- असम के होजाई जिले में हाथियों के झुंड को रेलवे ट्रैक पार करने के दौरान राजधानी एक्सप्रेस को सुरक्षित रोका गया.
- वन कर्मी की सतर्कता से हाथियों और ट्रेन के बीच संभावित दुर्घटना टल गई और जानवर सुरक्षित निकल पाए.
- असम के मंत्री जयंत मल्ला बरुआ ने इस घटना को वन विभाग और रेलवे के संयुक्त प्रयासों की सफलता बताया.
असम के होजाई में हाथी राजा का झुंड झुरमुट के पास इंतजार कर रहा था. दूसरी तरफ, कुछ ही दूर पटरियों पर दौड़ती हुई राजधानी एक्सप्रेस की आवाज सुनाई दे रही थी. हाथियों का झुंड रेलवे ट्रैक पार करने के मौके का इंतजार कर रहा था. तभी एक फॉरेस्ट रेंजर उनकी सुरक्षा के लिए आगे आया और उसने ट्रेन को रुकवा दिया. हुआ कुछ यूं कि फॉरेस्ट रेंजर ने हाथ में एक लाइट लेकर दूर से ही धड़धड़ाती हुई राजधानी एक्सप्रेस को रुकने का इशारा किया. अब बात जब हाथी राजाओं की थी, तो देश की सबसे मशहूर ट्रेनों में शुमार राजधानी एक्सप्रेस को भी ब्रेक लगाना ही पड़ा.
इसके बाद हाथियों का झुंड पटरियां पार करता हुआ जंगल की ओर निकल गया.भी टाल दिया. राजधानी एक्सप्रेस' और हाथियों के झुंड के बीच देवदूत बनकर खड़े हुए एक जांबाज वन कर्मी का वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर हर किसी का दिल जीत रहा है. इस जांबाज ने न सिर्फ बेजुबानों को मौत के मुंह से निकाला, बल्कि अपनी त्वरित सूझबूझ से एक भीषण ट्रेन हादसे को भी टाल दिया. होजाई में हाथियों का झुंड रेलवे ट्रैक पार कर रहा था, तभी सतर्क वन रक्षक ने राजधानी एक्सप्रेस को सुरक्षित रोक दिया.
रेल ट्रैक पार कर रहा था हाथियों का झुंड
बुधवार सुबह असम के होजाई जिले के हवाइपुर में हाथियों के एक झुंड के रेलवे ट्रैक पार करने के कारण 'डाउन राजधानी एक्सप्रेस' को कुछ देर के लिए रोक दिया गया, ताकि जानवर सुरक्षित निकल सकें. सूत्रों के अनुसार, ट्रेन को किलोमीटर 167/8 पर रोका गया, क्योंकि हाथियों का झुंड नागांव साउथ डिवीजन की लंका रेंज के तहत हवाइपुर में ट्रैक पार कर रहा था.
असम के मंत्री जयंत मल्ला बरुआ ने भी सोशल मीडिया पर इस घटना के बारे में बताया है. उन्होंने इसे एक 'अनपेक्षित ठहराव कहा, जिससे "प्यारे विशालकाय जीवों" को सुरक्षित रूप से पार करने का मौका मिला. उन्होंने कहा कि असम वन विभाग के कर्मचारियों, लोको पायलट और लुमडिंग रेलवे कंट्रोल रूम की सतर्कता के कारण हाथियों का झुंड सुरक्षित निकल सका, जिसके बाद ट्रेन ने अपनी यात्रा फिर से शुरू की.
यह घटना असम में इंसानों और जंगली जानवरों के बीच टकराव को रोकने और रेलवे ट्रैक पर हाथियों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए वन कर्मियों और रेलवे अधिकारियों की लगातार कोशिशों को दिखाती है. वहीं, यह सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के एक दिन बाद हुई, जिसमें कहा गया था कि कोई भी राज्य हाथियों के पारंपरिक मार्गों को बंद नहीं कर सकता और न ही वहां किसी तरह की बाधा खड़ी कर सकता है. अदालत ने कहा कि फसल या संपत्ति को होने वाले नुकसान को वन्यजीवों की आवाजाही रोकने का आधार नहीं बनाया जा सकता. अदालत ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को देशभर में हाथियों के गलियारों में मौजूद अवरोधों का सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया. साथ ही, आग के गोले और जलती मशालों जैसे उपायों पर भी रोक लगा दी.
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