- नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा जाने का निर्णय अपने गिरते स्वास्थ्य के कारण लिया
- यह फैसला पूरी तरह नीतीश कुमार का व्यक्तिगत निर्णय था, जिसमें किसी की सलाह शामिल नहीं थी
- बीजेपी के साथ सहमति से निशांत कुमार पहले जदयू में शामिल होंगे और बाद में उपमुख्यमंत्री बनेंगे
बिहार की राजनीति में इस वक्त सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री का पद छोड़कर राज्यसभा जाने का फैसला क्यों किया? कयासों के बीच, नीतीश कुमार के बेहद करीबियों से हुई बातचीत में इस बड़े फैसले की अंदरूनी परतें खुल रही हैं. नीतीश कुमार के करीबियों के अनुसार, इस फैसले के पीछे की सबसे बड़ी वजह उनका गिरता स्वास्थ्य है. हालांकि सवाल करने वाले ये भी कहेंगे कि इतिहास में कई मुख्यमंत्रियों ने खराब स्वास्थ्य के बावजूद सत्ता संभाली है, लेकिन नीतीश कुमार के मामले में स्थिति अलग है. वे एक गठबंधन सरकार चला रहे हैं, जिसमें निरंतर सक्रियता की जरूरत होती है. अब नीतीश कुमार का स्वास्थ्य कितना खराब है और उसमें लगातार कितनी गिरावट आ रही थी इसका जवाब चंद लोगों के पास ही है.
नीतीश का अपना और एकांत फैसला
इस फैसले की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें किसी की सलाह शामिल नहीं थी. उनके गृह क्षेत्र से आने वाले एक कुर्मी नेता, जो उनके बेहद खास माने जाते हैं, का कहना है कि यह फैसला पूरी तरह से नीतीश कुमार का व्यक्तिगत निर्णय है. यहां तक कि उनके साथ पिछले 25 वर्षों से साये की तरह रहने वाले दो नेताओं ने भी इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है. ये नेता नीतीश के परिवार के सदस्य के समान हैं. बात यहां तक कही जा रही है कि नीतीश कुमार ने यह निर्णय ले कर अपने आप को बचाया है क्योंकि कैबिनेट और अन्य मीटिंग में भी कुछ समस्याएं आने लगी थीं.
सत्ता के हस्तांतरण का 'ब्लूप्रिंट' और बीजेपी से डील
इन सबके बीच नीतीश कुमार ने अपने बाद बिहार में होने वाले राजनैतिक उथल-पुथल के बीच सत्ता के हस्तांतरण का लेखा जोखा तैयार कर रखा था और इसके लिए उनकी लगातार बीजेपी नेतृत्व से बातचीत हो रही थी. बीजेपी के साथ यह तय हो गया कि नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार पहले जदयू के सदस्य बनेंगे फिर वो विधानसभा या विधानपरिषद में आएंगे. मुख्यमंत्री बदलने की हालत में जदयू के दो उपमुख्यमंत्री होंगे. इसमें एक निशांत कुमार होंगे. यह भी तय हुआ कि बीजेपी मुख्यमंत्री जिसे भी बनाए मगर उसमें नीतीश कुमार की सहमति जरूरी होगी.

दिल्ली में नामांकन, पर ठिकाना पटना ही रहेगा
भले ही नीतीश कुमार राज्यसभा सांसद के रूप में दिल्ली जा रहे हों, लेकिन उनकी योजना दिल्ली में बसने की नहीं है. वे केवल संसद सत्र के दौरान ही दिल्ली जाएंगे और खराब स्वास्थ्य के आधार पर सदन से अनुपस्थिति की अनुमति भी ले सकते हैं. साल के 11 महीने वे पटना में ही रहेंगे, क्योंकि उनका पूरा सिस्टम यहीं जमा हुआ है.
पटना में रहकर रखेंगे सरकार पर नजर
पटना में ज्यादा रहने का नीतीश कुमार का सबसे बड़ा कारण अपने बेटे निशांत कुमार को राजनीति की बारीकियां सिखाना और उन्हें उपमुख्यमंत्री के कामकाज के लिए तैयार करना है. साथ ही पटना में मौजूद रहकर वे एनडीए सरकार के कामकाज पर भी अपनी पकड़ बनाए रखेंगे. मगर सबसे बड़ा सवाल है कि अपने गिरते स्वास्थ्य की वजह से वो यह सब कितना कर पाएंगे.
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