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ऑपरेशन सिंदूर से सबक: ड्रोन‑मिसाइल खतरे से निपटने के लिए सेना खरीदेगी नेक्स्ट‑जेन एयर डिफेंस गन

भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर से सबक लेते हुए नई एयर डिफेंस गन (ADG-NG) खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. यह सिस्टम ड्रोन स्वार्म, विमान, मिसाइल और कम ऊंचाई वाले लक्ष्यों को निशाना बनाएगा. रक्षा मंत्रालय ने RFI जारी कर कम से कम 50% स्वदेशी सामग्री अनिवार्य की है.

ऑपरेशन सिंदूर से सबक: ड्रोन‑मिसाइल खतरे से निपटने के लिए सेना खरीदेगी नेक्स्ट‑जेन एयर डिफेंस गन
प्रतीकात्मक तस्वीर
नई दिल्ली:

ऑपरेशन सिंदूर से सबक लेते हुए सेना ने बड़ी तैयारी कर ली है. सेना अब नई नेक्स्ट जनरेशन एयरटेल डिफेंस खरीदेगी. रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना के लिए नई एयर डिफेंस गन सिस्टम (ADG-NG) खरीदने की प्रक्रिया शुरू की है. इसके लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFI) मांगी गई है.  यह गन ड्रोन, विमान और मिसाइल जैसे खतरों से निपटने के लिए होगी. इस सिस्टम में कम-से-कम 50 फीसदी हिस्सा भारत में बना होना जरूरी है.  इसमें  स्थानीय निर्माण और तकनीक पर खास जोर दिया गया है.

आज लड़ाई के खतरे का स्वरूप बदल गया है. पहले लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर ज्यादा खतरा थे. अब छोटे और इलेक्ट्रिक ड्रोन बड़ा खतरा बन गए हैं. RFI में ऑपरेशन सिंदूर का भी जिक्र है. इसमें दुश्मनों ने सैकड़ों ड्रोन का इस्तेमाल एकसाथ किया था. इनका उपयोग निगरानी और हमले दोनों के लिए हुआ.

सेना को यह सिस्टम क्यों चाहिए?

यह सिस्टम समय रहते टारगेट की पहचान करेगी. फिर उसे ट्रैक करके सस्ते तरीके से खत्म करेगी. इससे महत्वपूर्ण जगहों को नुकसान से बचाया जा सकेगा. साफ है सेना अब ऐसी गन चाहती है जो कम समय में ज्यादा टारगेट को ट्रैक और खत्म कर सके. यह गन गाड़ी पर लग सकती है या खींची जा सकती है. यह दिन और रात दोनों समय काम करेगी.  इसमें आधुनिक इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सिस्टम होगा. यह अपने आप लक्ष्य को पहचानकर हमला कर सकेगी. यह सिस्टम हर मौसम में काम करेगा. यह कई तरह के खतरों को निशाना बना सकेगा.

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प्रस्ताव में कहा गया है कि सेना को ऐसा सिस्टम चाहिए जो लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, ड्रोन, क्रूज मिसाइल और  रॉकेट और मोर्टार जैसे अलग-अलग तरह के खतरे को निशाना लगा पाए. यह 4000 मीटर या उससे ज्यादा दूरी तक निशाना लगा पाए. यह  500 मीटर प्रति सेकंड की गति से टारगेट को निशाना बनाने की क्षमता रखता हो. RFI में कहा गया है कि गन की फायरिंग रेट कम से कम 300 राउंड प्रति मिनट होनी चाहिए. आरएफआई के अनुसार ऐसे गन 2500 मीटर ऊंचाई तक मार करने की क्षमता रखता हो. ताकि ये सिस्टम छोटे विमान, पैराग्लाइडर और एरो मॉडल को भी निशाना बना पाए. यह सिस्टम कम ऊंचाई पर उड़ने वाले लक्ष्य को आसानी से निशाना बनाने की क्षमता रखता हो, जो रडार की जद में आसानी से नहीं आ पाते हैं. 

RFI में कहा गया है कि ऐसे गन का अपना पावर सिस्टम होगा. जैसे जनरेटर, बैटरी या मेन सप्लाई. प्रस्ताव में कहा गया है कि इस गन को भविष्य में अपग्रेड करने का भी सिस्टम हो. यह पुराने रडार और नेविगेशन सिस्टम से जुड़ने की क्षमता रखता हो. गन में स्मार्ट और सामान्य दोनों तरह के गोला चलना चाहिए. प्रस्ताव में कहा गया है कि ऐसे गन इसमें सभी गोलों में खुद नष्ट होने की सुविधा होनी चाहिए. ऑपरेशन सिंदूर के समय भी सेना के मौजूदा एयर डिफेंस गन ने पाकिस्तानी हमले को नाकाम कर दिया था पर अब सेना की कोशिश है वह अपनी एयर डिफेंस को इतना मजबूत करें कि दुश्मन का परिंदा भी पर नहीं मार सके.

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