Professor of Practice : शिक्षा जगत में अब एक बड़ा बदलाव आ चुका है. अगर आपके पास ऊंची डिग्रियां जैसे PhD या NET नहीं है, लेकिन आप अपने काम के 'पक्के खिलाड़ी' हैं, तो भी आप देश के बड़े विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर बन सकते हैं. इस खास पद को 'प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस' (PoP) कहा जाता है. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा शुरू की गई इस पहल का मकसद किताबी ज्ञान और असल दुनिया के काम (Practical Knowledge) के बीच की दूरी को कम करना है.
कौन होते हैं 'प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस'?
प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस वे अनुभवी पेशेवर (Professionals) होते हैं जिन्होंने अपने क्षेत्र में महारत हासिल की हो. उदाहरण के लिए, कोई दिग्गज पत्रकार, मशहूर कलाकार, बड़ा उद्योगपति, रिटायर्ड सेना अधिकारी या तकनीकी विशेषज्ञ.
इन पदों के लिए पारंपरिक शैक्षणिक योग्यता (Academic Degrees) की अनिवार्यता नहीं होती. इसके बजाय, व्यक्ति का 15 साल का कार्य अनुभव देखा जाता है. इनका मुख्य काम छात्रों को यह सिखाना है कि किताबी बातें असल दुनिया या इंडस्ट्री में कैसे लागू होती हैं.
क्यों पड़ी इसकी जरूरत?
अक्सर देखा जाता है कि छात्र डिग्री तो ले लेते हैं, लेकिन जब वे नौकरी के लिए मार्केट में जाते हैं, तो उन्हें काम का व्यावहारिक ज्ञान नहीं होता. 'प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस' इसी समस्या का समाधान हैं.
इंडस्ट्री का अनुभवये प्रोफेसर छात्रों को सीधे वह हुनर सिखाते हैं जिसकी बाजार में मांग है.
रोजगार के अवसरइनके मार्गदर्शन से छात्रों के लिए इंटर्नशिप और प्लेसमेंट की राह आसान हो जाती है.
नवाचार (Innovation)अनुभवी लोग कैंपस में नए आइडियाज और स्टार्टअप कल्चर को बढ़ावा देते हैं.
किसे मिल सकता है यह पद?
UGC के नियमों के अनुसार, इंजीनियरिंग, विज्ञान, मीडिया, साहित्य, उद्यमिता, सामाजिक विज्ञान और कला जैसे क्षेत्रों के विशेषज्ञ इस पद के लिए पात्र होते हैं. यह नियुक्ति आमतौर पर एक वर्ष के लिए होती है, जिसे प्रदर्शन के आधार पर बढ़ाया जा सकता है.
इसी कड़ी में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (CCSU), मेरठ ने एक शानदार मिसाल पेश की है. कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला की अध्यक्षता में हुई बैठक में सुप्रसिद्ध लोक गायिका पद्मश्री मालिनी अवस्थी को 'प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस' के पद पर नियुक्त किया गया है.
मालिनी अवस्थी के पास लोक संगीत और भारतीय संस्कृति का दशकों का अनुभव है. उनके जुड़ने से विश्वविद्यालय के छात्रों को न केवल लोक कला और क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण की प्रेरणा मिलेगी, बल्कि उन्हें मंचीय अनुभव (Stage Presence) और कला के क्षेत्र में रोजगार के व्यावहारिक गुर भी सीखने को मिलेंगे.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं