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ना होर्मुज का जोखिम, ना युद्ध का असर...यूएई से हुआ ये समझौता बदल देगा सीन

फिलहाल भारत के पास कुल 3.9 करोड़ बैरल तेल जमा करने की क्षमता है. भविष्य की जरूरतों को देखते हुए सरकार दो नए रिजर्व भी तैयार करने जा रही है, जिसमें 2.7 करोड़ बैरल क्षमता वाले ओडिशा के चांदीखोल और 1.5 करोड़ बैरल क्षमता वाले पाडुर के दूसरे चरण का निर्माण शामिल है.

ना होर्मुज का जोखिम, ना युद्ध का असर...यूएई से हुआ ये समझौता बदल देगा सीन
भारत और संयुक्त अरब अमीरात ने पीएम मोदी के दौरे में कई समझौते किए हैं.
  • भारत और यूएई की कंपनी ADNOC ने भारत के भूमिगत रणनीतिक तेल भंडारों में तेल जमा करने का समझौता किया है
  • यूएई भारत के रणनीतिक तेल भंडारों में तीन करोड़ बैरल तक कच्चा तेल स्टोर करेगा, जिससे सहयोग मजबूत होगा
  • भारत में अभी कुल 3.9 करोड़ बैरल तेल स्टोर करने की क्षमता है, जिसे बढ़ाकर 7.8 करोड़ बैरल किया जाएगा

पीएम मोदी के संयुक्त अरब अमीरात दौरे में ऐसा समझौता हुआ कि भारत के दोनों हाथों में लड्डू ही लड्डू आ गया है. इंडियन स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड (देश के सामरिक पेट्रोलियम भंडार के रखरखाव के लिए जिम्मेदार सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी) ने अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी के साथ ‘रणनीतिक सहयोग' के उद्देश्य से एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. ये समझौता इतना अहम है कि भारत की सारी समस्याएं एक झटके में पूरी हो जाएंगी.

क्या है समझौते में?

नए समझौते के तहत यूएई की सरकारी तेल कंपनी (ADNOC) भारत के भूमिगत रणनीतिक भंडारों (जैसे कर्नाटक के पादुर या मंगलूरु स्थित विशाल गुफाओं) में अपना कच्चा तेल लाकर स्टोर (जमा) करेगी. संकट के समय भारत इस तेल का इस्तेमाल तुरंत कर सकेगा. यानी तेल यूएई का, जगह भारत की और इस्तेमाल दोनों देश कर सकेंगे. इस समझौते में कहा गया था कि "संयुक्त अरब अमीरात के फुजैराह में कच्चे तेल का कोई भी संभावित भंडारण भारतीय रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार का हिस्सा होगा."

भारत को इससे क्या फायदा

भारत अपनी जरूरत का 85% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है. ईरान युद्ध के दौरान ये देखा गया कि तेल सप्लाई को रोकी जा सकती है. अगर भारत खुद युद्ध में नहीं भी हो, लेकिन अगर खाड़ी के देशों में युद्ध हो रहा हो या आसपास के किसी देश में युद्ध हो रहा हो तो समुद्री रास्ते को बंद किया जा सकता है. इससे भारत जैसे किसी भी देश के लिए मुश्किल आ सकती है. पूरा देश ठप हो सकता है.

कितना तेल स्टोर करेगा यूएई

विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने शुक्रवार को भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच हुए समझौतों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भारत यात्रा के बाद संयुक्त अरब अमीरात भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार में 3 करोड़ बैरल तक कच्चे तेल का भंडारण करेगा. उन्होंने कहा कि इस कदम का उद्देश्य ऊर्जा सहयोग को मजबूत करना और भारत की ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाना है.

भारत में कहां और कितना कच्चा तेल स्टोर होता है?

भारत में अभी फिलहाल तीन जगहों पर कच्चा तेल स्टोर होता है. नीचे जानिए कहां कितना स्टोर होता है.

  • विशाखापट्टनम (आंध्र प्रदेश) : 1 करोड़ बैरल क्षमता
  • मैंगलोर (कर्नाटक): 1.1 करोड़ बैरल क्षमता
  • पाडुर (कर्नाटक): 1.8 करोड़ बैरल क्षमता

यानी फिलहाल कुल 3.9 करोड़ बैरल तेल जमा करने की क्षमता है. भविष्य की जरूरतों को देखते हुए सरकार दो नए रिजर्व भी तैयार करने जा रही है, जिसमें 2.7 करोड़ बैरल क्षमता वाले ओडिशा के चांदीखोल और 1.5 करोड़ बैरल क्षमता वाले पाडुर के दूसरे चरण का निर्माण शामिल है. इसके बाद भारत की कुल क्षमता बढ़कर 7.8 करोड़ बैरल हो जाएगी. अब संयुक्त अरब अमीरात ने 3 करोड़ बैरल कच्चा तेल अपनी तरफ से स्टोर करने का समझौता कर दिया है. 

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पिछले साल बताया था कि भारत में तेल की हर दिन की डिमांड 60 लाख बैरल है. तेल कंपनियों के पास आमतौर पर 64 दिन का स्टॉक होता है. इसमें अगर तेल भंडारों का भी जोड़ लें तो लगभग 12-13 दिनों का भंडारण भारत के पास और हो जाएगा. 

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