- दिल्ली के एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में सिटिजन्स फॉर डेमोक्रेसी ने संसद जैसा मॉक पार्लियामेंट आयोजित किया था
- इस आयोजन में युवा वकील, चार्टर्ड अकाउंटेंट, सामाजिक कार्यकर्ता, छात्र शीर्ष नेताओं के किरदार में थे
- मॉक पार्लियामेंट में लोकतंत्र और अराजकता पर बहस हुई जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष के प्रतिनिधि शामिल थे
दिल्ली के एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में संसद जैसा नजारा देखने को मिला था, सिटिजन्स फॉर डेमोक्रेसी संगठन की तरफ से यह आयोजन किया गया था. जिसमें पूरा नजारा संसद की तरह देखने को मिला था. सत्ता पक्ष और विपक्ष की तरफ से सभी सांसद बैठे और एक दूसरे के साथ जमकर कई मुद्दों पर बहस हुई. यह कोई पारंपरिक राजनीतिक सभा नहीं थी, यहां देश के लोकतांत्रिक ढांचे और संसदीय प्रणाली को समझने के लिए समाज के विभिन्न वर्गों का एक अनूठा समागम था. इस सांकेतिक संसद में देश भर से आए युवा वकीलों, चार्टर्ड अकाउंटेंट और सामाजिक कार्यकर्ताओं और छात्र कलाकारों ने हिस्सा लिया था.
जमकर हुई बहस
सिटिजन्स फॉर डेमोक्रेसी संगठन के आयोजन में बड़ी खासियत यह रही कि इन आम युवाओं ने देश के शीर्ष राजनेताओं के किरदार में थे. कोई मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बना हुआ थआ, तो कोई गृह मंत्री अमित शाह बना था. दूसरी तरफ विपक्ष के नेता राहुल गांधी, सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे बनकर कड़े तेवर दिखा रहे थे. जहां मॉक पार्लियामेंट शुरु होते ही बवाल मचा. मॉक पार्लियामेंट के सभापति ने लोगों को रोका फिर शुरु हुई लोकतंत्र बनाम अराजकता पर चर्चा. चर्चा की शुरुआत मॉक पार्लियामेंट की सांसद बनी बांसुरी स्वराज ने की थी. कन्वेंशन हॉल में चल रही मॉक पार्लियामेंट में बीजेपी की तरफ से पीएम नरेंद्र मोदी, अमित शाह, शिवराज सिंह चौहान तो कांग्रेस की तरफ से सोनिया गांधी राहुल गांधी समेत अखिलेश यादव प्रतीकात्मकत तौर पर बैठे दिखे.
बांसुरी स्वराज बनी सदस्या ने कहा कि अराजकता का मतलब कानून की जगह अपनी मनमानी चलने लगती है. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और अराजकता की चर्चा में देखना चाहिए कि सरकार ने बीते 12 साल में डिजीटल समेत धनजन योजना के जरिए करोड़ों लोगों को जोड़ा गया. पुलिस कर्मियों के साथ अभद्रता की गई उनके हाथ उठाया गया क्या ये सही ? देश के रिजीम चेंज करने वाले इस देश में ये कभी नहीं होगा. देश कानून से चलेगा. देश सड़क से नहीं संसद से चलेगा. फिर बीजेपी के तरफ़ से अनुराग ठाकुर बने सदस्य ने कहा कि मानसून सत्र में विपक्ष के हंगामे की वजह से केवल 15 फीसदी काम हो पाया.
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मल्लिकार्जुन खडगे ने जैसे ही कहा मैं ज्यादा नहीं बोलता हूं. बीजेपी के सदस्य ने टोका पहले ही बोलते हैं खडगे ने कहा कि मैं पचास साल से राजनीति में हूं मुझे सब मालूम है मुझे चुनाव आयोग पर विश्वास है मैं लगातार जीतता रहा हूं मैं कई बार विधायक रहा है, लेकिन फिर भी मुझे चुनाव आयोग पर भरोसा नहीं है कर्नाटक, तेलांगाना और हिमाचल में हमारी सरकार है लेकिन चुनाव आयोग पर मुझे भरोसा नहीं है जबकि मेरा बेटा भी मंत्री है लेकिन फिर भी नहीं है.
राहुल गांधी बने सदस्य बोले
मॉक पार्लियामेंट में प्रतीकात्मक राहुल गांधी बने सदस्य ने कहा कि मैं बोलूंगा तो भूकंप आएगा. आज मैं बोल रहा हूं तो सत्ता पक्ष हिल रहा हे. ये देश संसद से चलता है मैं पूछना चाहता हूं कि ये संसद सदस्य आते कहां है अगर आप गूगल मैप पर सर्च करेंगे तो संसद सड़क से चलाई जा सकती है हमने चलाई है. चुनाव आयोग से मिलने जा रहे थे तो हमारी बसों को रोक लिया गया हमें उतरना पड़ा तो हम आकाशवाणी में बैठ गए…मैं विषयांतर नहीं करवाता हूँ अपनी बात रख रहा हूं.
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