Bhimkund Accident Odisha: भिमकुंड जैसे खतरनाक जलप्रपात में गिरने के बाद जहां लोगों की जान बचना लगभग नामुमकिन माना जाता है, वहीं 57 साल की सावित्री महंत ने हिम्मत और जिद के दम पर मौत को करीब दो घंटे तक चुनौती दी और आखिरकार जिंदा बाहर निकल आईं. उनका संघर्ष अब ‘चमत्कार' की तरह चर्चा में है.
यह घटना ओडिशा के केन्दुझर जिले के पाटणा ब्लॉक स्थित भिमकुंड जलप्रपात की है. यहां की रहने वाली सावित्री महंत किसी वजह से अचानक गहरे कुंड में गिर गईं. गिरते ही तेज बहाव उन्हें अपने साथ बहाकर ले गया और वह मुख्य कुंड से आगे मयूरभंज की ओर बहती चली गईं. हालात इतने खतरनाक थे कि एक पल को भी जान बचने की उम्मीद मुश्किल लग रही थी.
चट्टान को पकड़कर दो घंटे तक संघर्ष
गिरने के बाद सावित्री किसी तरह एक चट्टान तक पहुंच गईं और उसे पकड़कर लटक गईं. करीब दो घंटे तक वह उसी चट्टान के सहारे खुद को संभाले रहीं. नीचे तेज पानी का बहाव और आसपास फिसलन भरी चट्टानें हर पल मौत का खतरा सामने था, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी.
चीख सुनकर जुटे लोग
जब सावित्री ने मदद के लिए आवाज लगाई, तो आसपास मौजूद लोगों ने उनकी चीख सुनी. लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और स्थिति को देखकर घबरा गए. इसी बीच फायर ब्रिगेड को भी सूचना दी गई, लेकिन हालात इतने गंभीर थे कि इंतजार करना जोखिम भरा था.
स्थानीय लोगों ने बचाई जान
फायर ब्रिगेड पहुंचने से पहले ही स्थानीय लोगों ने पहल की. उन्होंने रस्सी का इंतजाम किया और काफी मशक्कत के बाद सावित्री को सुरक्षित बाहर निकाल लिया. इस पूरी कोशिश में समय जरूर लगा, लेकिन उनकी सूझबूझ और हिम्मत ने एक बड़ी जान बचा ली.
भिमकुंड की सुरक्षा पर फिर सवाल
यह घटना एक बार फिर भिमकुंड की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है. बताया जाता है कि यहां पहले भी कई हादसे हो चुके हैं और कई लोग तो अब तक लापता हैं. इसके बावजूद सालभर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए जाते. सिर्फ त्योहार या पिकनिक सीजन के दौरान ही पुलिस की तैनाती होती है.
हिम्मत की मिसाल बनी सावित्री
सावित्री महंत की यह कहानी अब सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि हिम्मत और जज्बे की मिसाल बन गई है. 57 साल की उम्र में जिस तरह उन्होंने मौत के सामने हार मानने के बजाय जिंदा रहने की जिद दिखाई, वह हर किसी के लिए प्रेरणा है.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं