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'एक रात में सब खत्म हो गया', बिहार में बेमौसम बारिश का कहर, किसानों के सामने लाखों के कर्ज की चिंता

राज्य के कई जिलों से जो तस्वीरें सामने आई हैं, वो सिर्फ फसल नुकसान की कहानी नहीं, बल्कि किसानों के टूटते हौसले की भी गवाही दे रही हैं.

'एक रात में सब खत्म हो गया', बिहार में बेमौसम बारिश का कहर, किसानों के सामने लाखों के कर्ज की चिंता

बिहार में बीते 24 से 48 घंटों के दौरान आई तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत को एक झटके में तबाह कर दिया. खेतों में खड़ी फसलें जमीन पर बिछ गईं, फलों के मंजर टूटकर गिर गए और किसानों की उम्मीदें भी उसी के साथ बिखर गईं. राज्य के कई जिलों से जो तस्वीरें सामने आई हैं, वो सिर्फ फसल नुकसान की कहानी नहीं, बल्कि किसानों के टूटते हौसले की भी गवाही दे रही हैं. हर जिले में मांग उठ रही है कि फसल का सही सर्वे हो और जल्द से जल्द मुआवजा मिले. 

सीजन की आमदनी पर संकट

सबसे ज्यादा असर उत्तर और मध्य बिहार के इलाकों में देखा गया, जहां गेहूं, मक्का, आलू, सरसों और दलहन की फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो गईं. आम और लीची के मंजर भी टूट गए, जिससे आने वाले सीजन की आमदनी पर भी संकट गहरा गया है.

“4 एकड़ में गेहूं लगाया था, सब बर्बाद…”

मुजफ्फरपुर के किसान सोनू की आवाज में दर्द साफ झलकता है. वह कहते हैं, हमने चार एकड़ में गेहूं की खेती की थी, लेकिन एक ही रात में सब खत्म हो गया. हमारा पूरा घर इसी खेती पर चलता है. बच्चों की पढ़ाई, इलाज, सब कुछ इसी से होता है. अब समझ नहीं आ रहा कि क्या करें. उनकी तरह कई किसान अब अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं. खेतों में गिरी फसलें सिर्फ आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि जीवन की सबसे बड़ी चिंता बन गई हैं.

“4 लाख का नुकसान हुआ, लागत भी नहीं निकल पाएगी”

खगड़िया के किसान मानकेश्वर यादव बताते हैं कि हमने साढ़े 4 एकड़ में मक्का लगाया था, जिसमें से चार एकड़ पूरी तरह बर्बाद हो गया. करीब 4 लाख रुपये का नुकसान हुआ है, जबकि ढाई लाख रुपये लागत लगी थी. अब तो लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है. उनकी यह बात बताती है कि किसानों के लिए यह सिर्फ फसल का नुकसान नहीं, बल्कि कर्ज के बोझ में दबने की शुरुआत भी है.

"कर्ज लेकर खेती की थी, अब चुकाने की चिंता”

मुजफ्फरपुर के किसान विजय कुमार राय बताते हैं, "हमने कर्ज लेकर खेती की थी. गेहूं और आलू की फसल पूरी तरह खराब हो गई है. आम और लीची के मंजर भी टूट गए हैं. अब सबसे बड़ी चिंता कर्ज चुकाने की है."  मधेपुरा के किसानों का दर्द भी कुछ अलग नहीं है. एक किसान ने बताया, एक ही रात में हमारी महीनों की मेहनत पर पानी फिर गया. पूरा फसल बर्बाद हो गया है. अब सरकार से ही उम्मीद है कि मुआवजा मिले, नहीं तो परिवार चलाना मुश्किल हो जाएगा.

“अब आत्महत्या के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा…”

इस पूरे मामले पर सांसद पप्पू यादव ने भी चिंता जताई है. उन्होंने कहा,
सिर्फ मक्का ही नहीं, अन्य फसलें भी बर्बाद हुई हैं. सभी किसानों को क्षतिपूर्ति मिलनी चाहिए. बैंक का लोन तुरंत माफ होना चाहिए, नहीं तो किसानों के पास आत्महत्या के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा.

क्या कहती है स्थिति?

इस पूरे घटनाक्रम को देखें तो साफ है कि यह एक सामान्य मौसमी बदलाव नहीं, बल्कि किसानों के लिए बड़ा आर्थिक संकट बन चुका है. फसल तैयार होने के अंतिम चरण में थी, ऐसे में हुआ नुकसान सीधे उनकी सालभर की आय पर असर डालता है.
 

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