000 करोड़ की जमीन पर कैसे किया कब्जा
फैज ए इलाही मस्जिद के पास कार्रवाई
  • फैज-ए-इलाही मस्जिद के आसपास बीते बीस वर्षों में करीब डेढ़ एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा
  • मस्जिद केवल 0.195 एकड़ जमीन में बनी है और उसकी जमीन को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया गया है
  • निगम ने हाईकोर्ट केस हारने के बाद अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए 32 बुलडोजर और जेसीबी लगाई थी
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नई दिल्ली:

फैज-ए-इलाही मस्जिद के नजदीक बीते 20 साल में करीब डेढ़ एकड़ जमीन कब्जा कर ली गई. जबकि मस्जिद महज 0.195 एकड़ में बनी है. निगम सूत्रों के मुताबिक अतिक्रमण मुक्त कराई जमीन की व्यवसायिक कीमत करीब 2000 हजार करोड़ रुपए हैं. निगम डिप्टी कमिश्नर विवेक अग्रवाल के मुताबिक हाईकोर्ट में केस हारने के बाद सोमवार रात को 32 बुलडोजर और JCB लगाया गया है तब जाकर अवैध अतिक्रमण को हटाया गया.

अभी वहां मलबा को हटाने में थोड़ा वक्त लगेगा. उन्होंने बताया कि मस्जिद के नजदीक रामलीला मैदान की 4047.55 स्क्वायर यार्ड जमीन पर अवैध कब्जा था और इस जमीन बैंक्वेट हॉल, लाइब्रेरी और डायग्नॉस्टिक सेंटर बना था मस्जिद की जमीन 0.195 एकड़ में मस्जिद है उसे नहीं छेड़ा गया है बाकी सब अतिक्रमण था.

20 सालों में धीरे धीरे हुआ रामलीला मैदान की जमीन का अतिक्रमण 

निगम सूत्रों के मुताबिक बीते 20 सालों में धीरे-धीरे कभी नल लगवाने के नाम पर कभी बाथरूम के नाम पर कभी लाइब्रेरी के नाम पर धीरे धीरे रामलीला मैदान की जमीन को कब्जा कर लिया है. निगम सूत्रों के मुताबिक पिछले साल तीन नोटिस दिया गया. लेकिन धार्मिक स्थल के अतिक्रमण हटाने में नोटिस देना केवल एक औपचारिकता होती है. इनको भी कई बार नोटिस दिया गया लेकिन निगम की तरफ से सख्ती नहीं बरती जा सकी.

गौरतलब है कि अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत मलबे को हटाने के लिए लगभग 30 बुलडोजर और 50 डंपर तैनात किए गए थे. एमसीडी के अधिकारियों ने बताया कि यह अभियान रात भर जारी रहा और इसमें 300 से अधिक एमसीडी कर्मचारी और अधिकारी शामिल थे. अतिक्रमण रोधी अभियान के परिणामस्वरूप एक बड़े क्षेत्र को खाली कराया गया, इन स्थानों में ऐसी संरचनाएं बनी थी जिन्हें अदालत ने अवैध घोषित किया था.

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