टाइगर श्रॉफ पर मुंबई में हुई फायरिंग के बाद लॉरेंस बिश्नोई और अनिल पंडित जैसे नाम फिर चर्चा में हैं. हमले के बाद अनिल पंडित और हरमन संधू के नाम से बिश्नोई गिरोह से जुड़ा होने का दावा करते हुए जिम्मेदारी ली गई, हालांकि पुलिस को अभी इस दावे और हमले के बीच संबंध स्थापित करना है. लेकिन इस घटना से एक दिलचस्प सवाल निकलता है. आखिर दाऊद इब्राहिम और छोटा राजन जैसे अपराध सरगनाओं को 'अंडरवर्ल्ड डॉन' कहा गया, जबकि लॉरेंस बिश्नोई के लिए आम तौर पर 'गैंगस्टर' शब्द इस्तेमाल होता है? क्या दोनों में कोई असली फर्क है या सिर्फ दौर के साथ अपराध की भाषा बदल गई है?
पहले समझिए, गैंगस्टर और डॉन में फर्क
आसान भाषा में कहें तो गैंगस्टर किसी आपराधिक गिरोह से जुड़ा व्यक्ति हो सकता है. वह गिरोह का सामान्य सदस्य भी हो सकता है या खुद उसे चलाने वाला बड़ा सरगना भी. इसके मुकाबले 'डॉन' का पारंपरिक अर्थ ज्यादा खास है. माफिया की पुरानी व्यवस्था में अपराध परिवार या गिरोह के सबसे ऊपर बैठे बॉस को 'डॉन' कहा जाता था. उसके नीचे दूसरे बड़े सहयोगी और फिर उनके मातहत लोग होते थे. यानी हर गैंगस्टर को डॉन नहीं कहा जा सकता. लेकिन यहां एक बात बेहद अहम है.
भारतीय न्याय संहिता की धारा 111 में बाकायदा 'संगठित अपराध' और 'संगठित अपराध गिरोह' की बात की गई है. इसके दायरे में वसूली, सुपारी देकर हत्या, अपहरण, जमीन कब्जाना, गंभीर साइबर अपराध, मानव और नशीले पदार्थों की तस्करी जैसे अपराध आ सकते हैं. यानी कानून के लिए ज्यादा अहम यह है कि व्यक्ति ने क्या अपराध किया और संगठित गिरोह में उसकी क्या भूमिका रही, न कि उसे आम बोलचाल में 'डॉन' कहा जाता है या 'गैंगस्टर'. इसीलिए दाऊद इब्राहिम का 'डॉन' और लॉरेंस बिश्नोई का 'गैंगस्टर' कहलाना कानूनी दर्जे का फर्क नहीं है. इसके पीछे अपराध जगत में बनी उनकी छवि, गिरोह में उनकी हैसियत और वर्षों से प्रचलित मीडिया भाषा की बड़ी भूमिका है.
दाऊद के साथ क्यों जुड़ गया 'डॉन'?
दाऊद इब्राहिम इसका सबसे चर्चित उदाहरण है. अमेरिकी वित्त विभाग ने डी-कंपनी को दाऊद इब्राहिम के नेतृत्व वाला दक्षिण एशियाई अपराध संगठन बताया है. इसके तार नशीले पदार्थों की तस्करी, वसूली, स्मगलिंग और सुपारी देकर हत्या कराने जैसी गतिविधियों से जोड़े गए हैं.
छोटा राजन भी क्यों कहलाया डॉन?
छोटा राजन की कहानी थोड़ा अलग है. मुंबई के अपराध जगत में कभी उसका नाम दाऊद इब्राहिम के साथ जुड़ा था, लेकिन बाद में दोनों अलग हो गए और छोटा राजन का अपना गिरोह सामने आया. मीडिया में इसके बाद उसके लिए भी 'अंडरवर्ल्ड डॉन' शब्द इस्तेमाल होता रहा. छोटा राजन का भी अपना पूरा गिरोह जिस तमाम तरह की आपराधिक गतिविधियों में ठीक उसी तरह शामिल था जैसा की दाऊद इब्राहिम का ग्रुप. उसने भी दाऊद की तरह ही सुपारी देकर हत्या करवाना और तस्करी और वसूली का नेटवर्क चलाया था. मुंबई के अपराध जगत में इससे पहले करीम लाला, हाजी मस्तान और वरदराजन मुदलियार जैसे नाम भी 'डॉन' के तौर पर चर्चित रहे. बाद में दाऊद इब्राहिम, अरुण गवली और छोटा राजन जैसे सरगना सामने आए.
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लॉरेंस बड़ा नाम, फिर भी 'गैंगस्टर' क्यों?
अब लॉरेंस बिश्नोई को देखिए. NIA के आधिकारिक दस्तावेज में उससे जुड़े गिरोह को 'लॉरेंस बिश्नोई संगठित अपराध गिरोह' और'लॉरेंस बिश्नोई टेरर सिंडिकेट' कहा गया है. जांच में अलग-अलग आरोपियों को हथियार जुटाने, गिरोह के बीच संपर्क कायम रखने और सदस्यों को पनाह देने जैसी भूमिकाओं से जोड़ा गया. इसलिए लॉरेंस बिश्नोई के लिए 'गैंगस्टर' शब्द का इस्तेमाल होना यह नहीं बताता कि उसका गिरोह छोटा है. बल्कि 'डॉन' और 'गैंगस्टर' अपराधियों की कोई सरकारी रैंकिंग नहीं है. NIA ने 2023 में आरोप लगाया था कि लॉरेंस बिश्नोई और कनाडा में मौजूद गोल्डी बराड़ जेल के भीतर से अपराध से जुड़ा गिरोह चला रहे थे. एजेंसी ने गिरोह के तार दूसरे अपराधियों और नशीले पदार्थों के तस्करों से भी जुड़ने का आरोप लगाया था.
शिंदे का बयान क्यों है अहम?
2024 में सलमान खान के घर के बाहर फायरिंग के बाद तत्कालीन महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा था,"ये मुंबई है. यहां अब कोई गैंगवार नहीं है. पूरा अंडरवर्ल्ड खत्म हो चुका है." उन्होंने बिश्नोई गिरोह के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात भी कही थी. यह बयान इसलिए अहम है क्योंकि मुंबई ने दाऊद, छोटा राजन और अरुण गवली के दौर के बाद लंबे समय तक पुराने अंडरवर्ल्ड जैसा खूनी संघर्ष नहीं देखा था. उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक डी-कंपनी की ओर से मुंबई में आखिरी शूटआउट 2002 में हुआ, जबकि छोटा राजन गिरोह की आखिरी बड़ी वारदात 2011 में पत्रकार जे डे की हत्या बताई गई है.
नाम बदला या अपराध का तरीका?
असल फर्क यहीं है. दाऊद के दौर में एक बड़े सरगना और उसके नीचे काम करने वाले लोगों वाला ढांचा साफ दिखाई देता था. आज गिरोह का बड़ा चेहरा जेल में हो सकता है, जबकि उससे जुड़े बताए जाने वाले लोग दूसरे राज्यों या विदेश में मौजूद हो सकते हैं. लॉरेंस बिश्नोई से जुड़े मामलों में NIA की जांच ऐसी अलग-अलग भूमिकाओं का जिक्र करती है. यानी दाऊद को 'डॉन' और लॉरेंस को 'गैंगस्टर' कहने का फर्क सिर्फ दो शब्दों का नहीं है. इसके पीछे अपराध की दुनिया का बदलता ढांचा भी छिपा है. पुराने दौर में 'डॉन' एक आपराधिक साम्राज्य के सबसे बड़े सरगना की तस्वीर पेश करता था. आज 'गैंगस्टर' कहलाने वाला व्यक्ति भी बेहद बड़ा और कई जगह फैले गिरोह का प्रमुख चेहरा हो सकता है. टाइगर श्रॉफ पर हमला बताता है कि दौर और अपराध के तरीके बदल गए हैं, लेकिन बड़े नामों को निशाना बनाकर खौफ पैदा करने की रणनीति आज भी सवालों के घेरे में है.
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