- CM सम्राट चौधरी ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शिष्टाचार भेंट की, जो उनकी पहली दिल्ली यात्रा है.
- बिहार में मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्री शपथ ग्रहण कर चुके हैं, लेकिन मंत्री अभी तक नहीं बने हैं.
- बिहार में कुल 33 मंत्रियों का प्रावधान है, लेकिन अभी तक पूर्ण मंत्रिमंडल का गठन नहीं हो पाया है.
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की है. मुख्यमंत्री बनने के बाद यह उनकी पहली दिल्ली यात्रा है, जिसे औपचारिक रूप से शिष्टाचार भेंट बताया जा रहा है. हालांकि, राजनीतिक दृष्टि से इस मुलाकात को भी अहम माना जा रहा है और बिहार में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार पर चर्चा की अटकलें लगाई जा रही हैं. सम्राट चौधरी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात कर सकते हैं.
फिलहाल राज्य में केवल मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्री ही शपथ ले चुके हैं. जनता दल (यूनाइटेड) की ओर से बिजेंद्र प्रसाद यादव और विजय चौधरी को डिप्टी सीएम बनाया गया है, जबकि भाजपा कोटे से अभी तक किसी भी विधायक को मंत्री नहीं बनाया गया है. ऐसे में पूरी कैबिनेट लगभग खाली पड़ी है, जिससे प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हो सकता है.

देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी से आज नई दिल्ली में शिष्टाचार मुलाकात की।
— Samrat Choudhary (@samrat4bjp) April 21, 2026
"विकसित भारत और समृद्ध बिहार" के विजन पर मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। माननीय प्रधानमंत्री जी का स्नेह एवं सहयोग बिहार की प्रगति को नई गति प्रदान कर रहा है।#narendramodiji #NDA4Bihar… pic.twitter.com/wHibpmZ23J
बिहार में कुल 33 मंत्रियों का प्रावधान है, लेकिन अभी तक एक भी पूर्ण मंत्रिमंडल का गठन नहीं हो सका है. ऐसे में नई सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती जल्द से जल्द कैबिनेट का विस्तार कर प्रशासन को गति देना है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दिल्ली में होने वाली इन बैठकों के बाद मंत्रिमंडल विस्तार की प्रक्रिया तेज हो सकती है और राज्य में शासन व्यवस्था को मजबूती मिलेगी.

बता दें कि 24 अप्रैल को बिहार विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया है. जिसमें मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सदन में विश्वास मत प्रस्ताव पेश करेंगे और अपनी सरकार के बहुमत को साबित करने की कोशिश करेंगे. बिहार में एनडीए की सरकार है लेकिन पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री और जदयू के दो उपमुख्यमंत्री बने हैं. एनडीए की सरकार में पहले मुख्यमंत्री के पद का दायित्व नीतीश कुमार संभाल रहे थे, जबकि भाजपा कोटे से उपमुख्यमंत्री बनते रहे थे.
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