- असम विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल में बीजेपी को 88 से 100 सीटें और कांग्रेस को 24 से 36 सीटें मिलने का अनुमान
- सीएम पद के लिए हिमंता बिस्वा सरमा को 48 प्रतिशत और कांग्रेस के गौरव गोगोई को 32 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान है
- जातिगत वोटों में एनडीए को 56 प्रतिशत और कांग्रेस को 20 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान जताया गया है
Assam Exit Poll Results 2026: असम के एग्जिट पोल की बात करें तो बीजेपी को 88 से 100 सीटें मिलने का अनुमान है. जबकि कांग्रेस को 24 से 36 सीटें मिलती दिख रही हैं. जबकि अन्य के खाते में तीन सीटें जाती दिख रही हैं. जबकि एआईयूडीएफ का खाता भी खुलते नहीं दिख रहा है. असम विधानसभा चुनाव में एक्सिस माय इंडिया के एग्जिट पोल में मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे पसंदीदा शख्स की बात करें तो मौजूदा सीएम हिमंता बिस्वा सरमा बाजी मारते दिख रहे हैं. एग्जिट पोल में प्रतिभागियों से राय ली गई तो हिमंता सरमा के पक्ष में 48 फीसदी ने लोगों ने राय दी है. कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई को 32 फीसदी ने अपनी पसंद बताया है. जबकि 2 फीसदी ने पूर्व सीएम सर्वानंद सोनोवाल को अपनी पसंद बताया है. हगरामा मोहिलारी को 1 फीसदी और अन्य के पक्ष में 3 फीसदी ने अपनी पसंद जाहिर की है. अखिल गोगोई को 3 फीसदी, बदरुद्दीन अजमल को 2 फीसदी, प्रमोद बोरो को 3 फीसदी ने अपनी पसंद बताया है. हालांकि छह फीसदी ने अपनी राय जाहिर नहीं की है. असम में विधानसभा चुनाव की 126 सीटें हैं और बहुमत का 64 का है.
असम में जातिगत वोटों की बात करें तो एनडीए के पक्ष में 56 फीसदी और कांग्रेस के पक्ष में 20 फीसदी वोट जाते दिख रहा है. एससी वर्ग का 71 फीसदी एनडीए और 18 फीसदी कांग्रेस के खाते में जा रहा है. बीजेपी के पक्ष में असम में 64 फीसदी वोट और कांग्रेस के पक्ष में 25 फीसदी वोट जाते दिख रहा है. बीजेपी को सिर्फ 5 फीसदी मुस्लिम वोट मिलता दिख रहा है, जो पिछली बार से 3 फीसदी कम है. कांग्रेस गठबंधन के पक्ष में 78 फीसदी मुस्लिम वोट जाता दिख रहा है. एआईयूडीएफ और अन्य के पक्ष में महज 17 फीसदी मुस्लिम वोट है. सामान्य वर्ग का 73 फीसदी वोट बीजेपी और 20 फीसदी ही कांग्रेस के साथ जाता दिख रहा है.

Assam Exit Poll Results 2026
स्थानीय मुस्लिम समुदाय को रिझाया
हिमंता बिस्वा सरमा ने खुद को असमिया पहचान और संस्कृति के तौर पर कायम करने की कोशिश की है. ढालपुर और अन्य क्षेत्रों में सरकारी जमीनों से अतिक्रमण हटाने की मुहिम को असम के मूल निवासियों का जबरदस्त समर्थन मिला है.सरमा ने गोरिया, मोरिया जैसे देसी मुस्लिम समुदायों को अलग पहचान और दर्जा देकर उन्हें 'मियां' राजनीति से अलग करने की कोशिश की, जिसका असर 2021 के चुनावों में भी दिखा.
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सुशासन और विकास पुरुष बनने का प्रयास
सुशासन के लिए 'डिलीवरी मैन' की उनकी छवि भी बेहतर हुई है. लोक कल्याणकारी योजनाओं को आखिरी व्यक्ति तक पहुंचाने की उनकी मुहिम भी रंग लाई है. ओरुनोदोई योजना असम की महिलाओं के बीच उनकी लोकप्रियता का सबसे बड़ा आधार है, जहां पात्र परिवारों को सीधे कैश ट्रांसफर किया जाता है.1 लाख सरकारी नौकरियों का वादा पूरा करना और गुवाहाटी सहित पूरे राज्य में पुलों और मेडिकल कॉलेजों का जाल बिछाने से उनकी 'विकास पुरुष' की छवि को मजबूती मिली है.

Assam Exit Poll
हिंदुत्व और राष्ट्रवाद का मिश्रण
हिमंता बिस्वा सरमा ने राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी के हिंदुत्व के एजेंडे को असम में आगे बढ़ाया है. सरकारी मदरसों को सामान्य स्कूलों में बदलना और बाल विवाह के खिलाफ उनकी कठोर कार्रवाई से उन्हें लोकप्रियता मिली है.वो जटिल मुद्दों पर बिना किसी झिझक के अपनी राय रखते हैं, जो युवाओं को आकर्षित करता है. असम में कांग्रेस और AIUDF जैसे दल फिलहाल बिखरे हुए नजर आते हैं. हिमंता ने न केवल बीजेपी के कैडर को मजबूत किया है, बल्कि असम गण परिषद और UPPL जैसे क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन को भी बहुत कुशलता से संभाला है.
हिमंता बिस्वा सरमा बनाम गौरव गोगोई
असम की राजनीति में गौरव गोगोई ने खुद को मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के मुख्य प्रतिद्वंद्वी के रूप में स्थापित किया है. गौरव गोगोई ने अपने पिता और पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई की विरासत का इस्तेमाल किया. उन्होंने 'तरुण गोगोई मॉडल' बनाम 'हिमंता मॉडल' की बहस छेड़ी. पुराने कांग्रेस समर्थकों को जोड़ने में कोशिश की.उन्होंने जोरहाट सीट को अपनी रणनीति का केंद्र बनाया. खुद को दिल्ली में रहने वाले नेता के बजाय असम की मिट्टी के बेटे के रूप में पेश किया. छोटे समूहों में बैठकें, पदयात्रा, चाय बागान श्रमिकों के साथ सीधा संवाद और स्थानीय युवाओं से जुड़ाव को उन्होंने अहमियत दी.
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Assam Exit Polls 2026
विधानसभा चुनाव 2021 की गलतियों से सीखते हुए गौरव गोगोई ने विपक्षी गठबंधन (CPI, CPM, AJP और अन्य क्षेत्रीय दल) को आकार देने में मुख्य भूमिका निभाई. उनकी रणनीति बीजेपी के खिलाफ वोटों के बंटवारे को रोकना और एक संयुक्त विकल्प" पेश करना था. हालांकि ध्रुवीकरण रोकने के लिए एआईयूडीएफ से दूरी बनाए रखी.
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